सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची विवाद पर टीएमसी की आपत्ति पर कहा ‘यह हर बार होता है’

The Supreme Court took a strong stand on the voter list controversy, saying on TMC's objections 'This happens every time'.

कोलकाता पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक साथ बड़ी संख्या में फॉर्म-6 का जमा होना कोई असामान्य घटना नहीं है, यह प्रक्रिया पहले भी देखी गई है। अदालत ने यह भी बताया कि यदि किसी नाम पर आपत्ति है, तो चुनाव आयोग के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

फॉर्म-6 को लेकर TMC की आपत्ति

तृणमूल कांग्रेस के वकील कल्याण बनर्जी ने यह तर्क रखा कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म-6 जमा किए हैं। फॉर्म-6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संसदीय क्षेत्र में परिवर्तन के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि पूरक सूची आने के बाद भी नए फॉर्म स्वीकार हो रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न होता है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: यह पहली बार नहीं

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि “ऐसा हर बार होता है, इसमें कुछ असामान्य नहीं है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी नए नाम पर आपत्ति दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है और संबंधित पक्ष चुनाव आयोग से संपर्क कर सकते हैं।

चुनाव आयोग का पक्ष

भारत निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि नियमों के अनुसार उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है, तो उसे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार है।

अदालत का प्रक्रिया को समझने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो निर्धारित तिथि तक अपडेट की जाती है।

अदालत ने संकेत दिया कि सभी आपत्तियों पर निर्णय 7 अप्रैल तक लिया जाएगा।

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