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  • ‘रामायण’ में हनुमान की भूमिका निभाने में सनी देओल को मिलेगी चुनौती

    ‘रामायण’ में हनुमान की भूमिका निभाने में सनी देओल को मिलेगी चुनौती

    रामायण: बड़े पर्दे पर नई कहानी

    नई दिल्ली। भारतीय महाकाव्य रामायण एक बार फिर से बड़े पर्दे पर लौटने वाला है। इस बार फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी करेंगे, जो कि इसे रणबीर कपूर के साथ पेश कर रहे हैं। रणबीर कपूर इस फिल्म में भगवान राम की भूमिका निभाते हुए नजर आएंगे।

    फिल्म की खासियत और कास्ट

    इस फिल्म में न केवल राम का किरदार महत्वपूर्ण है, बल्कि हनुमान के किरदार को भी विशेष महत्व दिया गया है। फिल्म की कास्ट में अन्य प्रमुख कलाकारों का नाम भी शामिल है, जो दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचेंगे।

    हनुमान जयंती पर विशेष घोषणा

    हनुमान जयंती के अवसर पर इस फिल्म की पहली झलक सामने आई है, जो दर्शकों के बीच उत्साह पैदा कर रही है। यह फिल्म न केवल एक धार्मिक कथा को प्रस्तुत करेगी, बल्कि इसमें भावनात्मक गहराई और आधुनिक दृष्टिकोण भी शामिल होगा।

    सनी देओल की चुनौती

    इस फिल्म में हनुमान के किरदार को लेकर सनी देओल को दारा सिंह की विरासत को बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। दारा सिंह ने अपने समय में हनुमान का किरदार निभाते हुए एक अलग पहचान बनाई थी, और अब सनी देओल को उस मानक को बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है।

  • मेहबूबा मुफ्ती ने कहा: अदालत को मेरे चरित्र को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं

    मेहबूबा मुफ्ती ने कहा: अदालत को मेरे चरित्र को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं

    महबूबा मुफ्ती का जेल स्थानांतरण पर बयान

    पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के कैदियों के स्थानांतरण के संबंध में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय द्वारा उनकी याचिका को खारिज करना आश्चर्यजनक है, जिसमें स्थानीय कैदियों को अन्य जगहों की जेलों से वापस लाने की मांग की गई थी। इस याचिका को अदालत ने यह कहते हुए खारिज किया कि यह राजनीतिक लाभ के लिए दायर की गई है। महबूबा ने श्रीनगर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

    अदालत के फैसले पर महबूबा की प्रतिक्रिया

    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उच्च न्यायालय का कहना है कि कोई भी नागरिक जनहित याचिका दायर कर सकता है, लेकिन चूंकि वह एक राजनीतिक नेता हैं, इसलिए उनकी याचिका को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा गया। उन्होंने कहा, “उच्च न्यायालय को यकीन नहीं है कि राजनीतिक नेता जनता की वास्तविकताओं से गहरे जुड़े होते हैं।” महबूबा ने यह भी सवाल उठाया कि अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया।

    महबूबा की नाराजगी के कारण

    महबूबा ने अदालत के दुवारा उसके चरित्र पर सवाल उठाने को अनुचित बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें राजनीतिक मुद्दे उठाने का पूरा अधिकार है। उनका मानना है कि अदालत को सरकार से यह पूछना चाहिए था कि जेलों में कितने कैदी विचाराधीन हैं और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

    कुलदीप सिंह सेंगर मामले पर टिप्पणी

    महबूबा मुफ्ती ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल उन कैदियों के स्थानांतरण तक सीमित थी, जिन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। विशेष रूप से, भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में न्यायालय द्वारा दी गई सजा निलंबन को लेकर महबूबा ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका का राजनीतिकरण कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ न्यायाधीश अब भी सच्चाई के पक्ष में खड़े हैं।

  • पाकिस्तानी नेता नबील गब्बोल का जामिल ‘धुरंदर’ पर प्रतिक्रिया

    पाकिस्तानी नेता नबील गब्बोल का जामिल ‘धुरंदर’ पर प्रतिक्रिया

    रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ फिल्म की धूम

    डेस्क। इन दिनों रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ सिनेमाघरों में जबरदस्त सफलता हासिल कर रही है। यह फिल्म जल्द ही 500 करोड़ क्लब में शामिल होने की उम्मीद है। पाकिस्तान में भी इस फिल्म की चर्चा हो रही है। हाल ही में पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ नबील गबोल ने फिल्म पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। फिल्म में नबील से प्रेरित एक किरदार दर्शकों को दिखाई देता है, जिसे अभिनेता राकेश बेदी ने निभाया है।

    नबील गबोल की प्रतिक्रिया

    सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो में, एक रिपोर्टर नबील गबोल से पूछते हैं, ‘भारत में एक फिल्म बनी है ‘धुरंधर’, जिसमें आपके किरदार की चर्चा है।’ नबील ने जवाब दिया, ‘मेरे किरदार को फिल्म में महत्वपूर्ण दिखाया गया है, लेकिन हकीकत में मेरा रोल कहीं अधिक दबंग है।’ फिल्म में राकेश बेदी द्वारा निभाए गए किरदार को सत्ता का लालची और भ्रष्ट दिखाया गया है।

    फिल्म के दृष्टिकोण पर आपत्ति

    वीडियो में आगे नबील गबोल कहते हैं, ‘फिल्म में ल्यारी को आतंकवादी केंद्र के रूप में दर्शाने की कोशिश की गई है। इसीलिए जीसीसी और अरब देशों ने फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया है। हम इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा सकते हैं, लेकिन इसके लिए बहुत पैसे चाहिए और मेरे पास पैसे नहीं हैं।’