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  • गांडीव ब्रेकिंग: अमित अग्रवाल मामले की जांच अब सीबीआई भी करेगी

    गांडीव ब्रेकिंग: अमित अग्रवाल मामले की जांच अब सीबीआई भी करेगी

    झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस संजय द्विवेदी ने दिया आदेश

    रांची। मनी लांड्रिंग केस में फंसे कोलकाता के व्यवसायी अमित अग्रवाल के मामले की जांच अब ईडी के साथ ही साथ सीबीआई भी करेगी। बुधवार को झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने अमित अग्रवाल की क्वेशिंग याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश सुनाया। जेल में बंद व्यवसायी अमित अग्रवाल ने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर उनके खिलाफ ईडी द्वारा चलाया जा रहा मनी लांड्रिंग का केस निरस्त करने की मांग की थी।

    होटवार जेल में बंद है अमित अग्रवाल

    कोलकाता का व्यवसायी अमित अग्रवाल अभी रांची के होटवार जेल में बंद है। झारखंड हाई कोर्ट में दर्ज एक मामले में अपना नाम निकलवाने के लिए हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार को 5000000 रुपए घूस देते हुए रंगे हाथ पकड़वाने वाले अमित अग्रवाल पर मनी लांड्रिंग का केस चल रहा है। उन पर आरोप है कि झारखंड सरकार में ट्रांसफर पोस्टिंग से लेकर अवैध खनन तक से की जा रही उगाही के पैसे को वह देश और विदेश में इन्वेस्ट करते थे।

  • बादशाह बन बैठे हैं जूनियर इंजीनियर, डिस्ट्रिक्ट जज की भी नहीं सुनते

    बादशाह बन बैठे हैं जूनियर इंजीनियर, डिस्ट्रिक्ट जज की भी नहीं सुनते

    लापरवाही के लिए भवन निर्माण सचिव को हाईकोर्ट ने जमकर फटकारा

    अदालतों की सुरक्षा संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
    रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की खंडपीठ ने आज राज्य के भवन निर्माण सचिव को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने सचिव से पूछा की एक जूनियर इंजीनियर बादशाह बन बैठता है और डिस्ट्रिक्ट जज की भी जब नहीं सुनता है तो सरकार उस पर एक्शन लेने में क्यों कतराती है। राज्य की अदालतों की सुरक्षा को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर आज झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान भवन निर्माण सचिव कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे जानना चाहा कि जब प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, घाटशिला ने एक जूनियर इंजीनियर के खिलाफ कंप्लेन किया था, तो उसके खिलाफ तुरंत एक्शन क्यों नहीं लिया गया। उसका ट्रांसफर तुरंत क्यों नहीं किया गया। इस पर भवन निर्माण सचिव की ओर से बताया गया कि बीते दिनों उसका ट्रांसफर कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब हाईकोर्ट इस विषय पर सख्त हुई है तब आनन-फानन में कार्रवाई की गई है। 4 माह पहले उस जूनियर इंजीनियर के खिलाफ शिकायत की गई थी। लेकिन एक्शन लेने में इतना समय क्यों लगाया गया। इस पर कोर्ट को बताया गया की ट्रांसफर करने से मैन पावर की कमी होती है। जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि ट्रांसफर के बाद नए लोग आते हैं। ऐसे में मैन पावर की कमी कैसे हो सकती है। भवन निर्माण विभाग में 3 साल से अधिक समय से अभियंता एक जगह पर जमे हैं, उनका ट्रांसफर क्यों नहीं किया जा रहा है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता हेमंत सिकरवार ने पैरवी की।