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  • झारखंड नियमितीकरण नियम 2026: CNT-SPT अधिनियम का उल्लंघन करते हुए बने मकान नहीं होंगे नियमित।

    झारखंड नियमितीकरण नियम 2026: CNT-SPT अधिनियम का उल्लंघन करते हुए बने मकान नहीं होंगे नियमित।

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड में नए भवन नियमावली का प्रस्ताव

    झारखंड की हेमंत सरकार ने झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनऑथराइज्डली कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स- 2026 का मसौदा तैयार कर लिया है। इस नियमावली के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में अवैध या अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों को नियमित करने के लिए एकमुश्त शुल्क वसूल किया जाएगा।

    अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई 🚧

    हालांकि, स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम-1908 और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम- 1949 के तहत हस्तांतरित जमीन पर बने भवनों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा। इसके उद्देश्य का मुख्य ध्यान अनधिकृत निर्माण मामलों के त्वरित निपटारे और शहरी विकास को प्रोत्साहित करना है।

    आवेदनों की जांच में यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो आवेदन को निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसे मामलों में निर्माण को अवैध मानते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें तोड़-फोड़ भी शामिल है।

    नियमितीकरण के लिए अयोग्य परिस्थितियाँ ❌

    नियमितीकरण के लिए अयोग्य मामलों में शामिल हैं:

    • सरकारी भूमि या सार्वजनिक संस्थानों की भूमि पर अतिक्रमण।
    • वैध स्वामित्व दस्तावेजों की अनुपस्थिति।
    • मास्टर प्लान या क्षेत्रीय विकास योजनाओं के विपरीत निर्माण।
    • जलग्रहण क्षेत्र या ओपन स्पेस में निर्मित भवन।
    • स्वामित्व विवाद या न्यायालय में लंबित मामले।
    • असुरक्षित घोषित भवन।

    ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की प्रक्रिया 🏡

    यदि आवेदन स्वीकार किया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण द्वारा पूर्व की लिए गए प्रवर्तन कदम वापस लिए जाएंगे और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। आवेदन से असंतुष्ट व्यक्तियों को 30 दिनों के अंदर अपील करने का अधिकार होगा। अपीलों का निपटारा तीन महीने में किया जाएगा।

    समयसीमा का उल्लंघन और कानूनी कार्रवाई ⚖️

    निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं करने वाले मामलों को निरंतर अपराध माना जाएगा, जो निश्चित तौर पर जुर्माने समेत कानूनी कार्रवाई का सामना करेंगे। सरकार का मानना है कि यह नीति अनधिकृत निर्माण के पुराने मामलों का समाधान करेगी और शहरी क्षेत्रों में व्यवस्थित विकास को बढ़ावा देगी।

    इस पहल से झारखंड में आवास संकट का समाधान अपेक्षित है, जिससे नागरिकों को अपेक्षा है कि उनका जीवन स्तर बेहतर होगा।