टैग: DMK

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: कांग्रेस 45 सीटों की मांग, DMK केवल 25 देने के लिए तैयार

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: कांग्रेस 45 सीटों की मांग, DMK केवल 25 देने के लिए तैयार

    तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के बीच सीट बंटवारे की बातचीत जारी

    नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले, तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा चल रही है। कांग्रेस ने 45 सीटों की मांग की है, जबकि DMK केवल 25 सीटें देने को राजी है। इस राज्य में चुनाव इस साल अप्रैल-मई में होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सीट बंटवारे पर बैठक

    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और अन्य प्रमुख नेताओं ने हाल ही में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से बैठक की, जिसमें सीटों की संख्या को लेकर बातचीत की गई, लेकिन वर्तमान में कोई समझौता नहीं हो पाया है। कांग्रेस का कहना है कि यह मांग 2021 के चुनाव परिणामों की समीक्षा पर आधारित है। पिछले चुनाव में DMK ने 234 सीटों में से 173 पर चुनाव लड़ा और 133 सीटों पर विजय प्राप्त की जबकि 40 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।

    कांग्रेस के तर्क

    कांग्रेस का मानना है कि यदि उन्हें अधिक सीटें दी जाएं, तो उनकी मजबूत स्थानीय उपस्थिति और प्रत्यक्ष मुकाबलों में बेहतर एकजुटता के कारण पिछली बार हारी हुई लगभग 20 सीटें जीती जा सकती हैं। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, 45 सीटों की मांग का मुख्य उद्देश्य वोटों की संभावनाओं में सुधार करना और गठबंधन को मज़बूत करना है, जिससे 2026 में अधिक संतुलित सीटों का बंटवारा सुनिश्चित किया जा सके।

    चर्चाएँ जारी

    रविवार को चेन्नई में आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल हुए, जिसमें दोनों दलों के वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे। इससे पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के कादर मोहिदीन ने DMK के नेताओं से मुलाकात की थी। इस प्रकार, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और DMK के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत का सिलसिला जारी है, लेकिन फिलहाल निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सका है।

  • DMK के साथ विवाद और TVK के साथ समझौता, कांग्रेस 32 में असमर्थ

    DMK के साथ विवाद और TVK के साथ समझौता, कांग्रेस 32 में असमर्थ

    तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों की तैयारी

    चैन्‍नई। तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इस बार मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की अगुवाई में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने सहयोगी पार्टी कांग्रेस से केवल 32 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा है, जबकि विधानसभा में कुल 234 सदस्य हैं।

    डीएमके और कांग्रेस के बीच तकरार

    डीएमके ने कांग्रेस को कम सीटें देने का फैसला लिया है, जिसके कारण दोनों पार्टियों के बीच मतभेद उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है। कांग्रेस पार्टी ने इस संख्या को अपर्याप्त मानते हुए इससे असहमति जताई है। पिछले चुनावों में इन दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग दिख रही है।

    टीवीके के साथ संभावित गठबंधन

    वहीं, डीएमके ने तामिलनाडु की एक अन्य पार्टी, टीवीके (तमिल मिल्ली काड़ी) के साथ संभावित गठबंधन को लेकर भी बातचीत की है। इस नई सियासी दिशा के साथ, डीएमके वोटर आधार को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। इसका उद्देश्य चुनावी सफलता के लिए एक व्यापक गठबंधन तैयार करना है।

  • न्यायाधीश स्वामीनाथन को 36 पूर्व जजों का समर्थन प्राप्त हुआ

    न्यायाधीश स्वामीनाथन को 36 पूर्व जजों का समर्थन प्राप्त हुआ

    पूर्व न्यायाधीशों का समर्थन जज जी. आर. स्वामीनाथन को मिला

    नई दिल्‍ली। मद्रास उच्च न्यायालय के जज जी. आर. स्वामीनाथन के समर्थन में देश के 36 पूर्व न्यायाधीश सामने आए हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं द्वारा जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग लाने के प्रयास की निंदा की है। पूर्व न्यायाधीशों ने नागरिकों और सांसदों से अपील की है कि अगर इस प्रकार के प्रयासों को आगे बढ़ने दिया गया, तो यह लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा बन जाएगा।

    जज का आदेश विवादास्पद बना

    न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने 1 दिसंबर को आदेश दिया था कि अरुलमिघु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के निकट दीप जलाए जाएं। उनके इस निर्णय के बाद विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके चलते 9 दिसंबर को द्रमुक के नेतृत्व में कई विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष जज को हटाने के लिए प्रस्ताव सौंपा।

    पूर्व न्यायाधीशों की प्रतिक्रिया

    पूर्व न्यायाधीशों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह कदम ‘‘समाज के एक विशेष वर्ग की राजनीतिक अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं चलने वाले न्यायाधीशों को धमकाने का प्रयास है।” उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार की कार्रवाई को अनुमति दी गई, तो यह लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए हानिकारक साबित होगा।

    लोकसभा अध्यक्ष की टिप्पणी

    इस बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संवाददाताओं को बताया कि कोर्ट के जज को हटाने के प्रस्ताव पर निर्णय नियम प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सदन में संवाद होना चाहिए, न कि टकराव।

    विपक्ष का आरोप

    कांग्रेस, द्रमुक और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी दलों ने ‘कार्तिगई दीपम’ पर दिए गए फैसले को लेकर न्यायमूर्ति स्वामीनाथन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। इन दलों ने राष्ट्रपति को यह प्रस्ताव इसलिए दिया क्योंकि उनका आचरण न्यायपालिका की प्रमुखता पर संदेह पैदा करता है।