रोहिणी ने लालू, राबड़ी और बहनों के साथ तेजस्वी के झगड़े पर आंसू बहाए

रोते-रोते रोहिणी का गला बैठा; बोलीं- लालू, राबड़ी, बहनें साथ; तेजस्वी से झगड़े में सब रो रहे थे

राजद अध्यक्ष लालू यादव के घर में भूचाल, रोहिणी आचार्य की गंभीर आरोप

बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद राजद प्रमुख लालू यादव के घर में मचा बवाल अब चर्चा का केंद्र बन गया है। उनकी बेटी, रोहिणी आचार्य, ने आरोप लगाया है कि पार्टी की हार के संबंध में संजय यादव और रमीज नेमत के नाम का उल्लेख करने पर उनके साथ अभद्रता की गई। उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी के आवास में उन पर चप्पल फेंकी गई और गालियाँ दी गईं। इस घटनाक्रम के बाद रोहिणी ने भी राजनीति छोड़ने का संकेत देते हुए एक ट्वीट किया और फिर पटना से दिल्ली चली गईं।

भावुक बयान में पारिवारिक सहारे का जिक्र

दिल्ली से मुंबई जाते समय एक संवाददाता सम्मेलन में रोहिणी ने अपनी भावनाओं का इज़हार करते हुए कहा कि उस दिन उनके परिवार के सभी सदस्य, जिसमें उनके माता-पिता और बहनें शामिल थीं, रो रहे थे। उन्होंने बताया कि परिवार के इस हालात को देखकर उनका गला रुंध गया। रोहिणी ने यह भी कहा कि उनके पिता हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं, भले ही हालात कितने ही कठिन क्यों न हों।

सोशल मीडिया पर अपमान के आरोप

रोहिणी ने आगे कहा कि उन्हें जो बातें कहनी थीं, उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट कर दी हैं। उनका कहना था कि उन्होंने किसी भी मामले में झूठ नहीं बोला और आरोप लगाया कि उनके साथ बदसलूकी की गई। उनके अनुसार, उनके अपमान के चलते परिवार के लोग दुखी थे और यही वजह है कि उन्हें अपने मायके को छोड़ना पड़ा।

स्थाई रिश्तों के टूटने का दर्द

रोहिणी का कहना है कि परिवार में उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया गया और उन्होंने इसे सहन नहीं किया। एक भावुक पोस्ट में, उन्होंने लिखा कि किसी भी बेटी को उनके समान अपमानित नहीं होना चाहिए। रोहिणी ने यह भी व्यक्त किया कि उन्हें अपने मायके से सारे रिश्ते तोड़ने के लिए मजबूर किया गया।

बेबसी का अनुभव साझा

रोहिणी ने बताया कि उनके परिवार की स्थिति बेहद कठिन थी, जिससे वे अत्यंत दुखी थीं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “कल मुझे मजबूरन अपने रोते हुए माता-पिता और बहनों को छोड़कर जाना पड़ा। इस अपमान के कारण मुझे अनाथ की भाँति अपने घर से निकलना पड़ा।” उन्होंने यह भी अपील की कि किसी भी परिवार को इस तरह के हालात से न गुजरना पड़े।

परिवार का समर्थन और भविष्य की चिंता

रोहिणी ने अंत में यह बताया कि वह अपने ससुराल जा रही हैं, जहां उनकी सास उनकी चिंता कर रहीं हैं। उनका मानना है कि परिवार में अगर आपस में रिश्ते मजबूत रहें, तो इसी तरह के संघर्षों से बचा जा सकता है।

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