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  • रणजी फाइनल में विवाद, पारस डोगरा ने कर्नाटक के खिलाड़ी को दिया सिर से झटका

    रणजी फाइनल में विवाद, पारस डोगरा ने कर्नाटक के खिलाड़ी को दिया सिर से झटका

    नई दिल्ली: भारतीय घरेलू क्रिकेट का सबसे सम्मानित टूर्नामेंट, रणजी ट्रॉफी, अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुका है, लेकिन फाइनल मुकाबले के दूसरे दिन एक विवादास्पद घटना ने खेल भावना को धता बता दिया। जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक के बीच चल रहे इस खिताबी मुकाबले में अनुशासन की कमी नजर आई, जब जम्मू-कश्मीर के अनुभवी कप्तान पारस डोगरा ने मैदान पर अपना आपा खो दिया और कर्नाटक के फील्डर केवी अनीश के साथ शारीरिक अभद्रता की।

    यह घटना जम्मू-कश्मीर की पारी के 101वें ओवर में हुई। उस समय कर्नाटक के तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा गेंदबाजी कर रहे थे। ओवर की चौथी गेंद पर पारस डोगरा के बल्ले का बाहरी किनारा लगने के बाद गेंद बाउंड्री के पार चली गई। इस जीवनदान के बाद डोगरा अपने साथी खिलाड़ी कन्हैया वधावन के साथ बातचीत कर रहे थे।

    स्लेजिंग और कप्तान का गुस्सा

    इसी दौरान शॉर्ट लेग पर फील्डिंग कर रहे केवी अनीश ने डोगरा को स्लेज करना शुरू कर दिया। अनीश की बातें इस कदर डोगरा को भड़काई कि उन्होंने अपना संयम खो दिया। डोगरा तेजी से अनीश की ओर बढ़कर उनके सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया। अचानक हुई इस घटना ने मैदान पर मौजूद सभी खिलाड़ियों और अंपायरों को चौंका दिया।

    मयंक अग्रवाल का बीच-बचाव और माफी

    घटना के escalating होते देख कर्नाटक के कप्तान और सीनियर खिलाड़ी मयंक अग्रवाल तुरंत सक्रिय हो गए। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों को अलग करते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कुछ ही समय बाद पारस डोगरा को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने केवी अनीश से माफी मांग ली। हालांकि, अनीश इस माफी से ज्यादा संतुष्ट नजर नहीं आए और उनके चेहरे पर नाराजगी साफ झलक रही थी। बाद में अंपायरों को कर्नाटक के खिलाड़ियों को समझाते हुए भी देखा गया। यह सारी घटना कैमरे में कैद हो गई है और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

  • भारत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 358 रनों का लक्ष्य क्यों नहीं बचा सका

    भारत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 358 रनों का लक्ष्य क्यों नहीं बचा सका

    नई दिल्ली: भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच रायपुर में खेले गए पहले वनडे में क्रिकेट प्रेमियों के लिए कई आश्चर्यजनक पल देखने को मिले। टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 358 रनों का स्कोर खड़ा किया, जो आमतौर पर वनडे क्रिकेट में जीत दिलाने वाला माना जाता है।

    हालांकि, दक्षिण अफ्रीका ने इस विशाल लक्ष्य को मात्र 6 विकेट खोकर हासिल कर लिया। यह पहली बार था जब दक्षिण अफ्रीका ने भारत के खिलाफ 350+ के लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा किया। आइए जानते हैं वे 5 मुख्य कारण जिनकी वजह से भारत को इस अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।

    1. टॉस हारना और ओस की समस्या

    इस मैच में भारत के लिए सबसे बड़ा नुकसान टॉस हारने से शुरू हुआ। दक्षिण अफ्रीका के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया, क्योंकि रायपुर की शाम में भारी ओस पड़ती है। ओस के कारण गेंद गीली हो जाती है, जिससे गेंदबाजों को पकड़ने में कठिनाई होती है। इसके चलते बल्लेबाजों को स्विंग और स्पिन कम मिलती है, जिससे दूसरी पारी में लक्ष्य हासिल करना आसान हो गया। अगर भारत टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करता, तो नतीजा शायद अलग होता।

    2. डेथ ओवरों में धीमी बल्लेबाजी

    भारत ने अच्छी शुरुआत की थी और मध्य ओवरों में स्कोर तेजी से बढ़ाया, लेकिन आखिरी 10 ओवर में बल्लेबाजों की गति रुक गई। अंतिम 10 ओवर में केवल 60 गेंदों पर 74 रन बने। केएल राहुल और रविंद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ी तेजी से रन नहीं बना सके। अगर ये दोनों और आक्रामक खेलते, तो भारत का स्कोर आसानी से 380-390 तक पहुंच सकता था, जिसे चेज करना मुश्किल होता।

    3. गेंदबाजों का महंगा प्रदर्शन

    भारत की गेंदबाजी इस मैच में पूरी तरह विफल रही। तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा ने 2 विकेट तो लिए, लेकिन उन्होंने 8 ओवर में 79 रन दिए। कुलदीप यादव भी महंगे साबित हुए, जिन्होंने 10 ओवर में 78 रन खर्च किए। डेथ ओवरों में यॉर्कर और स्लोअर गेंदें सही जगह नहीं डाली गईं, जिससे दक्षिण अफ़्रीकी बल्लेबाजों ने बड़े शॉट खेलना आसान समझा। सही लाइन-लेंथ का अभाव भारत की हार का एक बड़ा कारण रहा।

    4. यशस्वी जायसवाल द्वारा छोड़ा गया आसान कैच

    युवा ओपनर यशस्वी जायसवाल इस मैच में बल्ले से तो संघर्ष करते दिखे ही, साथ ही फील्डिंग में भी उन्होंने एक महंगा मौका गंवाया। उन्होंने ऐडन मार्करम का बेहद आसान कैच छोड़ दिया, जब मार्करम केवल 53 रन बनाकर खेल रहे थे। उस जीवनदान का फायदा उठाते हुए मार्करम ने शानदार शतक (110 रन) बनाया। एक कैच छूटने से मैच का पूरा परिदृश्य बदल गया, जिसका भारी खामियाजा भारत को उठाना पड़ा।

    5. खराब ग्राउंड फील्डिंग

    भारतीय टीम की फील्डिंग इस मैच में बेहद कमजोर हुई। यशस्वी जायसवाल, अर्शदीप सिंह, वॉशिंगटन सुंदर जैसे कई खिलाड़ियों ने बार-बार मिसफील्डिंग की। ओवरथ्रो के कारण 10-15 अतिरिक्त रन आसानी से लुट गए। छोटी-छोटी गलतियों ने मिलकर बड़ी समस्या उत्पन्न की और दबाव में आकर गेंदबाजों का प्रदर्शन भी गिरा।