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  • कांग्रेस के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट का आरोप

    कांग्रेस के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट का आरोप

    असम की राजनीति में नया विवाद: सीएम सरमा की पत्नी पर लगे गंभीर आरोप

    गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के संबंध में हाल ही में उठे आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उनकी विदेशों में संपत्ति भी मौजूद है।

    कांग्रेस के आरोपों का विस्तार

    कांग्रेस ने इस मामले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट और संपत्ति के बारे में जानकारी साझा की। पार्टी के नेताओं ने यह भी कहा कि इस स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री के परिवार की गतिविधियां संदिग्ध हैं। आरोपों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का हिस्सा है।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप केवल राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम हैं और वे अपने परिवार के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी साझा नहीं करेंगे।

    राजनीतिक माहौल पर प्रभाव

    इस विवाद ने असम के राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा विधानसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है। मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ लगे आरोपों ने विपक्षी दलों को एक नया आधार प्रदान किया है, जिससे वे सरकार पर प्रहार कर सकते हैं।

  • राहुल गांधी के प्रयासों के बावजूद, भूपेन बोरा नीतियों पर असहमत, बीजेपी में शामिल होने की अटकलें

    राहुल गांधी के प्रयासों के बावजूद, भूपेन बोरा नीतियों पर असहमत, बीजेपी में शामिल होने की अटकलें

    असम की राजनीति में नया मोड़: भूपेन बोरा का भाजपा में शामिल होने का संकेत

    गुवाहाटी। असम की राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना बन रही है। भूपेन बोरा ने हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपने इस्तीफे की घोषणा की है, जिसके बाद उनकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएँ तेज हो गई हैं। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि बोरा 22 फरवरी को भाजपा का हिस्सा बन सकते हैं, और उनके साथ कुछ अन्य कांग्रेस नेता भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

    इस्तीफा और संभावित भाजपा में शामिल होना

    सोमवार को, बोरा ने कांग्रेस से अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा की। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। ऐसी खबरें हैं कि राहुल गांधी ने भी उनके स्थान पर रहने के लिए प्रयास किए, लेकिन भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है।

    मुख्यमंत्री का स्वागत और घर वापसी का दावा

    मुख्यमंत्री सरमा ने इस विषय पर बोलते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व ने बोरा की संभावित सदस्यता को स्वीकृति दे दी है और उनका स्वागत किया जाएगा। सरमा ने इसे “घर वापसी” करार दिया, यह बताते हुए कि भाजपा वंशवादी राजनीति के बजाय कार्यकर्ता आधारित राजनीति में विश्वास रखती है।

    समर्थकों से चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया

    बोरा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह अपने अंतिम निर्णय से पहले अपने समर्थकों और लखीमपुर के निवासियों से विचार विमर्श करेंगे। उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी करते हुए कहा कि वे पार्टी में रह सकते हैं, लेकिन उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं।

    टिकट विवाद और पुरानी रंजिशें

    बोरा ने यह भी आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा उपचुनाव के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने उनका नाम प्रस्तावित किया था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। यह सीट खाली होने पर रकीबुल हुसैन के पुत्र को उम्मीदवार बनाया गया, जो भाजपा के उम्मीदवार से हार गए।

    AIUDF के साथ गठबंधन पर असहमति

    बोरा ने 2021 विधानसभा चुनाव के लिए ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के साथ कांग्रेस के गठबंधन का विरोध किया था। उन्होंने बार-बार पार्टी नेतृत्व को अपनी चिंताओं से अवगत कराया, लेकिन बाद में गठबंधन टूट गया। लोकसभा चुनाव में रकीबुल हुसैन ने AIUDF के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को बड़े अंतर से हराया।

    भूपेन बोरा का अगला कदम असम की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है। यदि वह भाजपा में शामिल होते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा और असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत होगा। सभी की निगाहें अब उनके अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

  • कांग्रेस और अल्पसंख्यक नेताओं ने हिमांता बिस्वा सरमा की ‘मियां’ टिप्पणी की निंदा की

    कांग्रेस और अल्पसंख्यक नेताओं ने हिमांता बिस्वा सरमा की ‘मियां’ टिप्पणी की निंदा की

    असम के मुख्यमंत्री के विवादास्पद बयान पर राजनीतिक हलचल

    गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा मुस्लिम समुदाय के संदर्भ में ‘मियां’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस और अन्य अल्पसंख्यक नेताओं में आक्रोश है। उनका यह बयान विरोधियों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है, और देशभर में कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिसमें 100 से अधिक एफआईआर दर्ज करने की योजना बनाई गई है। पहले से अहमदाबाद और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में इस संदर्भ में शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।

    इस आंदोलन का लक्ष्य यह स्पष्ट करना है कि असम में की गई इस तरह की बयानबाजी और ध्रुवीकरण की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर चुनौती दी जाएगी।

    विवादास्पद बयानों का मूल

    मुख्यमंत्री सरमा ने हाल ही में मतदाता सूची के विशेष संशोधन के दौरान कई विवादास्पद टिप्पणियाँ कीं, जिन्हें विपक्षी दलों ने सांप्रदायिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि 4 से 5 लाख ‘मियां’ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। इसके अलावा, यह भी कहा गया कि यदि कोई ‘मियां’ रिक्शा चालक 5 रुपये किराया मांगता है, तो उसे केवल 4 रुपये ही देने चाहिए।

    सरमा ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संदिग्ध विदेशी नागरिकों के खिलाफ सामूहिक शिकायतें दर्ज करने के लिए प्रेरित किया।

    कानूनी कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इन बयानों को ‘हेट स्पीच’ बताया और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का गलत हवाला देने और ‘सांप्रदायिक घृणा’ फैलाने का आरोप लगाया।

    कांग्रेस ने ‘whoishbs.com’ नामक एक वेबसाइट लॉन्च की है, जहाँ मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार और अन्य आरोप डालने की सुविधा दी गई। इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने दिल्ली में मुख्यमंत्री के खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है।

    मुख्यमंत्री का पक्ष

    हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने विवादास्पद बयानों का बचाव करते हुए कहा कि वह ‘मियां’ शब्द का प्रयोग उन लोगों के लिए कर रहे हैं जो बांग्लादेश से अवैध रूप से आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके शब्द सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में उठाई गई चिंताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।