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  • जेपी उद्यान भूमि घोटाला: जांच में प्रक्रिया गलती के चलते मामला फिर से खुला।

    जेपी उद्यान भूमि घोटाला: जांच में प्रक्रिया गलती के चलते मामला फिर से खुला।

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    रांची में जेपी उद्यान भूमि मामला फिर सुलग उठा

    झारखंड की राजधानी रांची के बहुचर्चित जयप्रकाश उद्यान (जेपी उद्यान) भूमि विवाद में प्रशासन की सक्रियता बढ़ गई है। सरकारी भूमि की सुरक्षा में लापरवाही, आदिवासी भूमि का अवैध हस्तांतरण और भू-माफिया के साथ मिलीभगत के गंभीर आरोपों के बीच विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। झारखंड सरकार ने हेहल अंचल के पूर्व अंचल अधिकारी अनिल कुमार सिंह के खिलाफ पुनः जांच का निर्णय लिया है।

    क्या हैं आरोप?

    आरोप पत्र में अनिल कुमार सिंह पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने आदिवासी रैयत की भूमि को गैर-आदिवासी के नाम पर अनधिकृत रूप से हस्तांतरित करने की स्वीकृति दी। इसके अलावा, सरकारी भूमि की सुरक्षा में लापरवाह रहने और भू-माफिया को भूमि पर कब्जा दिलाने में मदद करने के आरोप भी शामिल हैं। विशेषकर, जेपी उद्यान की जमीन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    पहले जांच में क्या हुआ था?

    वर्ष 2024 में झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के तहत विभागीय कार्रवाई आरंभ की गई थी। जुलाई 2025 में प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए। हालांकि, पुनरीक्षण में यह बात सामने आई कि जांच के दौरान दस्तावेजों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया था और गवाहों का परीक्षण भी नहीं किया गया। इन प्रक्रियागत त्रुटियों को देखते हुए, नियम-18(1) के तहत नए सिरे से जांच का आदेश दिया गया है।

    नए जांच अधिकारी की नियुक्ति

    राज्यपाल के आदेश पर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी संजय सिन्हा को विभागीय जांच अधिकारी और संचालन पदाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर जांच में सहयोग करने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। जेपी उद्यान भूमि विवाद की नए सिरे से जांच शुरू होने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।

  • हजारीबाग समाचार: पूर्व DSO के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू होगी।

    हजारीबाग समाचार: पूर्व DSO के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू होगी।

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पर कार्यवाही का आदेश

    रांची: झारखंड राज्य सरकार ने प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी, अरविंद कुमार, पर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। ये आदेश तब आया जब खाद्य आपूर्ति विभाग ने 2023 में उनकी गतिविधियों के खिलाफ कार्यवाही की सिफारिश की थी। इस सिफारिश के आधार पर कार्मिक विभाग ने यह कदम उठाया।

    जांच की जिम्मेदारी पूर्व आईएएस अधिकारी को मिली

    विभागीय जांच का कार्य प्रकरण को संज्ञान में लेने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुनील कुमार को सौंपा गया है। अरविंद कुमार को 15 दिनों के भीतर अपना लिखित बचाव प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

    आरोपों की सूची

    कुमार के खिलाफ मुख्यतः पांच गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:

    • झारखंड जनवितरण प्रणाली के नियमों का उल्लंघन
    • मनमाने तरीकों से डीलरों का निलंबन
    • 10 दिन के अंदर अवैध वसूली की कार्रवाई और निलंबन से मुक्ति
    • गोदाम प्रबंधकों और डोर स्टेप डिलीवरी अभिकर्ताओं से अवैध वसूली करना
    • पैक्स के माध्यम से केवल 14 किसानों का भुगतान करना और चावल मिलों का सही टैगिंग न करना

    कार्मिक विभाग ने इस मामले से संबंधित सभी आवश्यक संकल्प जारी कर दिए हैं, जिससे उच्चस्तरीय जांच का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

    यह कार्रवाई प्रशासनिक प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।