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  • इस CM के खिलाफ प्रबुद्ध लोगों का आंदोलन, न्यायालय में मांग उठाई

    इस CM के खिलाफ प्रबुद्ध लोगों का आंदोलन, न्यायालय में मांग उठाई

    असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रबुद्ध नागरिकों का विरोध

    नई दिल्ली में, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ राज्य के 40 से अधिक रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों, डॉक्टरों, शिक्षाविदों, लेखकों, पत्रकारों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों ने अपनी आवाज उठाई है। इन प्रबुद्ध व्यक्तियों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री पर उठे सवाल

    पत्र में उल्लेखित मुद्दे मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए कुछ विवादास्पद फैसलों से संबंधित हैं, जिनका नागरिक समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। इन रिटायर्ड अधिकारियों और अन्य नागरिकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के निर्णयों ने जनता के हितों की अनदेखी की है।

    संभावित कानूनी कार्रवाई

    इन प्रबुद्ध नागरिकों ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे मामले की गंभीरता को समझें और उचित कार्रवाई करने पर विचार करें। यह पत्र असम के राजनीतिक माहौल में एक नया मोड़ ला सकता है, जहां नागरिकों की आवाज को सुनने की मांग की जा रही है।

    राज्य की संवेदनशीलता

    असम की राजनीति में इस प्रकार के जनहित के मुद्दे अक्सर उठते रहते हैं, और वर्तमान में भी यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है। नागरिकों की चिंताओं पर ध्यान देना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • दिल्ली हाई कोर्ट में बांग्लादेश क्रिकेट टीम पर बैन लगाने की याचिका की सुनवाई

    दिल्ली हाई कोर्ट में बांग्लादेश क्रिकेट टीम पर बैन लगाने की याचिका की सुनवाई

    नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आयोजनों से बाहर करने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अदालत ने इसे अनुचित बताते हुए याचिकाकर्ता को चेतावनी दी और बड़े दंड लगाने की संभावना भी जताई।

    कोर्ट के आपत्ति के कारण

    मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने मंगलवार को कहा कि यह मामला विदेश नीति से संबंधित है और इसमें निर्णय लेना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से परे है। बेंच ने यह प्रश्न उठाया कि न्यायालय विदेश मंत्रालय की गतिविधियों में कैसे हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश की स्थिति का मूल्यांकन या उस पर कार्रवाई करना भारत सरकार और विदेश मंत्रालय का कार्य है, न कि न्यायालय का।

    समय बर्बाद करने वाली याचिका

    कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) एक स्वतंत्र संस्था है, तो उस पर भारतीय अदालत के आदेश कैसे लागू हो सकते हैं। बेंच ने कहा कि बिना कानूनी आधार के ऐसी याचिकाएं दाखिल करना न्यायालय का समय बर्बाद करना है। अदालत ने चेतावनी दी कि इस प्रकार की निराधार याचिकाओं पर भारी दंड लगाया जा सकता है।

    याचिकाकर्ता की फटकार

    याचिकाकर्ता ने कुछ पुराने घटनाक्रमों का उल्लेख किया, लेकिन अदालत इससे संतुष्ट नहीं हुई। बीसीसीआई की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी यह सवाल उठाया कि याचिका में आवश्यक पक्षों को शामिल नहीं किया गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की कानून समझने की क्षमता पर प्रश्न उठाते हुए फटकार लगाई।

    सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि याचिका में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को भी पक्षकार बनाया गया है, जिससे याचिका की गंभीरता पर सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि इस तरह की गैर-जिम्मेदार और बिना ठोस आधार वाली याचिकाएं जारी रहीं, तो इन्हें भारी दंड का सामना करना पड़ेगा।

    निर्णय लेने का समय

    सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था के कुछ निर्णयों का उल्लेख किया, तो अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। बेंच ने पूछा कि क्या भारत की न्याय व्यवस्था पाकिस्तान की अदालतों के निर्णयों को मान्यता देती है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी इस याचिका को तुच्छ और बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इसे अदालत में दाखिल नहीं किया जाना चाहिए था।

    याचिका वापस लेने की अनुमति

    अदालत की सख्ती के बाद, याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने कहा कि यह याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है और इसे वापस लेने के आधार पर खारिज किया गया। जाते-जाते मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने याचिकाकर्ता से कहा, “कुछ अच्छा काम कीजिए, ऐसी याचिकाएं अदालत में नहीं टिकती।”

  • तस्वीरों में देखिए चीफ जस्टिस का शपथग्रहण…

    तस्वीरों में देखिए चीफ जस्टिस का शपथग्रहण…

    राज्यपाल ने न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को दिलाई शपथ

    रांची। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज राज भवन स्थित बिरसा मंडप में न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को झारखंड राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ दी।
    इससे पूर्व राज्य की मुख्य सचिव श्रीमती अलका तिवारी ने न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान का झारखंड राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति संबंधी वारंट को पढ़ा तथा राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ० नितिन कुलकर्णी द्वारा मुख्य न्यायाधीश को शपथ ग्रहण हेतु आमंत्रित किया गया।


    शपथग्रहण समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण, पूर्व न्यायाधीशगण, भारतीय प्रशासनिक व पुलिस सेवा के वरीय अधिकारीगण तथा झारखंड उच्च न्यायालय के पदाधिकारीगण व वरीय अधिवक्तागण उपस्थित थे।