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  • नगर निगम चुनाव में तकनीकी त्रुटि, 26 हजार से अधिक मत पत्र निराधार, परिणाम प्रभावित

    नगर निगम चुनाव में तकनीकी त्रुटि, 26 हजार से अधिक मत पत्र निराधार, परिणाम प्रभावित

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    रांची नगर निगम चुनाव की मतगणना में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है, जिसके मुताबिक कुल 26,501 वोट रद्द कर दिए गए हैं। यह संख्या कई वार्डों में जीत-हार के अंतर से कहीं अधिक है। इस स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं कि यदि मतदाता थोड़े सावधान रहते, तो चुनाव परिणाम अलग हो सकते थे।

    रद्द वोटों की वजहें

    विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बड़ी संख्या में मत रद्द होने के पीछे तकनीकी कारण हैं। कई मतदाताओं ने चुनावी मुहर लगाने के बजाय अंगूठा लगाया या कई ने बिना मुहर लगाए ही बैलेट पेपर छोड़ दिया। कुछ मतदाताओं ने एक से अधिक स्थानों पर मुहर लगाई, जबकि अन्य ने हस्ताक्षर की जगह अंगूठे की स्याही लगाकर अपने वोट को अमान्य कर दिया। इन सामान्य भूलों ने हजारों वोटों को बेकार कर दिया।

    कम अंतर, ज्यादा रद्द वोट

    चुनाव परिणामों का विश्लेषण यह दर्शाता है कि कई वार्डों में जीत का अंतर बहुत कम रहा है, लेकिन अस्वीकृत वोट सैकड़ों में थे। अगर ये वोट वैध होते, तो परिणाम बदल सकते थे।

    इन 7 वार्डों का गणित

    • वार्ड 2: अंतर 97 वोट, रद्द मत 687
    • वार्ड 14: अंतर 96 वोट, रद्द मत 532
    • वार्ड 33: अंतर 74 वोट, रद्द मत 453
    • वार्ड 38: अंतर केवल 26 वोट, रद्द मत 441
    • वार्ड 40: अंतर 130 वोट, रद्द मत 301
    • वार्ड 29: अंतर 121 वोट, रद्द मत 276
    • वार्ड 53: अंतर 204 वोट, रद्द मत 465

    उदाहरण के लिए, वार्ड 38 में केवल 26 मतों के अंतर से परिणाम तय हुआ, जबकि 441 वोट रद्द कर दिए गए। वार्ड 2 और 14 में भी जीत का अंतर 100 से कम रहा, लेकिन रद्द वोट हजारों में थे।

    जागरूकता की कमी

    चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि बैलेट पेपर मतदान में मतदाताओं को पर्याप्त दिशा-निर्देश नहीं मिलने के कारण इतनी बड़ी संख्या में वोट रद्द हुए। कई मतदाता सही स्थान पर मुहर नहीं लगा सके और प्रक्रिया की कुछ छोटी तकनीकी शर्तों का पालन नहीं किया।

    वार्डवार अस्वीकृत वोट

    • वार्ड 1 – 408
    • वार्ड 2 – 687
    • वार्ड 3 – 442
    • वार्ड 4 – 609
    • वार्ड 5 – 750
    • वार्ड 6 – 336
    • वार्ड 7 – 486
    • वार्ड 8 – 516
    • वार्ड 9 – 460
    • वार्ड 10 – 675
    • वार्ड 11 – 546
    • वार्ड 12 – 394
    • वार्ड 13 – 586
    • वार्ड 14 – 532
    • वार्ड 15 – 593
    • वार्ड 16 – 731
    • वार्ड 17 – 273
    • वार्ड 18 – 293
    • वार्ड 19 – 389
    • वार्ड 20 – 303
    • वार्ड 21 – 372
    • वार्ड 22 – 904
    • वार्ड 23 – 858
    • वार्ड 24 – 308
    • वार्ड 25 – 151
    • वार्ड 26 – 403
    • वार्ड 27 – 546
    • वार्ड 28 – 699
    • वार्ड 29 – 276
    • वार्ड 30 – 341
    • वार्ड 31 – 368
    • वार्ड 32 – 529
    • वार्ड 33 – 453
    • वार्ड 34 – 780
    • वार्ड 35 – 601
    • वार्ड 36 – 836
    • वार्ड 37 – 763
    • वार्ड 38 – 441
    • वार्ड 39 – 402
    • वार्ड 40 – 301
    • वार्ड 41 – 263
    • वार्ड 42 – 363
    • वार्ड 43 – 278
    • वार्ड 44 – 257
    • वार्ड 45 – 478
    • वार्ड 46 – 453
    • वार्ड 47 – 547
    • वार्ड 48 – 520
    • वार्ड 49 – 482
    • वार्ड 50 – 784
    • वार्ड 51 – 237
    • वार्ड 52 – 625
    • वार्ड 53 – 465

    कुल रद्द मत: 26,501

  • कर्नाटक: बेंगलुरु के नगर निगम चुनाव में बैलट पेपर से मतदान होगा

    कर्नाटक: बेंगलुरु के नगर निगम चुनाव में बैलट पेपर से मतदान होगा

    बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव: बैलट पेपर से मतदान की वापसी

    बेंगलुरु। कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने नगर निकाय चुनावों में मतदान के लिए बैलट पेपर के उपयोग की घोषणा की है। यह निर्णय 25 वर्षों के बाद लिया गया है, जिसमें ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले पांच नई नगर निगमों के चुनाव बैलट पेपर से होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी जी.एस. संगरेशी ने इस निर्णय को कानूनी रूप से वैध बताते हुए कहा कि इसका सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से कोई टकराव नहीं है। पिछले चुनावों में, 2000 के आस-पास बैलट पेपर का उपयोग किया गया था, जबकि हाल ही में ईवीएम का चलन रहा है। अब पारंपरिक मतदान प्रणाली की वापसी हो रही है।

    चुनाव की तारीखें और मतदाता संख्या

    इन चुनावों का आयोजन 25 मई के बाद और 30 जून के पहले करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, ताकि यह समय 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं के बाद का हो। लगभग 88.91 लाख मतदाता इस प्रक्रिया में शामिल होंगे, जिनके नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में शामिल हैं। राज्य चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि इस वर्ष के अंत में होने वाले जिला और तालुक पंचायत चुनाव भी बैलट पेपर के माध्यम से होंगे। इस कदम को पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाता विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    मतगणना की प्रक्रिया

    राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतगणना में कोई देरी नहीं होगी, इसके लिए सभी आवश्यक लॉजिस्टिक्स, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस बल की व्यवस्था की जाएगी। चुनाव एक ही दिन में संपन्न हो जाएगा और परिणाम तुरंत घोषित करने की योजना है। जीबीए के अंतर्गत 5 नगर निगमों में कुल 369 वार्ड हैं और लगभग 89 लाख मतदाता चुनावी प्रक्रिया में भाग लेंगे। ड्राफ्ट मतदाता सूची 19 जनवरी को जारी की गई थी, जिसमें आपत्तियां 20 जनवरी से 3 फरवरी तक स्वीकार की जा सकती हैं। अंतिम सूची 16 मार्च को प्रकाशित की जाएगी। यह फैसला पिछले वर्ष कर्नाटक कैबिनेट की सिफारिश के अनुरूप लिया गया है और वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इसे लागू किया जा रहा है।