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  • BCB प्रमुख ने 750 रुपये मैच फीस सुनकर बढ़ाई बांग्लादेशी खिलाड़ियों की सैलरी

    BCB प्रमुख ने 750 रुपये मैच फीस सुनकर बढ़ाई बांग्लादेशी खिलाड़ियों की सैलरी

    नई दिल्ली: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने घरेलू क्रिकेटर्स की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। हाल ही में नियुक्त बोर्ड अध्यक्ष तमीम इकबाल ने जब यह देखा कि महिला खिलाड़ियों की मैच फीस अत्यधिक कम है, तो उन्होंने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की। उनकी इस चिंतन के बाद, बोर्ड ने तुरंत खिलाड़ियों की सैलरी और मैच फीस में वृद्धि करने का निर्णय लिया। यह बदलाव बांग्लादेश क्रिकेट में लंबे समय से अपेक्षित वेतन सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

    महिला खिलाड़ियों की फीस में महत्वपूर्ण वृद्धि

    जब तमीम इकबाल को यह ज्ञात हुआ कि महिला क्रिकेटर्स को वनडे मैच के लिए केवल 1000 टका मिलते हैं, तो वे चकित रह गए। इस जानकारी के बाद, बोर्ड ने तत्काल महिला खिलाड़ियों की मैच फीस को बढ़ाने का निर्णय लिया। अब वनडे मुकाबले के लिए यह फीस 15,000 टका, फर्स्ट-क्लास मैच के लिए 20,000 टका और टी20 मैच के लिए 10,000 टका निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, शीर्ष 36 महिला खिलाड़ियों की मासिक सैलरी को 30,000 से बढ़ाकर 40,000 टका कर दिया गया है। यह बदलाव उन महिला क्रिकेटर्स के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया है, जो लंबे समय से इस सुधार की मांग कर रही थीं।

    पुरुष घरेलू खिलाड़ियों को भी मिली सहायता

    महिला खिलाड़ियों के साथ-साथ पुरुष घरेलू क्रिकेटर्स को भी इस नए निर्णय का लाभ मिला है। बोर्ड ने पुरुष क्रिकेटर्स की सैलरी में कैटेगरी के अनुसार वृद्धि की है। कैटेगरी A के खिलाड़ियों की सैलरी अब 65,000 टका, कैटेगरी B की 50,000 टका और कैटेगरी C के खिलाड़ियों की 40,000 टका कर दी गई है। फर्स्ट-क्लास मैच फीस को भी 70,000 टका से बढ़ाकर 100,000 टका किया गया है। इस परिवर्तन से उन खिलाड़ियों को विशेष रूप से सहायता मिलेगी, जो घरेलू स्तर पर संघर्ष कर रहे थे।

    तमीम इकबाल ने वृद्धि को बताया शुरुआती कदम

    तमीम इकबाल ने स्वीकार किया कि खिलाड़ियों की नई सैलरी आदर्श स्तर तक नहीं पहुंची है, लेकिन यह एक सकारात्मक दिशा में एक मजबूत शुरुआत है। उन्होंने कहा कि एक साथ बहुत बड़ी वृद्धि करना संभव नहीं था, लेकिन खिलाड़ियों को सम्मानजनक भुगतान देना अत्यंत आवश्यक है। तमीम ने बताया कि पिछले 3-4 वर्षों में सैलरी में कोई खास वृद्धि नहीं हुई थी, जिससे खिलाड़ियों में अंडरपेड होने का अनुभव हुआ था। अब इस निर्णय से उनके मनोबल में भी सुधार होगा।

    BCB की छवि सुधारने की आवश्यकता

    सैलरी बढ़ाने के इस निर्णय के साथ-साथ, तमीम ने बोर्ड की बिगड़ती छवि पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले डेढ़ साल में BCB की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और इसे सुधारने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। तमीम का कहना है कि क्रिकेट बांग्लादेश के लिए गर्व का विषय है और बोर्ड से जुड़े हर व्यक्ति को इस जिम्मेदारी को सम्मानपूर्वक निभाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में बोर्ड के संचालन में और सुधार देखने को मिल सकते हैं।

  • दिल्ली हाई कोर्ट में बांग्लादेश क्रिकेट टीम पर बैन लगाने की याचिका की सुनवाई

    दिल्ली हाई कोर्ट में बांग्लादेश क्रिकेट टीम पर बैन लगाने की याचिका की सुनवाई

    नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजनों से बाहर करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अदालत ने इसे अनुचित बताते हुए याचिकाकर्ता को चेतावनी दी और बड़े दंड लगाने की संभावना भी जताई।

    कोर्ट के आपत्ति के कारण

    मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने मंगलवार को कहा कि यह मामला विदेश नीति से संबंधित है और इसमें निर्णय लेना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से परे है। बेंच ने यह प्रश्न उठाया कि न्यायालय विदेश मंत्रालय की गतिविधियों में कैसे हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश की स्थिति का मूल्यांकन या उस पर कार्रवाई करना भारत सरकार और विदेश मंत्रालय का कार्य है, न कि न्यायालय का।

    समय बर्बाद करने वाली याचिका

    कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) एक स्वतंत्र संस्था है, तो उस पर भारतीय अदालत के आदेश कैसे लागू हो सकते हैं। बेंच ने कहा कि बिना कानूनी आधार के ऐसी याचिकाएं दाखिल करना न्यायालय का समय बर्बाद करना है। अदालत ने चेतावनी दी कि इस प्रकार की निराधार याचिकाओं पर भारी दंड लगाया जा सकता है।

    याचिकाकर्ता की फटकार

    याचिकाकर्ता ने कुछ पुराने घटनाक्रमों का उल्लेख किया, लेकिन अदालत इससे संतुष्ट नहीं हुई। बीसीसीआई की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी यह सवाल उठाया कि याचिका में आवश्यक पक्षों को शामिल नहीं किया गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की कानून समझने की क्षमता पर प्रश्न उठाते हुए फटकार लगाई।

    सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि याचिका में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को भी पक्षकार बनाया गया है, जिससे याचिका की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इस तरह की गैर-जिम्मेदार और बिना ठोस आधार वाली याचिकाएं जारी रहीं, तो इन्हें भारी दंड का सामना करना पड़ेगा।

    निर्णय लेने का समय

    सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था के कुछ निर्णयों का उल्लेख किया, तो अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। बेंच ने पूछा कि क्या भारत की न्याय व्यवस्था पाकिस्तान की अदालतों के निर्णयों को मान्यता देती है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी इस याचिका को तुच्छ और बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इसे अदालत में दाखिल नहीं किया जाना चाहिए था।

    याचिका वापस लेने की अनुमति

    अदालत की सख्ती के बाद, याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है और इसे वापस लेने के आधार पर खारिज किया गया। जाते-जाते मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने याचिकाकर्ता से कहा, “कुछ अच्छा काम कीजिए, ऐसी याचिकाएं अदालत में नहीं टिकती।”