प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास और व्यापार समझौते
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचाना है, जिसके चलते विकसित देश अब व्यापार समझौतों के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने राइजिंग भारत सम्मेलन में अपने भाषण में बताया कि आजादी के बाद भी कुछ लोग औपनिवेशिक मानसिकता को बनाए रखते हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया, ‘यदि हमने अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान कर अपने संस्थानों को मजबूत नहीं किया होता, तो कोई भी देश हमारे साथ व्यापार समझौते नहीं करता। यही कारण है कि विकसित देश अब हमारे साथ व्यापारिक संबंध स्थापित कर रहे हैं।’
कांग्रेस पर मोदी का आलोचना
पीएम मोदी ने आगे कहा कि हाल ही में आयोजित एआई समिट पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने इसे बदनाम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने केवल विदेशी अतिथियों के सामने कपड़े नहीं उतारे, बल्कि अपने वैचारिक दिवालियापन को भी उजागर किया है। जब निराशा और अहंकार मन में होता है, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच जन्म लेती है। कांग्रेस हमेशा इसी तरह का व्यवहार करती है।’
भारत के भविष्य पर विमर्श
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी देश की क्षमता अचानक नहीं आती। यह पीढ़ियों की मेहनत, ज्ञान और अनुभव से बनती है। उन्होंने कहा, ‘सदियों की गुलामी ने हमारे देश की क्षमता के प्रति हीनता की भावना को जन्म दिया।’ उनके अनुसार, विदेशी विचारधाराओं ने यह धारणा स्थापित की कि भारतीय अशिक्षित और अधीन हैं।
2014 से पहले की स्थिति
पीएम मोदी ने 2014 से पहले के भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अगर देश उसी निराशाजनक स्थिति में रहता, तो कोई भी देश व्यापार समझौता नहीं करता। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश की चेतना में एक नया उर्जा प्रवाहित हुआ है और भारत अब अपनी खोई हुई क्षमता को फिर से हासिल करने का प्रयास कर रहा है।

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