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  • नया परिसर, पुरानी धरोहर – झारखंड हाई कोर्ट में स्थापित अनोखा म्यूजियम

    नया परिसर, पुरानी धरोहर – झारखंड हाई कोर्ट में स्थापित अनोखा म्यूजियम

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड हाई कोर्ट का नया परिसर, जो रांची के धुर्वा इलाके में स्थित है, देखने में एक आधुनिक इमारत जैसा लगता है। लेकिन इस अद्वितीय बिल्डिंग के भीतर एक ऐसी गैलरी है, जो लगभग 100 वर्षों की न्यायिक विरासत की कहानी बयां करती है। यह संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह झारखंड और अविभाजित बिहार की न्यायिक यात्रा को दर्शाता है। कदम रखते ही ऐसा प्रतीत होता है जैसे आप किसी “लीगल टाइम मशीन” में प्रवेश कर गए हैं।

    100 साल की न्यायिक यात्रा एक ही जगह

    इस गैलरी का उद्देश्य युवा वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को यह दिखाना है कि वर्तमान न्याय व्यवस्था की नींव में कितनी मेहनत, परंपरा और संघर्ष हैं। यहाँ दीवारों पर लगे दस्तावेज, कांच की अलमारियों में रखे प्राचीन टाइपराइटर और ऐतिहासिक घड़ियां हैं, जो बताते हैं कि एक समय था जब हर फैसला हाथ से लिखना होता था और दस्तावेजों का संरक्षण एक चुनौती पूर्ण कार्य था।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ऐतिहासिक एंट्री

    इस संग्रहालय का विशेष आकर्षण हजारीबाग की जयप्रकाश नारायण सेंट्रल जेल का पुराना एंट्री रजिस्टर है। इसी रजिस्टर में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जेल में दाखिल होने का रिकॉर्ड मौजूद है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब सेनानियों को जेल भेजा जाता था, तब उनके रिकॉर्ड को जिस बारीकी से रखा जाता था, यह रजिस्टर उसका ज्वलंत उदाहरण है। यह सिर्फ एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि आजादी की लड़ाई और न्याय व्यवस्था के आपसी संबंध की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

    जब फैसले कलम से लिखे जाते थे

    आज के डिजिटल युग में फैसले कंप्यूटर पर टाइप होते हैं, लेकिन इस गैलरी में 1941 के हस्तलिखित जजमेंट भी प्रदर्शित किए गए हैं। उस काल के न्यायाधीशों की साफ-सुथरी लेखनी और भाषा की गंभीरता प्रशंसा के योग्य है। एक दिलचस्प परंपरा के अनुसार, जब कोई जज फाँसी की सजा सुनाता था, तो वह अपनी कलम की निब तोड़ देता था। यह गैलरी उस दौर की कलमों को भी सहेजकर रखे हुए है, जो इस बात का प्रतीक है कि जिस कलम से किसी की जिंदगी का अंत करने का आदेश दिया गया, उसका पुन: उपयोग नहीं होना चाहिए।

    टाइपराइटर से डिजिटल दौर तक

    कांच की अलमारियों में रखे पुराने टाइपराइटर, दीवार घड़ियाँ और कानूनी दस्तावेज स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि तकनीकी विकास ने न्यायपालिका को किस प्रकार बदला है। पहले जहां किसी दस्तावेज को टाइप करने में घंटों लगते थे, वहीं आज की डिजिटल प्रणाली ने काम को तेज और सरल बना दिया है।

    हफ्ते में दो दिन खुलता है म्यूजियम

    यह संग्रहालय आम जनता के लिए अभी उपलब्ध नहीं है। शुक्रवार को हाई कोर्ट के वकील यहाँ आ सकते हैं, जबकि शनिवार को कार्य दिवस के दौरान स्टाफ को यहाँ आने की अनुमति होती है।

  • बादशाह बन बैठे हैं जूनियर इंजीनियर, डिस्ट्रिक्ट जज की भी नहीं सुनते

    बादशाह बन बैठे हैं जूनियर इंजीनियर, डिस्ट्रिक्ट जज की भी नहीं सुनते

    लापरवाही के लिए भवन निर्माण सचिव को हाईकोर्ट ने जमकर फटकारा

    अदालतों की सुरक्षा संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
    रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की खंडपीठ ने आज राज्य के भवन निर्माण सचिव को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने सचिव से पूछा की एक जूनियर इंजीनियर बादशाह बन बैठता है और डिस्ट्रिक्ट जज की भी जब नहीं सुनता है तो सरकार उस पर एक्शन लेने में क्यों कतराती है। राज्य की अदालतों की सुरक्षा को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर आज झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान भवन निर्माण सचिव कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे जानना चाहा कि जब प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, घाटशिला ने एक जूनियर इंजीनियर के खिलाफ कंप्लेन किया था, तो उसके खिलाफ तुरंत एक्शन क्यों नहीं लिया गया। उसका ट्रांसफर तुरंत क्यों नहीं किया गया। इस पर भवन निर्माण सचिव की ओर से बताया गया कि बीते दिनों उसका ट्रांसफर कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब हाईकोर्ट इस विषय पर सख्त हुई है तब आनन-फानन में कार्रवाई की गई है। 4 माह पहले उस जूनियर इंजीनियर के खिलाफ शिकायत की गई थी। लेकिन एक्शन लेने में इतना समय क्यों लगाया गया। इस पर कोर्ट को बताया गया की ट्रांसफर करने से मैन पावर की कमी होती है। जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि ट्रांसफर के बाद नए लोग आते हैं। ऐसे में मैन पावर की कमी कैसे हो सकती है। भवन निर्माण विभाग में 3 साल से अधिक समय से अभियंता एक जगह पर जमे हैं, उनका ट्रांसफर क्यों नहीं किया जा रहा है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता हेमंत सिकरवार ने पैरवी की।

  • सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को फटकारा

    पूछा- जिनके पास पैसे नहीं, क्या उन्हें नहीं मिलेगी जमानत

    बड़ी रकम जमा कर आरोपी को जमानत देने के हाईकोर्ट के फैसले पर लताड़ा

    कोर्ट ने कहा कि जज ने किस आधार पर जमानत का फैसला किया, यह हमारे समझ से परे

    ऐसे सभी मामलों में जमानत को लेकर फिर से सुनवाई का निर्देश

    दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि आरोपी के पैसे जमा करने की क्षमता से जमानत नहीं तय की जा सकती है। जमानत को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के एक जज के फैसलों पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि जमानत का फैसला अपराध की प्रकृति के आधार पर होता है न कि आरोपी की इस क्षमता पर कि वह कितना पैसा जमा करा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से जुड़े इस तरह के फैसलों पर हाई कोर्ट को फिर से नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जज ने जमानत देने की जो प्रक्रिया अपनाई है वह सही नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को जमानत पर फैसला इस आधार पर लेना होता है कि अपराध किस तरह का है, उसकी गंभीरता क्या है, न कि आरोपी की पैसे देने की क्षमता से। झारखंड हाई कोर्ट को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की।
    दरअसल, झारखंड हाई कोर्ट ने कई आरोपियों को इस शर्त पर जमानत दे दी कि वे अच्छी-खासी रकम जमा कर दे, जबकि अपराध की प्रकृति पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्हें पीड़ित को अंतरिम मुआवजा के रूप में बड़ी रकम जमा करने को कहा गया।
    सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के कई ऐसे फैसलों को देखा और कहा कि अदालत के एक सिंगल जज ने जो प्रक्रिया अपनाई है, वह कानून के मुताबिक सही नहीं है। ऐसे ही एक आदेश में हाई कोर्ट ने एक शख्स और उसके मां-बाप को घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के मामले में प्री-अरेस्ट बेल यानी अग्रिम जमानत दे दी थी। इसके लिए कोर्ट ने 25 हजार रुपये का बॉन्ड भरने और पीड़ित को अंतरिम मुआवजे के तौर पर साढ़े 7 लाख रुपये देने की शर्त रखी। खास बात ये है कि पीड़ित पत्नी के मुताबिक, उसके परिवार ने ससुराल वालों को साढ़े 7 लाख रुपये का दहेज दिया था।

    अग्रिम जमानत की याचिका पैसों की रिकवरी वाली प्रक्रिया नहीं


    आरोपियों की याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जमानत की शर्तों को रद्द कर दिया। बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने जो प्रक्रिया अपनाई, वह कानून के मुताबिक नहीं है।
    बेंच ने कहा कि गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की याचिका पैसों की रिकवरी वाली प्रक्रिया नहीं है। अगर किसी शख्स को अपनी गिरफ्तारी की आशंका है तो उसे प्री-अरेस्ट बेल के लिए पैसे जमा करना हो, इसका कोई औचित्य नहीं है
    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने दहेज से लेकर धोखाधड़ी, रेप और पॉक्सो ऐक्ट जैसे अलग-अलग मामलों में भी आरोपियों को इसी तरह से जमानत दी है।
    कोर्ट ने कहा कि इन सभी मामलों में एक चीज कॉमन है। एक ही जज ने अपराध की प्रकृति के हिसाब से जमानत की जरूरतों पर सही से विचार किए बिना ही बड़ी रकम जमा करने की शर्त पर जमानतें दी। अगर कोई शख्स बड़ी रकम नहीं जमा कर सकता, उसके पास पैसे नहीं हों तो उन्हें जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यही होता दिख रहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज ने किस आधार पर जमानत का फैसला किया, यह हमारे समझ से परे है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट को इस तरह के सभी मामलों में जमानत को लेकर फिर से सुनवाई का निर्देश दिया।

  • ब्रेकिंग: हाई कोर्ट के जस्टिस अपरेश सिंह का त्रिपुरा ट्रांसफर

    उत्तराखंड के जस्टिस संजय कुमार मिश्रा आएंगे झारखंड हाई कोर्ट

    रांची। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश सिंह का तबादला त्रिपुरा हाई कोर्ट कर दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार मिश्रा का झारखंड हाई कोर्ट और जस्टिस के.विनोद चंद्रन का तबादला केरल हाई कोर्ट से मुंबई हाई कोर्ट कर दिया गया है। 28 सितंबर 2022 को हुए कॉलेजियम में सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है।

  • प्रेम प्रकाश को ईडी ने किया गिरफ्तार

    कल देर रात हुई गिरफ्तारी, आज कोर्ट में करेंगे पेश

    रांची। कभी बड़े-बड़े आईएएस, आईपीएस को अपनी उंगलियों पर नचाने वाला प्रेम प्रकाश आज खुद हिरासत में आ गया है। सत्ता के गलियारे में भारी हनक रखने वाले प्रेम प्रकाश को कल देर रात ईडी की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है ‌ आज उसे ईडी कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की कोशिश करेगी, ताकि इस मामले से जुड़े उसके कनेक्शन का पूरा पर्दाफाश किया जा सके।

  • तिरंगा उल्टा कर मना रहे अमृत महोत्सव….

    बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के अधिकारी का कारनामा
    रांची। आजादी के अमृत महोत्सव पर एक और जहां देशभर में तिरंगे को अभूतपूर्व सम्मान दिया जा रहा है, वहीं अपने झारखंड में एक अधिकारी उल्टा तिरंगा लगाकर अपनी गाड़ी दौड़ा रहा है। यह बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी कांके का।

    गाड़ी में लहरा रहा था उल्टा तिरंगा
    यूनिवर्सिटी के बिरसा कृषि अनुसंधान केन्द्र गोरियाकरमा हजारीबाग में पदस्थापित डिप्टी डायरेक्टर सीड्स एंड फार्म्स की यह बोलेरो गाड़ी है। बताया जा रहा है कि श्री निवास गिरी की गाड़ी में उल्टा तिरंगा बांधकर चलाया जा रहा था, जिसे देख स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई और बाद में इसे सीधा किया गया। स्थानीय लोगों ने गाड़ी का वीडियो भी बना लिया, जो तेजी से वायरल हो रहा है।

  • बिग ब्रेकिंग: जज हत्याकांड में रिकॉर्ड एक साल में आया फैसला

    धनबाद: जज उत्तम आनंद हत्याकांड में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने आरोपी लखन वर्मा और राहुल वर्मा को धारा 302 और 201 में दोषी करार दिया है। छह अगस्त को अदालत सजा की बिंदु पर अपना फैसला देगी। सीबीआई की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने ठीक एक साल के बाद जज उत्तम आनंद मामले में अपना फैसला सुनाया है।

    आज के दिन ही हुई थी हत्या

    28 जुलाई 2021 को सुबह न्यायाधीश उत्तम आनंद की ऑटो से टक्कर हुई थी। जिसके बाद जज उत्तम आनंद की मौत हो गई थी। धनबाद के सीबीआई के विशेष न्यायाधीश रजनीकांत पाठक की अदालत में इस मामले का स्पीडी ट्रायल हुआ। पांच महीने में 58 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के बाद 28 जुलाई 2022 की तारीख जजमेंट के लिए निर्धारित कर दी थी।

    जानबूझकर जज को मारी थी टक्कर

    सुनवाई के दौरान सीबीआई की क्राइम ब्रांच के स्पेशल पीपी अमित जिंदल ने आरोप पत्र के कुल 169 गवाहों में से 58 गवाहों का बयान दर्ज कराया था। सीबीआई ने दावा किया है कि आरोपित लखन वर्मा एवं राहुल वर्मा ने जानबूझकर जज उत्तम आनंद को टक्कर मारी थी, जिनसे उनकी मौत हुई।

  • अब जज करेंगे झारखंड हाईकोर्ट और विधानसभा के निर्माण में गड़बड़ी की जांच

    राम कृपाल कंस्ट्रक्शन की बढ़ी परेशानी, झारखंड सरकार ने दिया न्यायिक जांच का निर्देश

    रांची। घपले घोटाले के लिए देशभर में बदनामी कमा चुके झारखंड में अब एक नए घोटाले पर से भी जल्दी पर्दाफाश होने वाला है। झारखंड की नई विधानसभा भवन और हाई कोर्ट के निर्माण में बरती गई अनियमितता की जांच अब न्यायिक आयोग करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस निर्णय को अपनी मंजूरी दे दी है। राजधानी की चर्चित कंस्ट्रक्शन कंपनी राम कृपाल कंस्ट्रक्शन ने इसका निर्माण किया है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के समय में टेंडर दिए जाने के समय से लेकर निर्माण के बीच में लगातार व्यापक अनियमितता को लेकर आवाज उठती रही थी। पूर्व में हेमंत सोरेन ने इन भवनों पर लगे अनियमितता के आरोपों की जांच एसीबी से कराने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक इसमें कुछ नहीं हो सका है। अब न्यायिक आयोग की जांच में दोषियों पर कार्रवाई की गुंजाइश बढ़ गई है।