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  • चीन के नए परमाणु केंद्र पर चिंता बढ़ी, सैटेलाइट तस्वीरों में नई इमारतें और मशीनें दिखीं।

    चीन के नए परमाणु केंद्र पर चिंता बढ़ी, सैटेलाइट तस्वीरों में नई इमारतें और मशीनें दिखीं।

    चीन के नए परमाणु केंद्र पर बढ़ती चिंताएँ, उपग्रह चित्रों में नई इमारतें और मशीनें दिखीं

  • चीन ने ईरान की सेना को चिप तकनीक प्रदान की, अमेरिका का युद्ध के बीच आरोप

    चीन ने ईरान की सेना को चिप तकनीक प्रदान की, अमेरिका का युद्ध के बीच आरोप

    चीन द्वारा ईरान को चिप तकनीक मुहैया कराना, अमेरिका का आरोप

  • चीन ने होर्मुज संकट पर अमेरिका को दी सख्त चेतावनी, ट्रंप की पहल का किया विरोध।

    चीन ने होर्मुज संकट पर अमेरिका को दी सख्त चेतावनी, ट्रंप की पहल का किया विरोध।

    चीन ने सैन्य तनाव को खत्म करने की अपील की

    बीजिंग। पश्चिम एशिया में उभरते संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए चीन ने सभी देशों से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। यह बयान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन और अन्य देशों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत तैनात करने की अपील के बाद आया है।

    ऊर्जा आपूर्ति पर संकट का खतरा

    चीन का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, और क्षेत्रीय शांति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि सभी पक्षों को तुरंत सैन्य गतिविधियां रोकने की आवश्यकता है, ताकि स्थिति और बिगड़ न सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तनाव बढ़ता है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ेगा।

    महत्वपूर्ण जलमार्ग पर संकट

    होर्मुज जलडमरूमध्य को विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर तेल और गैस की आपूर्ति के लिए किया जाता है। हाल ही में अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद ईरान ने इस जलमार्ग को लगभग बंद कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, विश्व में तेल की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट और भी गहरा सकता है।

    अमेरिकी अपील और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

    डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जापान से अपील की है कि वे अपने युद्धपोतों को तैनात करके इस जलमार्ग को सुरक्षित और खुला रखें। ट्रंप ने जोर देकर कहा है कि यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर इस संदर्भ में नए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाए जाएंगे ताकि तेल टैंकरों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए।

    चीन और ईरान के संबंध

    चीन को ईरान का करीबी साझेदार माना जाता है, और वह वहां से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। चीन अक्सर ईरानी तेल को अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर प्राप्त करता है। हाल ही में किए गए अमेरिका और इस्राइल के हमलों के प्रति चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, विशेषकर ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खामेनेई की मौत के संदर्भ में। ऐसे में होर्मुज संकट के बीच चीन की भूमिका को वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • चीन के सुलह दावे पर कांग्रेस: पीएम मोदी बयान दें

    चीन के सुलह दावे पर कांग्रेस: पीएम मोदी बयान दें

    कांग्रेस ने चीन के मध्यस्थता दावों पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली. कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के लिए चीन द्वारा किए गए दावों को चिंताजनक बताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग की, यह कहते हुए कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

    कांग्रेस नेता का बयान

    जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा किया है कि उन्होंने 10 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया था, जबकि प्रधानमंत्री ने कभी भी इसकी पुष्टि नहीं की। अब चीनी विदेश मंत्री ने भी इसी तरह का दावा किया है कि चीन ने मध्यस्थता की थी। यह सभी बातें संदिग्ध हैं, खासकर जब भारतीय सेना ने 4 जुलाई, 2025 को स्पष्ट रूप से कहा था कि वे चीन के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे।”

    चीन के दावों पर सवाल उठाए गए

    रमेश ने आगे कहा कि चीन का पाकिस्तान के साथ होना भारत के लिए चिंताजनक है और यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जनता के विश्वास के खिलाफ है।

    ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका पर स्पष्टीकरण की मांग

    रमेश ने चीन के साथ संबंधों पर ध्यान देते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दोषमुक्त किए जाने से भारत की स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है और हमारा निर्यात चीन पर निर्भर है। उन्होंने नागरिकों से पूछा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में चीन की भूमिका क्या थी।

    चीन का बयान

    गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि “भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करना इस साल चीन की मध्यस्थता सफलताओं में से एक है।”

    भारत का आधिकारिक रुख

    वहीं, भारत सरकार ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि 7 से 10 मई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच हुई घटनाएं सीधे बातचीत के माध्यम से हल की गईं। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है।

  • सलमान खान की फिल्म गलवान से चीन नाराज, कहानी में भूमि नहीं दर्शाई

    सलमान खान की फिल्म गलवान से चीन नाराज, कहानी में भूमि नहीं दर्शाई

    सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का टीजर जारी

    बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की नई फिल्म बैटल ऑफ गलवान का टीजर हाल ही में रिलीज किया गया है। इस फिल्म का फोकस 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गलवान क्षेत्र में हुई झड़पों पर है। टीजर के लॉन्च होते ही चीन से इसकी प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है, जहां चीन के मीडिया ने इसे नकारात्मकता से देखा है और इसके तथ्यों को गलत बताया है।

    चीन की प्रतिक्रिया

    ग्लोबल टाइम्स ने फिल्म को लेकर कहा है कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है। एक चीनी विशेषज्ञ ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि भारतीय फिल्में ज्यादातर भावनाओं पर आधारित होती हैं, और वे इतिहास को नहीं बदल सकतीं। उनका मानना है कि किसी भी तरह की बढ़ा-चढ़ाकर बनाई गई फिल्म चीन की सेना के इरादों को कमजोर नहीं कर सकती।

    फिल्म में सलमान खान का किरदार

    इस फिल्म में सलमान खान कर्नल बिक्कुमल्ला संतोष बाबू का रोल निभा रहे हैं। भारतीय मीडिया का दावा है कि यह किरदार 2020 में हुए गलवान घाटी संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका दिखाता है। चीन का कहना है कि भारतीय सेनाओं ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पार की, जिसके चलते तनाव बढ़ा।

    सोशल मीडिया पर चर्चाएँ

    चीन में फिल्म पर अपनी राय देते हुए सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे ओवरड्रामैटिक बताया है। एक चीनी यूजर ने टिप्पणी की कि यह फिल्म तथ्यों से पूरी तरह विपरीत है। चीनी मंत्रालय का कहना है कि भारत ने गलवान घाटी में पहले स्थिति को बदलकर तनाव बढ़ाया था।

    गलवान घाटी में हुई झड़प

    15 जून 2020 को हुए संघर्ष में चीन का दावा है कि उसके चार सैनिक मारे गए थे जबकि भारत ने 20 सैनिकों की हानि होने का उल्लेख किया। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस झड़प में चीन के 38 सिपाही भी हताहत हुए थे।

    राष्ट्रीय भावनाएं और फिल्में

    चीनी विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग ने कहा है कि भारत में फिल्मों के माध्यम से राष्ट्रवादी भावनाओं को भड़काना कोई नई बात नहीं है। लेकिन उनका मानना है कि इससे सच्चाई में कोई बदलाव नहीं आएगा। उनका कहना है कि गलवान की घटना में भारत पहले सीमा पार कर चुका था, और चीनी सेना अपने क्षेत्र की रक्षा कर रही थी।

  • चीन में 1.2 लाख वाहनों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा यातायात जाम, 36-लेन टोल स्टेशन पर फंसे

    चीन में 1.2 लाख वाहनों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा यातायात जाम, 36-लेन टोल स्टेशन पर फंसे

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    चीन में रिकॉर्ड तोड़ ट्रैफिक जाम का नजारा 🚗🛣️

    चीन में हाल ही में एक अभूतपूर्व ट्रैफिक जाम का अनुभव किया गया। यह जाम अनहुई प्रांत के वुझुआंग टोल स्टेशन पर तब जमा हुआ, जब लाखों लोग नेशनल डे और मध्य-शरद उत्सव की एक सप्ताह की छुट्टियों के बाद अपने घरों की ओर लौट रहे थे। सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को हुए इस जाम में हजारों गाड़ियां घंटों तक फंसी रहीं।

    वुझुआंग टोल स्टेशन की भीड़ 🏞️

    ड्रोन से लिए गए फुटेज में 36 लेन वाले इस विशाल टोल स्टेशन पर रेड टेल लाइट्स की लंबी कतारें देखी गईं, जो एक अद्भुत लेकिन परेशान करने वाला दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में यह साफ दिखाई दे रहा था कि टोल स्टेशन पूरी तरह लाल रोशनी से भरा हुआ था, जहां हजारों गाड़ियां अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं।

    हाईवे पर वाहनों की संख्या इतनी बढ़ गई कि रिपोर्ट्स के अनुसार इस टोल स्टेशन से उस दिन तकरीबन 1,20,000 वाहनों का आवागमन हुआ। 36 लेन की व्यवस्था के बावजूद, इस विशाल यातायात के कारण कई वाहन कई किलोमीटर की लंबी कतार में फंस गए। ड्रोन फुटेज में यह भी दिखा कि कैसे कई गाड़ियां अलग-अलग लेन से आकर चार मुख्य लेन में सिमटते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थीं। इस दृश्य को “रेड सी ऑफ लाइट्स” यानी लाल रोशनी का समुद्र नाम दिया गया है।

    छुट्टियों का बड़ा असर 🌍

    मध्य-शरद उत्सव एक पारिवारिक त्योहार है, जिसमें लोग अपने परिवारों के संग मनाने के लिए घर लौटते हैं। इस वर्ष यह त्यौहार राष्ट्रीय दिवस की छुट्टियों के साथ मेल खा गया, जिससे पूरे देश में 1 से 8 अक्टूबर के बीच आठ दिन का लंबा अवकाश मिल गया।

    चीन के संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, इस अवधि में लगभग 88.8 करोड़ लोग यात्रा पर निकले, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 16% अधिक है। 2024 में इसी अवधि के दौरान 76.5 करोड़ लोग यात्रा कर रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों पर निकलने से हाईवे और टोल स्टेशनों पर भयंकर जाम लग गया।

    इस घटना ने ट्रैफिक प्रबंधन के लिए नए चुनौतियाँ प्रस्तुत की हैं, और इससे सीख लेकर भविष्य में बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।

  • डोनाल्ड ट्रंप ने की चीनी उत्पादों पर 100% टैरिफ का ऐलान, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध फिर शुरू

    डोनाल्ड ट्रंप ने की चीनी उत्पादों पर 100% टैरिफ का ऐलान, अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध फिर शुरू

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    अमेरिका द्वारा चीन के खिलाफ नए व्यापार उपाय

    नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में चीन के खिलाफ असाधारण व्यापार उपायों की घोषणा की है। उनके अनुसार, 1 नवंबर 2025 से सभी चीनी आयातों पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा और अमेरिका में निर्मित महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण सख्त किया जाएगा। यह कदम विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूदा तनाव को और बढ़ा सकता है।

    चीन पर आरोप और चेतावनी ⚠️

    सोशल मीडिया पर ट्रंप ने बीजिंग पर व्यापार में अत्यधिक आक्रामक नीतियों का पालन करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका भी इसी प्रकार जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा, “1 नवंबर, 2025 से, अमेरिका चीन पर 100% टैरिफ लागू करेगा, जो वर्तमान में लग रहे टैरिफ के अतिरिक्त होगा।”

    चीन की व्यापारिक रणनीतियों पर प्रतिक्रिया

    ट्रंप के अनुसार, यह निर्णय उन रिपोर्टों के आधार पर लिया गया है, जिनमें कहा गया है कि चीन अपने उत्पादों पर व्यापक निर्यात प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। उन्होंने इसे अन्य देशों के साथ व्यापार में नैतिक अपमान करार दिया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसका प्रभाव सभी देशों पर पड़ेगा और यह कि चीन ने यह योजना कई वर्षों पहले तैयार की थी।

    संभावित प्रभाव 📊

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तक कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। वर्तमान में इन क्षेत्रों पर पहले से ही टैरिफ का दबाव है। यह ट्रंप के कार्यकाल के दौरान उठाया गया सबसे कठोर संरक्षणवादी कदम होगा।

    शी जिनपिंग के साथ बैठक रद्द

    ट्रंप का यह बयान चीनी सामानों पर नए शुल्क लगाने के संकेत देने वाले एक पूर्व पोस्ट के बाद आया है। उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक रद्द करने की चेतावनी भी दी। यह बीजिंग के प्रति एक कड़ा संदेश था, जिससे वैश्विक व्यापार संबंधों में और खटास आई है।

    निष्कर्ष

    यह नया व्यापारिक निर्णय अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है, जिससे अमेरिका और चीन के बीच की प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र हो जाएगी।