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  • उमा भारती ने 2024 लोकसभा चुनाव न लड़ने का कारण बताया

    उमा भारती ने 2024 लोकसभा चुनाव न लड़ने का कारण बताया

    उमा भारती का चिंतन: शराबबंदी और आगामी चुनावों पर महत्वपूर्ण बातें

    भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने शनिवार को टीकमगढ़ में अपने बड़े भाई स्वर्गीय स्वामी प्रसाद के फार्महाउस में एक पत्रकार वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बिहार में शराबबंदी का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना की। उमा ने कहा कि भले ही नीतीश के कुछ विधायक शराब बेचते रहे, फिर भी उनकी संकल्पशक्ति के कारण बिहार में शराबबंदी संभव हो पाई। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश में समाज की सक्रिय भागीदारी को शराबबंदी के लिए आवश्यक बताया।

    आगामी चुनावों का चुनावी बयान

    उमा भारती ने आगामी चुनावों को लेकर एक मजबूत राजनीतिक बयान देने में संकोच नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह 2029 में झांसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की योजना बना रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने 2024 का चुनाव इसलिए नहीं लड़ा क्योंकि वह उस समय गंगा सफाई अभियान में पूरी तरह व्यस्त थीं।

    राष्ट्रीय सुरक्षा और कांग्रेस पर आरोप

    भारत में चल रही एसआईआर बहस पर उमा भारती ने कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसे देश के हित में देखा जाना चाहिए।

    भारत का सांस्कृतिक पहचान

    हिंदू राष्ट्र पर अपनी सोच व्यक्त करते हुए उमा भारती ने कहा कि भारत सांस्कृतिक रूप से एक हिंदू राष्ट्र है और यह हमेशा रहेगा। उन्होंने इस विचार को सांप्रदायिकता से जोड़ने के बजाय इसे सांस्कृतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया।

    प्रेम विवाह पर विचार

    प्रेम विवाह को ले कर उमा ने प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाया। उनका मानना है कि यदि दोनों परिवारों की सहमति हो, तो जाति कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने संतोष वर्मा के विवादित बयान की भी निंदा की।

    समाज का योगदान शराबबंदी में

    उमा ने बताया कि टीकमगढ़ के कई ग्रामीण क्षेत्रों में समाज ने स्वयं पहल करते हुए शराबबंदी लागू की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “शराबबंदी और गौ सेवा समाज का काम है, जिसे शासन के साथ-साथ जनता को मिलकर निभाना होगा।” इस पत्रकार वार्ता में उमा भारती ने एक बार फिर से अपने स्पष्ट और निडर दृष्टिकोण को उजागर किया, जो सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित था।