टैग: Indian politics

  • चाईबासा: मंत्री दीपिका पांडेय ने कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया

    चाईबासा: मंत्री दीपिका पांडेय ने कांग्रेस प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया

    चाईबासा में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का दौरा

    चाईबासा : झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने गुरुवार को चाईबासा का दौरा किया। इस अवसर पर जगन्नाथपुर के विधायक सोनाराम सिंकू और पश्चिमी सिंहभूम जिला के उपायुक्त चंदन कुमार ने उनका स्वागत किया। ज्ञात हो कि 22 मार्च से 31 मार्च तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का झारखंड-ओडिशा राज्य के कांग्रेस जिलाध्यक्षों का आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें मंत्री ने भाग लिया।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण नेता शामिल होंगे

    31 मार्च को इस कार्यक्रम के समापन के अवसर पर लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तथा अन्य कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर के नेता शामिल होंगे। इस कड़ी में गुरुवार को मंत्री दीपिका सिंह पांडे के साथ झारखंड प्रभारी के. राजू और प्रदेश अध्यक्ष केशव कमलेश महतो के अलावा प्रबंधन टीम के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। इनमें युवा कांग्रेस अनुशासन समिति के चेयरमैन सौरभ अग्रवाल, कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय, प्रखंड अध्यक्ष दिकु सवैयां, पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर दास और संजय कुमार शामिल हैं।

    कांग्रेस को मजबूती देने का आश्वासन

    मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी के आगमन से कांग्रेस पार्टी को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण शिविर में उन्हें मनरेगा और पेसा कानून के बारे में जानकारी देने का अवसर मिला है। मंत्री ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने झारखंड में ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ के तहत ट्राइबल क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। लोगों की मांग पर ही पेसा कानून राज्य में लागू हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों को काफी लाभ होगा।

  • रांची राजनीतिक समाचार: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर कांग्रेस की चिंता, प्रदेश महासचिव की टिप्पणी जानें

    रांची राजनीतिक समाचार: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर कांग्रेस की चिंता, प्रदेश महासचिव की टिप्पणी जानें

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर जताई चिंता

    रांची: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एक कार्यक्रम के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी ने अपनी चिंता व्यक्त की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राकेश सिन्हा ने प्रोटोकॉल के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया है और कहा है कि ऐसा होना जरूरी है ताकि राष्ट्रपति का सम्मान बना रहे।

    राजनीतिक विवाद का बढ़ता आलम

    इस विवाद ने राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राकेश सिन्हा ने बताया कि इस प्रकार के घटनाक्रम से एक अनुशासनहीनता का माहौल बनता है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए घातक हो सकता है। उनके अनुसार, राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में उच्च स्तर के प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय प्रतीकों और पदों का सम्मान बना रहे।

    प्रोटोकॉल का महत्व

    प्रोटोकॉल का पालन न करना केवल एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की छवि को प्रभावित करता है। राकेश सिन्हा ने कहा कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, और सभी राजनीतिक दलों को इस दिशा में सोचने की आवश्यकता है।

    कांग्रेस के इस बयान से स्पष्ट है कि वे राष्ट्रपति के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की मांग कर रहे हैं और इसके लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। इससे न केवल राजनीतिक स्थिरता बनेगी, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।

  • झारखंड समाचार: शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान मिला, जानें नेताओं की टिप्पणियाँ

    झारखंड समाचार: शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान मिला, जानें नेताओं की टिप्पणियाँ

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिला, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण पुरस्कार मिलने के बाद से राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। केंद्र सरकार ने हाल ही में पुरस्कारों की सूची जारी की, जिसमें समाजिक और लोक कल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता दी गई है।

    आदिवासी समाज के प्रति समर्पण

    झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि गुरुजी ने आदिवासी समुदाय को मुख्यधारा में आवाज दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हालांकि उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है, लेकिन उनकी उपलब्धियों और योगदान की दृष्टि से भारत रत्न की मांग आगे भी जारी रहेगी। झारखंड विधानसभा ने पहले ही केंद्र सरकार को भारत रत्न के लिए प्रस्ताव भेजा था। गुरुजी की विरासत न केवल झारखंड बल्कि देश के सामाजिक न्याय के संघर्षों में भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा हमेशा उनके कार्यों का मुख्य उद्देश्य रहा।

    असमानता के खिलाफ संघर्ष

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो ने गुरुजी को पद्म भूषण मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके आंदोलन और कार्यों की तुलना अन्य से नहीं की जा सकती। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार गुरुजी के संघर्षों को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित करेगी।

    समर्पित कार्यों का सम्मान

    केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिलने पर बधाई दी। उन्होंने बताया कि यह सम्मान उनके लोक कल्याण के लिए समर्पित कार्यों का प्रतीक है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार प्रकट किया।

    झारखंड की पहचान का सम्मान

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने गुरुजी को सम्मानित करने की घोषणा का स्वागत करते हुए इसे झारखंड की मिट्टी का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी का जीवन संघर्षों से भरा रहा और उन्होंने झारखंड अलग राज्य की मांग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    गुरुजी का योगदान सभी के लिए प्रेरणा Source: सेंटर for नवजीवन मुक्ति पर आधारित है।

  • आडवाणी के बीच मतभेद, नई पार्टी गठन की योजना BJP छोड़ने की

    आडवाणी के बीच मतभेद, नई पार्टी गठन की योजना BJP छोड़ने की

    अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी: भारतीय राजनीति की दो महत्वपूर्ण शख्सियतें

    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी को भारतीय राजनीति में वर्षों तक अटूट माना जाता रहा है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वाजपेयी ने एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने पर गंभीरता से विचार किया। वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने यह जानकारी बुधवार को प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान साझा की। यह व्याख्यान अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित किया गया था, जिसका विषय “अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन और योगदान” था।

    1984 का लोकसभा चुनाव और वाजपेयी का संकट

    नीरजा चौधरी के अनुसार, 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को केवल दो सीटें मिली थीं और इस दौरान वाजपेयी ग्वालियर से चुनाव हार गए थे। इसी समय आडवाणी पार्टी में तेजी से उभर रहे थे, जिससे वाजपेयी निराश महसूस कर रहे थे। उन्होंने कुछ समय के लिए भाजपा से अलग होकर नई पार्टी बनाने का मन बनाया, लेकिन यह विचार ज्यादा लंबे समय तक नहीं चला और अंततः उन्होंने भाजपा के साथ बने रहने का निर्णय लिया।

    पोखरण-2 और आडवाणी की पीड़ा

    अपने व्याख्यान में नीरजा चौधरी ने 1998 में हुए पोखरण-2 परमाणु परीक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना पर भी प्रकाश डाला, जिसने दोनों नेताओं के बीच तनाव को उजागर किया। वाजपेयी ने परीक्षण की जानकारी अपने प्रधान सचिव और सेना प्रमुखों के साथ साझा की, लेकिन आडवाणी को इस निर्णय में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि अन्य मंत्रिमंडल सदस्यों को भी परीक्षण की सूचना केवल दो दिन पहले दी गई, वह भी बिना तारीख बताए।

    चौधरी ने याद करते हुए बताया कि 11 मई 1998 को जब वह आडवाणी से मिलने पहुंची, तो वे अकेले बैठे थे और उनकी आंखों में आंसू थे। उन्हें यह दुख था कि वर्षों की मित्रता और पार्टी की पुरानी प्रतिबद्धता के बावजूद उन्हें भरोसे में नहीं लिया गया।

    1990 के दशक में वाजपेयी का प्रभाव

    नीरजा चौधरी ने यह भी बताया कि 1990 के दशक में अटल बिहारी वाजपेयी की छवि सर्वमान्य बन गई थी, जिससे वे भारतीय राजनीति में प्रभावशाली बन गए। उनके सभी दलों से अच्छे संबंध थे। वाजपेयी और पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव के बीच भी करीबी रिश्ता था, जो कि उनके ब्राह्मण होने या 1977 में विदेश मंत्री रहते हुए दोनों की पुरानी जान-पहचान का परिणाम था।