महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव के करीब, राजनीतिक वार-पलटवार तेज
मुंबई। महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, महागठबंधन और महायुति के दलों के बीच तीखे वार-पलटवार का माहौल बढ़ता जा रहा है। भाजपा और उद्धव की शिवसेना आमने-सामने हैं। शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हाल ही में कहा कि यदि उनके पिता बाल ठाकरे ने मदद नहीं की होती, तो भाजपा कुपोषण के कारण खत्म हो जाती। इस बयान के पहले भाजपा के रावसाहेब दानवे ने कहा था कि सभी राजनीतिक दलों ने भाजपा की मेज़ पर भोजन किया है।
उद्धव ठाकरे की तीखी प्रतिक्रिया
दानवे के बयान पर उद्धव ठाकरे ने जवाब देते हुए कहा कि अगर बालासाहेब ठाकरे ने भाजपा को सहारा नहीं दिया होता, तो वे कुपोषण से मर चुके होते। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने उनकी थाली का जूठन भी खाया है और अंत में पूछा कि भाजपा कब तक उनकी खुराक पर निर्भर रहेगी। ठाकरे ने यह भी व्यक्त किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं में अंतहीन भूख दिखाई देती है।
महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना का इतिहास
यह उल्लेखनीय है कि 1990 में जब पहली बार भाजपा ने महाराष्ट्र की सत्ता में कदम रखा, तब वह शिवसेना के साथ गठबंधन में थी। उद्धव ठाकरे ने कहा कि विपक्षी उम्मीदवारों को समाप्त करने की कोशिशें चल रही हैं और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई करने का आह्वान किया।
छत्रपति संभाजीनगर की स्थिति पर चिंता
ठाकरे ने छत्रपति संभाजीनगर में जल आपूर्ति की स्थिति को गंभीर बताया, जहाँ साल में केवल 44 दिन पानी मिलता है। उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब पूरे शहर के लिए पाइपलाइन योजना का कार्य प्रारंभ हुआ था, लेकिन वर्तमान सरकार ने केवल कर्ज लेने का कार्य किया और योजनाओं को पूरा नहीं किया।
भाजपा की नीति पर सवाल
उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा विभिन्न धर्मों के बीच बंटवारा करने की कोशिश कर रही है और यह राज्य को कर्ज में डूबो रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार देश को तानाशाही की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है।

