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  • अगस्त्य नंदा की फिल्म ‘इक्कीस’ का पहले सोमवार पर 73% गिरावट के साथ धक्का

    अगस्त्य नंदा की फिल्म ‘इक्कीस’ का पहले सोमवार पर 73% गिरावट के साथ धक्का

    मुंबई: अगस्त्य नंदा की पहली फिल्म ‘इक्कीस’ बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष कर रही है। श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी यह युद्ध ड्रामा 1 जनवरी 2026 को दर्शकों के सामने आई थी। फिल्म में दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की अंतिम परफॉर्मेंस है, जिसने दर्शकों की भावनाओं को छू लिया है। हालांकि, फिल्म की कमाई में काफी गिरावट आई है।

    अगस्त्य नंदा की ‘इक्कीस’ को पांचवे दिन सामना करना पड़ा झटका

    ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के अनुसार, ‘इक्कीस’ ने अपने पहले सोमवार को महज 1.35 करोड़ रुपये कमाए। यह चौथे दिन की 5 करोड़ रुपये की कमाई से लगभग 73% की बड़ी गिरावट है। अब तक फिल्म की कुल नेट कमाई भारत में लगभग 21.50 करोड़ रुपये हो चुकी है। पहले दिन फिल्म ने 7 करोड़, दूसरे दिन 3.5 करोड़, तीसरे दिन 4.65 करोड़ और चौथे दिन 5 करोड़ रुपये कमाए थे।

    वीकेंड पर अच्छी शुरुआत के बाद, वर्किंग डेज में दर्शकों की संख्या में कमी आई। फिल्म की कहानी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की बसंतर की लड़ाई पर आधारित है। अगस्त्य नंदा ने प्रारंभिक उम्र में परम वीर चक्र पाने वाले सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है। उनके साथ जयदीप अहलावत, सिमर भाटिया (अक्षय कुमार की भांजी) और अन्य कलाकार भी हैं।

    पहले सोमवार पर कमाई में आई 73% की गिरावट

    दर्शकों और समीक्षकों ने फिल्म की भावनात्मक संवेदनशीलता, अभिनय, और युद्ध के मानवीय पहलुओं की सराहना की है। कई समीक्षक इसे एक एंटी-वार फिल्म कह रहे हैं, जो दर्शकों के जज्बातों को छूती है। हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर ‘इक्कीस’ को रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से कड़ी टक्कर मिल रही है। ‘धुरंधर’ ने अपने 32वें दिन में 4.50 करोड़ रुपये कमाए, जो ‘इक्कीस’ की कमाई से तीन गुना अधिक है।

    ‘इक्कीस’ दर्शकों को थिएटर में लाने में रही असफल

    ‘धुरंधर’ की कुल कमाई अब 776 करोड़ रुपये को पार कर चुकी है और यह नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है। नए साल की पहली बड़ी रिलीज होने पर भी, ‘इक्कीस’ दर्शकों को थिएटरों तक लाने में असफल रही है। फिल्म को सकारात्मक वर्ड ऑफ माउथ मिल रहा है, जिससे आने वाले दिनों में थोड़ी रिकवरी की संभावनाएं हैं, लेकिन ‘धुरंधर’ की सफलता के सामने यह काफी चुनौतीपूर्ण प्रतीत हो रहा है। धर्मेंद्र सर की अंतिम फिल्म को बड़े पर्दे पर देखना एक गहन और भावुक अनुभव है।

  • अमिताभ बच्चन के पोते अगस्त्य ने कहा, ‘मेरा सरनेम नंदा है’

    अमिताभ बच्चन के पोते अगस्त्य ने कहा, ‘मेरा सरनेम नंदा है’

    मुंबई: बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन के नाती और नवोदित सितारे अगस्त्य नंदा ने अपनी पहली थिएट्रिकल फिल्म ‘इक्कीस’ के साथ चर्चा में हैं। इस फिल्म का निर्देशन श्रीराम राघवन ने किया है और यह 1 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इसमें अगस्त्य ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए सबसे छोटे परम वीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है। इस फिल्म में उनके साथ धर्मेंद्र, जयदीप अहलावत और सिमर भाटिया जैसे जाने-माने कलाकार भी हैं।

    मेरा सरनेम नंदा है…

    हाल ही में एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान, अगस्त्य ने अपने डायरेक्टर श्रीराम राघवन और को-स्टार सिमर भाटिया के साथ बातचीत की। इस दौरान उनसे बच्चन परिवार के दबाव के बारे में पूछा गया। उन्होंने कहा, “मैं इस दबाव को बिल्कुल नहीं लेता, क्योंकि यह मेरी लेगेसी नहीं है। मेरा सरनेम नंदा है और मैं अपने पिता को गर्वित करने पर ध्यान केंद्रित करता हूं। यही मेरी विरासत है जिसे मैं गंभीरता से आगे ले जाना चाहता हूं।” अगस्त्य ने यह भी कहा कि वो अपने परिवार के अन्य सदस्य जो अभिनेता हैं, उनके काम की प्रशंसा करते हैं, लेकिन उनकी नकल नहीं कर सकते।

    फिल्म इक्कीस के बारे में

    फिल्म ‘इक्कीस’ को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन अगस्त्य की परफॉर्मेंस की काफी सराहना हो रही है। उनके दादा अमिताभ बच्चन ने भी इस फिल्म को देखकर उनकी तारीफ की है। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म शुरुआती दिनों में ठीक-ठाक कमाई कर रही है और युद्ध ड्रामा के शौकीनों को अपनी ओर खींच रही है। अगस्त्य की इस ईमानदारी को सोशल मीडिया पर प्रशंसा मिल रही है, जिससे यह साफ हो जाता है कि वे अपने अभिनय करियर को गंभीरता से ले रहे हैं।

  • धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’: इमोशंस और जोश से भरी, अगास्त्य का प्रदर्शन कैसा

    धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’: इमोशंस और जोश से भरी, अगास्त्य का प्रदर्शन कैसा

    मुंबई: श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित फिल्म **इक्कीस** अब सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है। यह फिल्म भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट **अरुण खेत्रपाल** के जीवन पर आधारित है। फिल्म में अरुण खेत्रपाल का किरदार **अगस्त्य नंदा** ने निभाया है, जबकि उनके पिता **ब्रिगेडियर एम. एल. खेत्रपाल** के पात्र में **धर्मेंद्र** नजर आते हैं। महत्वपूर्ण भूमिका में **जयदीप अलहावत** भी हैं।

    <p>**इक्कीस** अरुण खेत्रपाल के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को उजागर करती है। यह फिल्म उनके बचपन, परिवार, पहले प्यार, एनडीए के दिनों और पूना हॉर्स के साथ सैन्य सफर को दर्शाते हुए, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध तक पहुँचती है। विशेष रूप से, बसंतर की लड़ाई को फिल्म का भावनात्मक केन्द्र बनाया गया है।</p>
    
    <h3><strong>इक्कीस की कहानी</strong></h3>
    <p>कहानी की शुरुआत 2001 से होती है, जब ब्रिगेडियर एम. एल. खेत्रपाल लाहौर में अपने कॉलेज के पुराने दोस्तों से मिलने जाते हैं। यह यात्रा उन्हें अपने अतीत की याद दिलाती है। बंटवारे से पहले का समय, पुराना घर और वह स्थान जहां उनके बेटे ने देश की रक्षा में बलिदान दिया। वह तीन दिन **नसीर** के घर रुकते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि नसीर उनके अतीत से जुड़ी एक गंभीर सच्चाई छुपाए हुए है।</p>
    
    <h3><strong>इक्कीस का डायरेक्शन</strong></h3>
    <p>**इक्कीस** की सबसे बड़ी खूबी इसका निर्देशन है। श्रीराम राघवन ने इस फिल्म को नॉन-लीनियर ढंग से पेश किया है। अतीत और वर्तमान के बीच लगातार बदलाव कहानी को एक विशेष रंग प्रदान करता है। यह तरीका दर्शकों से पूरा ध्यान मांगता है और कई बार उन्हें चौंका देता है। कुछ सीन इतने प्रभावी हैं कि टाइमलाइन का बदलाव विचार करने के लिए मजबूर कर देता है।</p>
    
    <p>धर्मेंद्र से जुड़े दृश्य फिल्म की आत्मा हैं। उनकी अदाकारी शांत रहती है, लेकिन भीतर की गहरी पीड़ा का अहसास कराती है। संवादों की कमी के बावजूद, वह दुख और गर्व का संतुलन रखते हैं। वहीं, अगस्त्य नंदा के युद्ध दृश्य अत्यंत दमदार हैं। उनकी ट्रेनिंग और युद्ध के क्षण दिखाते हैं कि एक सैनिक बनने के लिए सिर्फ हिम्मत नहीं, बल्कि अनुशासन और बलिदान भी जरूरी है। फिल्म का विजुअल टोन संतुलित रहता है, जबकि रंगों का चयन कहानी के मूड के अनुरूप है।</p>
    
    <h3><strong>कहां कमजोर पड़ती है फिल्म</strong></h3>
    <p>फिल्म के पहले हिस्से में कुछ अस्थिरता दिखाई देती है। जब दर्शक किसी दौर में डूब जाता है, तो एडिटिंग उसे अचानक दूसरे समय में ले जाती है। यह बार-बार का बदलाव कुछ स्थानों पर ध्यान भटकाता है। इसके अलावा, रोमांटिक ट्रैक मुख्य कहानी की तुलना में कमजोर लगता है और कई बार गैर-जरूरी भी महसूस होता है।</p>
    
    <p>अगस्त्य नंदा ने अरुण खेत्रपाल के किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है। वह एक युवा सैनिक की ऊर्जा और संकल्प को अच्छे से दर्शाते हैं। युद्ध के दृश्यों में उनकी बॉडी लैंग्वेज और आंखों की गंभीरता विद्यमान है। धर्मेंद्र फिल्म के भावनात्मक आधार हैं। उनका प्रदर्शन साधारण, लेकिन प्रभावशाली है, जहां वह यादों, दुख और गर्व को संतुलन में रखते हैं। जयदीप अहलावत ने भी अपने किरदार में गहराई और सच्चाई को भलीभांति पेश किया है।</p>
  • ‘इक्कीस’ की रिलीज टली, करण जौहर ने धर्मेंद्र पर दी श appreciation

    ‘इक्कीस’ की रिलीज टली, करण जौहर ने धर्मेंद्र पर दी श appreciation

    करण जौहर ने प्रकट की धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ के प्रति भावनाएं

    मुंबई: बॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता करण जौहर ने दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म ‘इक्कीस’ के लिए अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। करण का मानना है कि धर्मेंद्र जी को एक बार फिर स्क्रीन पर देखना सभी प्रशंसकों और सिनेमा प्रेमियों के लिए बेहद खास अवसर होगा। यह फिल्म धर्मेंद्र की अंतिम फिल्म है, जिसे अब पोस्टह्यूमस रिलीज किया जाएगा।

    ‘इक्कीस’: एक युद्ध नाटकीयता पर आधारित कहानी

    ‘इक्कीस’ एक वॉर ड्रामा है, जिसका निर्देशन प्रख्यात फिल्म निर्माता श्रीराम राघवन कर रहे हैं। फिल्म का आधार 1971 के भारतीय-पाकिस्तानी युद्ध में शहीद हुए भारत के सबसे युवा परम वीर चक्र विजेता सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की सच्ची कहानी है। अरुण केवल 21 वर्ष की आयु में शहीद हुए, जिसे देखते हुए फिल्म का टाइटल ‘इक्कीस’ रखा गया है। मुख्य भूमिका में अमिताभ बच्चन के पोते अगस्त्य नंदा का अभिनय होगा, जो अपने थिएटर डेब्यू के लिए तैयार हैं।

    धर्मेंद्र का किरदार और करण का बयान

    धर्मेंद्र जी फिल्म में अरुण के पिता ब्रिगेडियर एम.एल. खेत्रपाल का किरदार निभा रहे हैं। करण जौहर ने अपनी प्रोडक्शन फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “मैं ‘इक्कीस’ देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। यह फिल्म हम सभी के लिए बेहद खास है। धर्मेंद्र जी के प्रति हमारा इतना सम्मान और प्यार है। उनका निधन हमारे लिए एक बड़ा नुकसान है। उन्हें आखिरी बार पर्दे पर देखना फैंस के लिए एक अनमोल खुशी के बराबर होगा।”

    धर्मेंद्र का निधन: एक युग का अंत

    करण ने आगे बताया कि उन्हें अगस्त्य नंदा और अनन्या पांडे जैसे युवा कलाकारों के प्रति व्यक्तिगत लगाव है। धर्मेंद्र जी का निधन 24 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में हुआ। बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ कहे जाने वाले धर्मेंद्र ने छह दशकों में 300 से अधिक फिल्में कीं। उन्होंने ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’ जैसी क्लासिक फिल्मों से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। उनकी आखिरी रिलीज फिल्म ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ थी, लेकिन ‘इक्कीस’ उनकी अंतिम परफॉर्मेंस के रूप में याद की जाएगी।

    ‘इक्कीस’ की नई रिलीज तिथि

    फिल्म की रिलीज डेट पहले 25 दिसंबर 2025 थी, लेकिन अब इसे 1 जनवरी 2026 के लिए निर्धारित किया गया है। इस बदलाव का कारण बॉक्स ऑफिस पर चल रही अन्य बड़ी फिल्मों की सफलता है, जिससे ‘इक्कीस’ को बेहतर स्क्रीन और शोज मिल सकेंगे। फिल्म में जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। ‘इक्कीस’ न केवल एक वीर सैनिक की कहानी है, अपितु यह धर्मेंद्र जी को श्रद्धांजलि भी प्रस्तुत करेगी। फैंस के लिए यह फिल्म भावुक पलों से भरी होगी।

  • धर्मेंद्र की अंतिम कविता ने फैंस को किया भावुक; वीडियो में देखें संपूर्ण माहौल

    धर्मेंद्र की अंतिम कविता ने फैंस को किया भावुक; वीडियो में देखें संपूर्ण माहौल

    धर्मेंद्र: बॉलीवुड का अमर ‘ही-मैन’ अब नहीं रहे

    बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र, जिन्हें हम प्यार से ‘ही-मैन’ के नाम से जानते हैं, 24 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गए। उनका निधन अस्पताल से छुट्टी मिलने के केवल 12 दिन बाद हुआ, जिसने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया। उनका 90वां जन्मदिन 8 दिसंबर को आना था, लेकिन दुखद रूप से किस्मत ने उन्हें इससे पहले ही हमसे छीन लिया। उम्र से संबंधित बीमारियों ने उनकी जिंदगी का अंत कर दिया। धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार पवन हंस श्मशान में किया गया, जहां उनके परिवार के सदस्य, जैसे सनी देओल, बॉबी देओल, हेमा मालिनी, और ईशा देओल, ने उन्हें अंतिम बार विदाई दी।

    आखिरी कविता का जादू

    अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, और करण जौहर जैसे दिग्गज सितारों ने धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि दी। उनकी आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ के निर्माताओं ने 28 नवंबर को एक विशेष वीडियो जारी किया, जिसमें धर्मेंद्र द्वारा लिखी गई उनकी अंतिम कविता शामिल है। यह पंजाबी कविता, ‘आज भी जी करदा है, पिंड अपने नूं जानवा…’ में गाँव की यादों को बड़ी गहराई से व्यक्त किया गया है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं।

    वीडियो में अद्भुत भावनाएँ

    इस वीडियो में दर्शाया गया है कि कैसे उनका किरदार अपने गाँव लौटता है, पुराने दोस्तों से मिलता है, और बचपन की गलियों में खो जाता है। यह रोमांटिक नॉस्टैल्जिया इतना सच्चा है कि देखने वालों को लगता है मानो धर्म जी खुद अपनी कहानी सुना रहे हों। ‘इक्कीस’ में जयदीप अहलावत मुख्य भूमिका में हैं, जो कर्ण कोल्हापुरी के जीवन पर आधारित एक युद्ध नाटक है। इस वीडियो के एक दृश्य में धर्मेंद्र और दिवंगत असरानी की जोड़ी को साथ में हंसते हुए दिखाया गया है, जो ‘शोले’ से उनकी यादों को ताजा करता है। यह दृश्य दर्शकों के लिए अलविदा का एक भावनात्मक संदेश है।

    धर्म जी की कविता: जिंदगी का अक्स

    निर्माताओं का कहना है, ‘धर्म जी की यह कविता उनकी जिंदगी का आईना है, जो पिंड की मिट्टी से जुड़े रहने का संदेश देती है।’ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जहाँ प्रशंसक अपनी भावनाएँ साझा कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, ‘यह कविता नहीं, दिल की पुकार है। RIP ही-मैन, आप अमर हो।’ शाहरुख खान ने ट्वीट किया है, ‘धर्म जी, आपकी सादगी और ताकत हमेशा याद रहेगी।’ वहीं, हेमा मालिनी ने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘मेरे साथी, तुम्हारी यह आखिरी रचना सबसे खूबसूरत है।’

    धर्मेंद्र का फिल्मी करियर

    धर्मेंद्र ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है, ‘फूल और पत्थर’ से लेकर ‘रॉकी और रानी’ तक। ‘शोले’ का वीरू और ‘चुपके चुपके’ का प्रोफेसर जैसे हर किरदार ने दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई। धर्मेंद्र ने राजनीति में भी कदम रखा, लेकिन उनकी जड़ें हमेशा पिंड से जुड़ी रहीं। उन्होंने लुधियाना के नसराली गाँव से मुंबई में कदम रखा था, और उनकी मिट्टी का प्यार आखिर तक उनके दिल में बसा रहा। इस वीडियो को देखकर लगता है कि जैसे धर्म जी ने अपनी जिंदगी की किताब के आखिरी पन्ने पर सबसे प्यारी शायरी लिख दी हो।