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  • युवराज सिंह ने कैंसर उपचार के अनुभव साझा किए, भावुक बयान दिया

    युवराज सिंह ने कैंसर उपचार के अनुभव साझा किए, भावुक बयान दिया

    युवराज सिंह का कैंसर से संघर्ष: एक अद्वितीय कहानी

    भारतीय क्रिकेट के दिग्गज युवराज सिंह ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपने कैंसर से जूझने का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि 2011 के विश्व कप के तुरंत बाद, जब उनका करियर अपने चरम पर था, तब उन्हें एक चौंकाने वाली खबर सुनने को मिली। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि उन्होंने कीमोथेरपी नहीं करवाई, तो उनके पास केवल तीन से छह महीने की जिंदगी बची है। यह स्थिति युवराज के लिए मानसिक रूप से बेहद कठिन थी, खासकर जब भारतीय टेस्ट टीम में सौरव गांगुली की जगह खाली हुई थी, जिसका उन्हें बेसब्री से इंतजार था।

    शिखर से अचानक गिरावट

    विश्व कप 2011 की जीत के बाद, युवराज सिंह का जीवन पूरी तरह से बदल गया था। उन्होंने उस टूर्नामेंट में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब जीता और उनकी प्रतिभा की चर्चा चारों ओर होने लगी। इस दौरान उन्हें विश्वास था कि वह टेस्ट क्रिकेट में अपनी जगह बना सकेंगे, लेकिन उनकी सेहत अचानक बिगड़ने लगी। सांस लेने में कठिनाई और लगातार उलझन के साथ डॉक्टरों ने कैंसर की पुष्टि की, जिसने युवराज पर जैसे पहाड़ तोड़ दिया।

    ‘तीन से छह महीने बाकी हैं’

    दिल्ली में एक जांच के दौरान डॉक्टर नितेश रोहतगी ने उन्हें बताया कि उनका ट्यूमर दिल और फेफड़ों के बीच एक गंभीर स्थिति में है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, ‘आपको या तो क्रिकेट खेलना है, या फिर आपको कभी भी हार्ट अटैक हो सकता है। यदि कीमोथेरपी नहीं करवाई गई, तो आपके पास केवल तीन से छह महीने हैं।’ यह चेतावनी युवराज के लिए एक गंभीर झटका थी। वह टेस्ट मैच खेलने का सपना देख रहे थे, लेकिन उनकी सेहत की स्थिति ने उनकी प्राथमिकताओं को बदलने पर मजबूर कर दिया।

    अमेरिका में इलाज और मानसिक संघर्ष

    उपचार के लिए युवराज अमेरिका गए, जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध डॉक्टर आइन्होर्न से इलाज करवाया, जिन्होंने पहले साइक्लिस्ट लांस आर्मस्ट्रांग का भी इलाज किया था। वहां बिताए समय में उन्हें एहसास हुआ कि शायद वह कभी क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे। यह मानसिक संघर्ष उनके लिए बेहद कठिन था। उन्होंने कहा, ‘यदि मैं क्रिकेट नहीं खेलता, तो मैं कौन हूं?’ यह सोच उनके अंदर एक गहरी उथल-पुथल पैदा कर रही थी, लेकिन इस कठिनाई ने उन्हें मजबूत भी बनाया।

    कमबैक की प्रेरणा और दोबारा मैदान में वापसी

    कठोर उपचार और मानसिक संघर्ष के बाद, युवराज ने धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश की। उनकी ताकत वापस लौटने लगी और उन्होंने अपनी फिटनेस पर मेहनत शुरू कर दी। लगभग एक साल बाद, युवराज ने भारतीय टीम में वापसी की और 2014 के टी20 विश्व कप में खेले। उनका यह कमबैक केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि एक योद्धा की जीत थी, जिसने जीवन और मृत्यु के बीच की लड़ाई में विजय प्राप्त की।

  • युवराज सिंह ने पिता के टिप्पणी पर धोनी और कपिल देव से मांगी माफी

    युवराज सिंह ने पिता के टिप्पणी पर धोनी और कपिल देव से मांगी माफी

    भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से चल रहे विवाद पर पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने अपने पिता के विवादास्पद बयानों को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और एमएस धोनी तथा कपिल देव के प्रति अपने सम्मान को व्यक्त किया। यह युवराज का पहला ऐसा बयान है, जिसमें उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है, जिससे क्रिकेट जगत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    पिता के बयानों ने बढ़ाई विवाद की आग

    युवराज के पिता योगराज सिंह अक्सर अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। उन्होंने धोनी और कपिल देव पर कई आरोप लगाए हैं, जो काफी विवादित रहे हैं। एक इंटरव्यू में दिए गए उनके बयानों ने क्रिकेट जगत में हलचल मचाई, जिसमें उन्होंने अपने करियर से जुड़े कुछ पुराने गिले-शिकवे व्यक्त किए थे।

    युवराज का खेद व्यक्त करना

    युवराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपने पिता की टिप्पणियों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने धोनी और कपिल देव से माफी मांगते हुए कहा कि उनके मन में हमेशा इन दोनों खिलाड़ियों के प्रति गहरा सम्मान रहा है। साथ ही, युवराज ने यह भी बताया कि परिवार के विचार और उनके अपने विचार भिन्न हो सकते हैं।

    धोनी के साथ रिश्तों पर युवराज की स्पष्टता

    युवराज ने अपने करियर के आखिरी दौर को याद करते हुए कहा कि 2017 में धोनी ने उन्हें बता दिया था कि चयनकर्ता अब उन्हें टीम में नहीं देख रहे हैं। इस महत्वपूर्ण बातचीत ने उन्हें अपने करियर की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद की। इसके बाद, युवराज ने 2019 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का निर्णय लिया।

    चयन विवाद पर नया खुलासा

    हाल ही में, पूर्व चयनकर्ता संदीप पाटिल ने स्पष्ट किया कि धोनी ने कभी भी युवराज को टीम से बाहर करने की मांग नहीं की थी। उनका कहना है कि यह चयनकर्ताओं का सामूहिक निर्णय था। इस खुलासे के बाद, कई पुराने विवादों पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • युवराज सिंह के पिता ने धोनी को समर्थन दिया, रोहित-विराट पर की टिप्पणी

    युवराज सिंह के पिता ने धोनी को समर्थन दिया, रोहित-विराट पर की टिप्पणी

    महेंद्र सिंह धोनी की वापसी: आईपीएल 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलेंगे

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के लेजेंडरी विकेटकीपर-बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गए हैं। आईपीएल 2026 में वह चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से बल्लेबाजी करते नजर आएंगे। लेकिन टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले ही उनके संन्यास को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

    योगराज सिंह ने किया धोनी का समर्थन

    इन अटकलों के बीच एक नया मोड़ तब आया जब धोनी के पूर्व आलोचक योगराज सिंह ने उनके समर्थन में आवाज उठाई। योगराज ने स्पष्ट रूप से कहा कि धोनी को अभी क्रिकेट से संन्यास लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने धोनी की फिटनेस, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण की खुलकर सराहना की।

    फिटनेस पर जोर देते हुए योगराज का बयान

    एक इंटरव्यू के दौरान योगराज सिंह ने कहा कि किसी खिलाड़ी के करियर का मापदंड उसकी उम्र नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि कोई खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो उसे खेलना जारी रखने से नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धोनी ने अपनी फिटनेस और क्षमता को साबित किया है, इसलिए उन्हें आने वाले वर्षों तक खेलते रहना चाहिए।

    आलोचकों पर योगराज का प्रहार

    योगराज ने इस दौरान आलोचकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर कौन यह तय करता है कि किसी खिलाड़ी को कब संन्यास लेना चाहिए। उनके अनुसार, जब तक खिलाड़ी मैदान पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तब तक उसे टीम से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय क्रिकेट में उम्र को लेकर होने वाली बहस को भी निराधार बताया।

    रोहित और विराट पर योगराज की राय

    योगराज सिंह ने इस दौरान रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये सभी अभी भी उत्कृष्ट खिलाड़ी हैं और उन्हें अपने प्रदर्शन से खुद को लगातार साबित करते रहना चाहिए। योगराज के अनुसार, सच्चा खिलाड़ी वही है जो अपने खेल से यह दिखाए कि वह अभी भी सर्वश्रेष्ठ है।

    पहले की आलोचनाओं के बाद बदला सुर

    ध्यान देने योग्य है कि योगराज सिंह पहले धोनी की आलोचना कर चुके हैं और अपने बेटे युवराज सिंह के करियर को लेकर भी धोनी पर सवाल उठा चुके हैं। लेकिन इस बार उनके विचार बदले हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि एक महान कप्तान और एक महान इंसान होना अलग बात है, लेकिन क्रिकेट के संदर्भ में, ‘मैं उन्हें सलाम करता हूं।’

  • T20 विश्व कप 2026 में शिवम दुबे ने बनाया नया रिकॉर्ड, हार्दिक-युवराज को किया पीछे

    T20 विश्व कप 2026 में शिवम दुबे ने बनाया नया रिकॉर्ड, हार्दिक-युवराज को किया पीछे

    नई दिल्ली: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय क्रिकेट टीम ने ग्रुप-ए के अंतिम मुकाबले में नीदरलैंड्स का सामना अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में किया। इस महत्वपूर्ण मैच में भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया।

    भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 193 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। इस बड़ी पारी में ऑलराउंडर शिवम दुबे की विशेष भूमिका रही। उन्होंने 31 गेंदों में 66 रन की शानदार पारी खेली, जिसने भारत के लिए मैच की दिशा तय की।

    शिवम दुबे की धमाकेदार पारी

    जब दुबे बल्लेबाजी के लिए आए, तब भारतीय टीम एक चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना कर रही थी। टीम ने 69 रन पर तीन विकेट गंवाए थे, जिससे रन बनाने की गति धीमी पड़ गई थी। इस स्थिति में दुबे ने पहले संभलकर बल्लेबाजी की और फिर धीरे-धीरे आक्रमक होते गए। उन्होंने बड़े शॉट्स लगाए और तेजी से रन जुटाए। दुबे ने महज 25 गेंदों में अपने अर्धशतक को पूरा किया, जो उनकी शानदार लय का प्रमाण है।

    दुबे ने हार्दिक पांड्या का रिकॉर्ड तोड़ा

    इसके साथ ही दुबे ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। जैसे ही उन्होंने 63 रन का आंकड़ा पार किया, वे टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में भारत की ओर से नंबर-5 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी के धारक बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड हार्दिक पांड्या के नाम था, जिन्होंने 2022 के टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ 63 रन बनाए थे। अब दुबे ने 66 रन बनाकर इस सूची में पहले स्थान पर जगह बनाई।

    नया मानक स्थापित किया

    टी20 वर्ल्ड कप में भारत के लिए नंबर-5 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए बड़ी पारियां खेल चुके खिलाड़ियों में दुबे के बाद हार्दिक पांड्या (63 रन), युवराज सिंह (58 रन), हार्दिक पांड्या (52 रन) और अक्षर पटेल (47 रन) शामिल हैं। इससे स्पष्ट है कि दुबे ने निचले क्रम में एक नया मानक स्थापित किया है।

    चार मैचों में 116 रन

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दुबे का प्रदर्शन अत्यंत प्रभावशाली रहा है। उन्होंने मध्य क्रम से लेकर फिनिशर की भूमिका में भी अपनी उपयोगिता साबित की है। इस टूर्नामेंट में अब तक खेले गए चार मैचों में उन्होंने 29 की औसत से कुल 116 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 178 से अधिक रहा, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी को दर्शाता है। इस दौरान उनके बल्ले से 8 चौके और 8 छक्के भी निकले हैं।

  • युवराज सिंह ने कैंसर पर विजय पाने की प्रक्रिया साझा की

    युवराज सिंह ने कैंसर पर विजय पाने की प्रक्रिया साझा की

    युवराज सिंह की कैंसर से लड़ाई और 2011 का विश्व कप

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम ने 2011 में 28 साल बाद विश्व कप का खिताब जीता। इस ऐतिहासिक जीत में युवराज सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहाँ उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया। इस दौरान वह एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, और उन्हें मैदान पर उल्टी करते हुए भी देखा गया था। टूर्नामेंट खत्म होने के बाद उनकी कैंसर से पीड़ित होने की खबर सामने आई, जिसने युवराज, उनके परिवार और फैंस के लिए बहुत कठिन समय पैदा किया।

    युवराज का कठिन समय

    हाल ही में, युवराज सिंह ने अपने जीवन की सबसे मुश्किल घड़ी को याद किया जब उन्हें 2011 विश्व कप जीतने के बाद कैंसर के बारे में पता चला। उस समय, उन्होंने महसूस किया कि उनकी जिंदगी एक गंभीर खतरे में थी। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने सफलतापूर्वक 2011 का विश्व कप जीता, और युवराज उस टournament के सबसे प्रभावी खिलाड़ी बने थे। मैदान पर उनकी शानदार खेल कला के बावजूद, वह एक बड़ी लड़ाई के बीच थे, जिसका उन्हें खुद भी सही अंदाजा नहीं था।

    विश्व कप के दौरान तबीयत में गिरावट

    युवराज ने बताया कि विश्व कप के दौरान उन्हें कई बार अस्वस्थ महसूस हुआ। विभिन्न मैचों में उन्होंने असहजता दिखाई और एक मैच में उल्टी भी की। हालांकि, किसी को भी उस समय उनकी बीमारी के बारे में नहीं पता चला। जब टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद उन्होंने जांच कराई, तब उन्हें कैंसर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि बीमारी गंभीर है और तत्काल इलाज की आवश्यकता है। उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि समय पर इलाज नहीं हुआ, तो स्थिति भयावह हो सकती है।

    युवराज के टूटने का पल

    युवराज ने एक शो में बताया कि जब डॉक्टरों ने कहा कि स्थिति नाजुक है, तो वह मानसिक रूप से बहुत टूट गए थे। उनके फेफड़ों और दिल के बीच एक ट्यूमर था। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि कीमोथेरेपी न कराने पर दिल से संबंधित गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इस मुश्किल समय में, उनके मन में डर और अनिश्चितता का सामना करना पड़ा और सबसे पहले यही ख्याल आया कि आगे क्या होगा?

    टेस्ट क्रिकेट में वापसी का इंतजार

    युवराज ने कहा कि उस समय वह टेस्ट क्रिकेट में वापसी के करीब थे। उन्होंने कई वर्षों तक इसके लिए इंतजार किया था, लेकिन इलाज के लिए उन्हें अमेरिका जाना पड़ा क्योंकि यह आवश्यक था।

    डॉक्टर की प्रेरणा से मिली नई ऊर्जा

    यह समय युवराज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कठिन साबित हुआ। फिर भी, उनके डॉक्टर की एक सलाह ने उन्हें नई ताकत दी। युवराज ने साझा किया कि डॉक्टर ने कहा था कि इलाज के बाद वह ऐसा महसूस करेंगे जैसे उन्होंने कभी कैंसर का सामना नहीं किया। जब युवराज ठीक होकर वापस क्रिकेट खेलने की अनुमति पाए, तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे उन्हें जिंदगी का नया मौका मिला हो।

  • ‘अभिषेक शर्मा के संघर्ष पर कोच राजकुमार शर्मा का खुलासा’

    ‘अभिषेक शर्मा के संघर्ष पर कोच राजकुमार शर्मा का खुलासा’

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के युवा ओपनर अभिषेक शर्मा अब हर गेंदबाज के लिए एक चुनौती बन चुके हैं। टी-20 प्रारूप में उनके द्वारा लगातार लगाए जा रहे छक्कों ने उन्हें फैंस के बीच “सिक्सर किंग” का उपनाम दिला दिया है।

    हालांकि, अभिषेक की यह सफलता रातोंरात प्राप्त नहीं हुई। इसके पीछे की कहानी वर्षों की मेहनत, समर्पण और कुछ खास लोगों का समर्थन है। आइए जानते हैं कि अभिषेक शर्मा की सफलता के पीछे का असली कारण क्या है।

    सुबह 4 बजे से शुरू होती थी दिनचर्या

    अभिषेक के पिता और पहले कोच, राजकुमार शर्मा, ने बताया कि “जब वह 13-14 साल का था, तब भी उसकी दिनचर्या सुबह 4 बजे शुरु होती थी। जिम, दौड़, तैराकी और अन्य फिटनेस गतिविधियों के लिए वह पूरी मेहनत करता था। फिर वह नेट पर घंटों बल्लेबाजी करता था। शाम को भी उसका उत्साह कम नहीं होता था।”

    11 साल की उम्र में ही छक्के उड़ाते थे

    पंजाब के जूनियर कोच अरुण बेदी आज भी आश्चर्यचकित हैं कि इतनी छोटी उम्र में अभिषेक कैसे इतने लम्बे छक्के मारता था। उन्होंने कहा, “उस उम्र में बच्चे केवल बॉल को बल्ले पर सही तरीके से हिट करना सीखते हैं, जबकि अभिषेक लॉफ्टेड छक्के मार रहा था। वह कहीं भी खड़े होकर गेंद को सीधे स्टैंड के बाहर भेज देता था।”

    युवराज सिंह बने गॉडफादर

    लॉकडाउन के दौरान अभिषेक को युवराज सिंह का साथ मिला, जो उनके लिए एक बड़ा उपहार था। युवराज ने न केवल नेट में उनके साथ ट्रेनिंग की, बल्कि आज भी फोन पर उन्हें सुधारने की कोशिश करते हैं। अभिषेक के पिता ने कहा, “अभिषेक आज भी युवराज से डरा हुआ रहता है। एक गलती हुई और फोन आ गया ‘क्या कर रहा है तू?’”

    अभिषेक ने युवराज के साथ गोल्फ खेलना भी शुरू किया। ब्रायन लारा और युवराज की सलाह थी कि गोल्फ से बैट स्विंग और टाइमिंग को ठीक करने में मदद मिलती है। इसका परिणाम यह हुआ है कि आज अभिषेक का बैट स्विंग दुनिया में सबसे बेहतरीन माने जाते हैं।

    30 टी-20 मैचों में 1000+ रन और छक्कों की भरपूर संख्या

    अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में केवल 30 मैच खेलकर 1000 से अधिक रन बनाना और लगातार छक्के लगाना, यह आंकड़े खुद अपनी कहानी बयां करते हैं। यह सब एक ऐसे बेटे की मेहनत का नतीजा है जो सुबह 4 बजे उठता था, गेंदों को स्टैंड के बाहर भेजता था, और आज भी अपने मेंटॉर युवराज के डांट से डरता है।

  • योगराज सिंह ने साझा किया अकेलेपन और जीवन की चुनौतियों का अनुभव

    योगराज सिंह ने साझा किया अकेलेपन और जीवन की चुनौतियों का अनुभव

    योगराज का अकेलापन: एक गहन बातचीत

    चंडीगढ़: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज और पंजाबी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता योगराज सिंह, जिनका बेटा युवराज सिंह विश्व कप विजेता टीम में शामिल रहे हैं, आज 62 वर्ष की आयु में गहरे अकेलेपन का सामना कर रहे हैं। हाल ही में एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने जीवन के कुछ कठिन अनुभव साझा किए हैं, जो सुनने वालों को चौंका देते हैं।

    योगराज ने अपनी स्थिति को बयां करते हुए कहा, “मैं अपने घर में अकेला रहता हूं। शाम होते ही सन्नाटा चारों ओर छा जाता है। घर में कोई नहीं होता। खाना कभी-कभी अनजाने लोग भेज देते हैं। मैं किसी को परेशान नहीं करता। जब भूख लगती है, तो कोई न कोई खाना पहुंचा ही देता है। पहले नौकर और बावर्ची थे, वे भी चले गए। अब सिर्फ मेरा अकेलापन और मैं हूँ।”

    मौत के लिए तैयार हूँ…

    उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी मां, बच्चों, बहू और पोते-पोतियों से बहुत प्रेम करता हूं, लेकिन मैं किसी से कुछ नहीं मांगता। मैंने जीवन में सबकुछ देख लिया है। अब कुछ नहीं बचा। मैं मृत्यु के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। मेरा सफर लगभग समाप्त हो चुका है। जब भगवान चाहेंगे, मुझे बुला लेंगे। मैं रोज प्रार्थना करता हूं और भगवान मुझ पर कृपा रखते हैं। मैं इसके लिए आभारी हूं।”

    योगराज ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा आघात तब आया जब शबनम और युवराज ने उनका साथ छोड़ दिया। उन्होंने कहा, “जब उन लोगों ने मुझे छोड़ दिया, जिन्हें मैंने इतना प्यार दिया, तो मैं खुद को असहाय महसूस करने लगा। यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा झटका था।”

    आज मेरे साथ कोई नहीं…

    योगराज यह भी कहते हैं कि उन्होंने जीवन के कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन अक्सर सोचते हैं कि बुढ़ापे में उनके पास कोई क्यों नहीं है। “यह भगवान का खेल था, मेरे लिए यही लिखा था। मुझे बहुत गुस्सा था और बदले की भावना भी आई। फिर क्रिकेट आया, लेकिन वह भी बीच में रुक गया। मैंने युवराज को क्रिकेट सिखाया, लेकिन वह आगे बढ़ गया। फिर मैंने दोबारा शादी की और दो बच्चे हुए, जो अमेरिका चले गए। कुछ फिल्में आईं, समय बीत गया, और मैं वापस वहीं आ गया जहाँ से शुरू किया था। अब मैं खुद से पूछ रहा हूं कि मैंने ये सब किसके लिए किया? क्या मेरे साथ कोई है आज?”

  • अभिषेक शर्मा की बहन की शादी में युवराज सिंह ने किया धमाकेदार डांस, वीडियो देखें।

    अभिषेक शर्मा की बहन की शादी में युवराज सिंह ने किया धमाकेदार डांस, वीडियो देखें।

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    अभिषेक शर्मा-युवराज सिंह का डांस: लुधियाना में भव्य प्री-वेडिंग समारोह

    अभिषेक शर्मा-युवराज सिंह का डांस: भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की बहन कोमल शर्मा की शादी का जश्न लुधियाना में धूमधाम से मनाया गया। इस प्री-वेडिंग उत्सव में क्रिकेट और बॉलीवुड का अनोखा संगम देखने को मिला, लेकिन पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अभिषेक शर्मा के साथ डांस करते हुए ऐसा माहौल बनाया कि सभी दर्शक आनंदित हो उठे।

    यह समारोह 3 अक्टूबर को होने वाली कोमल शर्मा की शादी से पहले आयोजित किया गया, जिसमें पंजाबी संस्कृति के रंग नजर आए। इस अवसर पर पंजाबी गायक रणजीत बावा ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से महफिल को और भी जीवंत बना दिया। उनकी धुनों पर अभिषेक शर्मा ने डांस किया और समारोह में उत्साह भर दिया।

    भांगड़ा की धुन पर युवराज ने किया कमाल 🕺

    इस समारोह की खास बात युवराज सिंह का भांगड़ा था। उन्होंने अभिषेक और उनके पिता के साथ मिलकर स्टेज पर ऐसा डांस किया कि दर्शकों ने तालियां बजाने में खुद को रोक नहीं पाया। युवराज की ऊर्जा और पंजाबी अंदाज ने समारोह की रौनक को और बढ़ा दिया। उनका डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहाँ उनके फैंस उनकी तारीफें कर रहे हैं। युवराज और अभिषेक की यह गुरु-चेला जोड़ी इस खास मौके को और भी यादगार बना गई।

    अभिषेक शर्मा की क्रिकेट में चमकती पहचान 🌟

    शादी के जश्न के बीच, अभिषेक शर्मा के क्रिकेट प्रदर्शन ने भी सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने हाल ही में एशिया कप 2025 में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का खिताब जीता। 24 वर्षीय इस युवा ओपनर ने 7 पारियों में 314 रन बनाये, जिनमें तीन अर्धशतक शामिल थे। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने भारतीय टीम को एशिया कप जीताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    टूर्नामेंट के अंत में अभिषेक को एक कार भी पुरस्कार में मिली। उन्होंने कहा, “कार जीतना एक खुशी देने वाला अनुभव है। इस टूर्नामेंट ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वर्ल्ड कप के बाद लौटना आसान नहीं था, लेकिन मैंने और मेरी टीम ने पहले गेंद से आक्रामक खेलने की रणनीति अपनाई। कोच और कप्तान ने मुझे पूरा समर्थन दिया, जिससे मैं आत्मविश्वास के साथ खेल सका।”