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  • एबीवीपी के विरोध के बाद, जम्मू विश्वविद्यालय से जिन्ना हटाया जाएगा, भगत सिंह पाठ्यक्रम में शामिल होंगे

    एबीवीपी के विरोध के बाद, जम्मू विश्वविद्यालय से जिन्ना हटाया जाएगा, भगत सिंह पाठ्यक्रम में शामिल होंगे

    जम्मू यूनिवर्सिटी में जिन्ना की जगह भगत सिंह के विचार पढ़ाए जाएंगे

    जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय में अब मोहम्मद अली जिन्ना की जगह शहीद भगत सिंह के विचारों को सिलेबस में शामिल किया जाएगा। पॉलिटिकल साइंस विभाग के बोर्ड ऑफ स्टडीज की हालिया बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन्ना को पाठ्यक्रम से हटा कर भगत सिंह को जोड़ा जाएगा। बैठक में अल्लामा इकबाल और सर सैयद अहमद खान के नाम पर किसी भी सदस्य ने आपत्ति नहीं की, इसलिए इनका नाम पाठ्यक्रम में बनाए रखा जाएगा।

    बैठक का उद्देश्य और चर्चाएँ

    यह बैठक पॉलिटिकल साइंस विभाग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सिलेबस की समीक्षा करना और आवश्यक संशोधन करना था। चर्चा के दौरान विभिन्न मुद्दों पर गहन वार्ता हुई, जिसमें कई मामलों पर मतभेद भी सामने आए। एक सदस्य के अनुसार, विभागाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राजनीति विज्ञान में सभी प्रकार के विचारों को पढ़ाना आवश्यक है। किसी विषय की सही समझ के लिए उसके सभी पहलुओं को जानना जरूरी है।

    विचारों की विविधता का महत्व

    उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि रामायण को समझने के लिए राम और रावण दोनों के दृष्टिकोण को जानना आवश्यक है। इसी प्रकार, राजनीति विज्ञान को एकतरफा तरीके से नहीं पढ़ाया जा सकता। आजादी के आंदोलन के दौरान पंडित नेहरू, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के साथ-साथ अन्य विचारों को भी समझना जरूरी है।

    जिन्ना पर आपत्तियाँ और निर्णय

    बैठक में कई सदस्यों ने जिन्ना को पाठ्यक्रम में बनाए रखने पर कड़ी आपत्ति जताई। कुछ सदस्यों ने जिन्ना को अल्पसंख्यकों के नेता के रूप में पढ़ाने पर भी गंभीरता से चर्चा की। काफी देर तक चली चर्चा के बाद, अंततः सहमति बनी कि जिन्ना से जुड़े विषयों को सिलेबस से हटा दिया जाए। इस निर्णय के बाद, समिति ने शहीद भगत सिंह को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया।

    भगत सिंह का समावेश

    बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भगत सिंह को आजाद भारत के दृष्टिकोण से पढ़ाया जाएगा। वहीं, अल्लामा इकबाल और सर सैयद अहमद खान के नाम पर किसी ने आपत्ति नहीं की, इसलिए इन दोनों को सिलेबस में बनाए रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में लिए गए निर्णयों को अंतिम मंजूरी के लिए कुलपति को भेज दिया गया है।

    पिछली बैठक के निर्णय

    इससे पहले, रविवार को पॉलिटिकल साइंस विभाग की डिपार्टमेंटल अफेयर्स कमेटी (डीएसी) की बैठक में भी पाठ्यक्रम से कुछ विषयों को हटाने पर सहमति बनी थी। कमेटी ने जिन्ना, इकबाल और सर सैयद अहमद खान से जुड़े विषयों को हटाने की सिफारिश की थी। मंगलवार को हुई बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई।