📌 गांडीव लाइव डेस्क:
झारखंड हाई कोर्ट ने नियुक्तियों के लिए निर्धारित की समयसीमा ⏳
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह कई संवैधानिक संस्थाओं में खाली पड़े पदों की नियुक्ति की समयसीमा निश्चित करे। इनमें लोकायुक्त, राज्य मानवाधिकार आयोग और सूचना आयोग जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं, जो काफी समय से रिक्त हैं। अदालत ने कहा कि इन पदों का खाली रहना संविधानिक संस्थाओं की क्षमता को प्रभावित करता है और नागरिकों के अधिकारों में भी बाधा डालता है।
सरकार का आश्वासन और अगली सुनवाई की तारीख 📅
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह अगले 6 हफ्तों में सभी आवश्यक नियुक्तियां पूरी कर लेगी। हाई कोर्ट ने इस आश्वासन को आधिकारिक रूप से दर्ज किया और अगली सुनवाई की तारीख 17 मार्च 2026 निर्धारित की। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि नियत समय में नियुक्तियां नहीं की गईं, तो वह कड़े कदम उठा सकती है, जिससे सरकारी दबाव बढ़ रहा है।
जनहित याचिकाओं पर आधारित कार्रवाई ⚖️
यह कार्रवाई कई जनहित याचिकाओं पर आधारित थी, जिनमें यह कहा गया था कि राज्य में भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए गठित लोकायुक्त और अन्य संवैधानिक पद वर्षों से रिक्त हैं। कोर्ट ने सरकार को जवाबदेह ठहराते हुए समयसीमा का निर्धारण किया ताकि संवैधानिक संस्थाएं सही तरीके से कार्य कर सकें।
वकील महेश तिवारी का माफी प्रकरण 📜
आज हाई कोर्ट में वकील महेश तिवारी और जस्टिस राजेश कुमार के बीच तीखी बहस भी हुई। इस बहस में महेश तिवारी ने कहा था, “जज अपनी सीमा में रहें,” जिसके बाद अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ और माफी की प्रक्रिया 🏛️
प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां चीफ जस्टिस की पीठ ने महेश तिवारी को हाई कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगने की सलाह दी। आज की सुनवाई में, महेश तिवारी ने बिना शर्त माफी मांग ली और अदालत ने इस मामले का निर्णय सुरक्षित रख लिया।














