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  • पाकिस्तान ने आशा भोसले की श्रद्धांजलि पर टीवी चैनलों को भेजा नोटिस

    पाकिस्तान ने आशा भोसले की श्रद्धांजलि पर टीवी चैनलों को भेजा नोटिस

    प्रसिद्ध गायिका **आशा भोसले** के निधन के बाद पूरे विश्व में उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है, लेकिन पाकिस्तान में इस पर नया विवाद उत्पन्न हो गया है। वहां के मुख्य टीवी चैनल **जियो न्यूज** को आशा भोसले से संबंधित एक कार्यक्रम प्रसारित करने पर नियामक संस्था द्वारा नोटिस जारी किया गया है। इस कदम ने मीडिया स्वतंत्रता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नियमों के पालन के मुद्दे पर नई बहस को जन्म दिया है।

    <h3 style="text-align: justify;"><strong>सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन</strong></h3>
    <p style="text-align: justify;">**पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी** ने जियो न्यूज को नोटिस जारी करते हुए कहा कि चैनल ने आशा भोसले के निधन की सूचना देते समय भारतीय फ़िल्मों के गीत और दृश्य प्रदर्शित किए। नियामक ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन मानते हुए कहा कि इस आदेश के तहत देश में भारतीय सामग्री के प्रसारण पर रोक है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया कि यह कदम जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने के तहत आता है, जिससे चैनल पर कानूनी कार्रवाई की संभावना भी है।</p>
    
    <h3 style="text-align: justify;"><strong>चैनलों ने जताई नाराजगी</strong></h3>
    <p style="text-align: justify;">जियो न्यूज के प्रबंध निदेशक **अजहर अब्बास** ने इस कार्रवाई पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किसी महान कलाकार के निधन पर उनके कार्यों को याद करना एक सामान्य परंपरा है। उनके अनुसार, आशा भोसले जैसी प्रतिभा के लिए और अधिक गाने और यादें साझा की जानी चाहिए थीं। चैनल का मानना है कि यह कदम सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को सीमित करने का प्रयास है, जो पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।</p>
    
    <h3 style="text-align: justify;"><strong>कलाकारों ने भी की फैसले की आलोचना</strong></h3>
    <p style="text-align: justify;">पाकिस्तान के कई कलाकारों और पत्रकारों ने इस निर्णय की आलोचना की है। अभिनेता **अहसान खान** ने आशा भोसले के निधन को एक युग का अंत बताया, जबकि **अदनान सिद्दीकी** ने उनकी आवाज को भावनाओं से भरा हुआ कहा। कई पत्रकारों का मानना है कि कला और संस्कृति की कोई सीमाएँ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे एक ऐसा निर्णय बताया जो आधुनिक सोच और अभिव्यक्ति पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाता है।</p>
    
    <h3 style="text-align: justify;"><strong>14 दिन के भीतर मांगा लिखित जवाब</strong></h3>
    <p style="text-align: justify;">नियामक संस्था ने जियो न्यूज के सीईओ को 27 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए कहा है और 14 दिनों के भीतर लिखित जवाब भी मांगा है। यह मामला अब केवल एक चैनल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़े बड़े सवाल उठ रहे हैं कि सांस्कृतिक सामग्री पर इस तरह की पाबंदी उचित है या नहीं। आगामी दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस विवाद का समाधान कैसे निकलता है और मीडिया की स्वतंत्रता पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।</p>