मुंबई: आज, 10 जनवरी 2026, बॉलीवुड के प्रमुख अभिनेता ऋतिक रोशन अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारतीय सिनेमा के सबसे फिट, आकर्षक और प्रतिभाशाली कलाकारों में से एक माने जाने वाले ऋतिक ने हमेशा अपने लुक्स, अभिनय और नृत्य कौशल के जरिए फैंस को प्रेरित किया है। इसके अलावा, एक खास शारीरिक विशेषता उन्हें और भी अद्वितीय बनाती है – उनके दाहिने हाथ में एक अतिरिक्त अंगूठा है।
ऋतिक का अतिरिक्त अंगूठा एक जन्मजात स्थिति है, जिसे चिकित्सा भाषा में पॉलीडैक्टिली (Polydactyly) कहा जाता है। उनके बचपन में डॉक्टरों ने सुझाव दिया था कि इसे हटाकर एक साधारण सर्जरी की जाए। हालांकि, यह कोई चिकित्सा जोखिम नहीं था और ऑपरेशन अपेक्षाकृत सरल था। फिर भी, ऋतिक के परिवार ने इसे हटवाने का निर्णय नहीं लिया।
क्यों नहीं करवाई ऋतिक की सर्जरी?
ऋतिक की मां का मानना था कि अतिरिक्त अंगूठा एक समस्या नहीं, बल्कि भगवान का एक उपहार है। उनका मानना था कि यह उनके बेटे के लिए कुछ खास है और इसे हटाया नहीं जाना चाहिए। फिल्म निर्माता राकेश रोशन, जो ऋतिक के पिता हैं, ने भी इस निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने महसूस किया कि बिना जरूरत की सर्जरी बच्चे के आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, इसलिए ऋतिक को उसकी स्थिति को स्वीकार करने देना बेहतर था।
इस वजह से, ऋतिक का अतिरिक्त अंगूठा आज भी उनके साथ है। अपने प्रारंभिक करियर में, उन्होंने कई बार इसके बारे में शर्मिंदगी और असहजता महसूस की, लेकिन समय के साथ उन्होंने इसे अपनी पहचान मान लिया। वर्तमान में, वे इसे कमजोरी के बजाय अपनी विशिष्टता का प्रतीक मानते हैं।
फिल्मों में क्यों नहीं आता नजर?
फिल्मों में, ऋतिक का अतिरिक्त अंगूठा शायद ही कभी नजर आता है। शूटिंग के दौरान, निर्माता इसे छिपाने के लिए स्मार्ट कैमरा एंगल, हाथों की पोजीशन और यहां तक कि VFX का उपयोग करते हैं। जब हाथ दिखाना जरूरी होता है, तो दृश्य को ध्यान से फ्रेम किया जाता है और अंतिम संपादन भी इसे छिपाने में सहायक होता है।
ऋतिक ने अपने करियर की शुरुआत ‘कहो ना… प्यार है’ से की और ‘जोधा अकबर’, ‘धूम 2’ और ‘कृष’ जैसी सफल फिल्मों में काम किया। उनका अतिरिक्त अंगूठा कभी भी उनके सफल करियर में बाधा नहीं बना। वास्तव में, आज वे इसकी छिपाने की कोशिश नहीं करते। अभिनय के साथ-साथ, उन्हें दुनिया भर में उनके अद्भुत नृत्य कौशल और अनुशासन के लिए भी सराहा जाता है। ऋतिक रोशन का अतिरिक्त अंगूठा अब कोई राज नहीं है; यह उनके आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और शक्ति का प्रतीक बन गया है।

