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  • 15 छक्कों के साथ वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रचा, कोच का खुलासा

    15 छक्कों के साथ वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रचा, कोच का खुलासा

    भारत बनाम इंग्लैंड U19 विश्व कप 2026 फाइनल: क्रिकेट के इतिहास में कई बार एक छोटी सी सलाह ने सिद्धांतों को बदल दिया है। ऐसा ही कुछ हाल ही में U-19 विश्व कप फाइनल के पहले देखा गया। 14 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रन बनाकर सभी को चकित कर दिया, जिसके पीछे उनके कोच मनीष ओझा का एक चुनौतीपूर्ण संदेश और तकनीकी सलाह थी।

    कोच का प्रेरणादायक ताना

    अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में वैभव ने 68 रन बनाए थे। इस पर कोच ओझा ने उन्हें बधाई देने के बजाय एक शिकायत भरा WhatsApp संदेश भेजा। उन्होंने लिखा, “यह तुम्हारा पहला टूर्नामेंट है जिसमें तुम्हारी एक भी सेंचुरी नहीं है। अंतिम मैच में सेट हो जाओ, और फिर वहां से वापस मत आना।” यह संदेश वैभव के मनोबल को छू गया। शुक्रवार को हरारे के मैदान पर जो हुआ, वह क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय बन गया। उन्होंने 15 छक्के, 15 चौके और केवल 55 गेंदों में विश्व कप का दूसरा सबसे तेज शतक लगाया।

    मनीष ओझा: एक प्रेरणादायक कोच

    • मनीष ओझा पूर्व रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी हैं।
    • बिहार के युवा क्रिकेट खिलाड़ियों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
    • वैभव सूर्यवंशी के मेंटर और तकनीकी कोच के रूप में कार्यरत हैं।
    • क्रिकेट करियर छोड़ने के बाद पूरी तरह से कोचिंग को समर्पित हो गए।

    कोचिंग करियर की शुरुआत

    मनीष ओझा का खुद का क्रिकेट करियर काफी मजबूत रहा है। उन्होंने बिहार की टीम के लिए रणजी ट्रॉफी में योगदान दिया और घरेलू क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी। क्रिकेट छोड़ने के बाद, उन्होंने कोचिंग में अपनी जगह बनाई और युवाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित किया।

    वैभव सूर्यवंशी के साथ यात्रा

    वैभव सूर्यवंशी जब 9 साल के थे, तब वे क्रिकेट अकादमी में शामिल हुए। तभी से उन्होंने कई कोचों का ध्यान आकर्षित किया। लेकिन, मनीष ओझा ने उनकी तकनीक को सुधारने का जिम्मा उठाया।

    पुल शॉट की चुनौती

    कोच ओझा ने बताया कि वैभव को पुल शॉट को लेकर कुछ कठिनाइयाँ आ रही थीं। उन्होंने गौर किया कि ऑफ-स्टंप के बाहर की शॉर्ट गेंदों पर उनका सिर पीछे झुकता जा रहा था, जिससे कैच उठने का खतरा बढ़ रहा था।

    कोच की सलाह

    ओझा ने उन्हें सलाह दी कि वे अपने सिर को सीधा रखकर गेंद की ओर थोड़ा झुकें, ताकि उनके हाथ पूरी तरह से खुल सकें और शॉट में शक्ति आ सके। वैभव ने फाइनल में इस तकनीक को brilliantly लागू किया और इंग्लैंड के गेंदबाजों को परेशान कर दिया।

    मैदान पर नायक, बाहर अभी भी बच्चा

    इतनी कम उम्र में आईपीएल, रणजी और विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने वाले वैभव ने पिछले एक साल में अपने घर पर मुश्किल से एक हफ्ता बिताया है। उनके परिवार ने उन्हें मशहूर होने से दूर रखने के लिए घरेलू मैचों में अक्सर उनके साथ यात्रा की है।

    कोच की भावनाएँ

    कोच ओझा ने भावुक होकर कहा, “वैभव एक अनोखा टैलेंट है, जिसे मैंने कभी डांटा नहीं। वह एक बार का अभ्यास दो बार करता है, लेकिन अंततः वह केवल 14 साल का बच्चा है।” वैभव की यह पारियों केवल रनों का एक ढेर नहीं बल्कि एक बच्चे की विश्व स्तरीय एथलीट बनने की कहानी है।