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  • तमंचे के साथ विधायक का डांस वायरल, राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना

    तमंचे के साथ विधायक का डांस वायरल, राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना

    कर्नाटक विधायक का विवादास्पद वीडियो, सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

    नई दिल्ली। कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में एक पारिवारिक समारोह के दौरान कांग्रेस विधायक मतीन पटेल का एक वीडियो जारी हुआ है, जिसमें वह कथित तौर पर हथियार लेकर डांस करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसके चलते विधायक की कार्यशैली और समाज में बढ़ती गन कल्चर पर गंभीर चर्चाएँ शुरू हो गई हैं।

    इस वायरल वीडियो में मतीन पटेल एक काली एसयूवी से बाहर निकलते हैं और फिल्म ‘धुरंधर’ के एक गाने पर पिस्टल जैसी दिखने वाली वस्तु के साथ नृत्य करते दिखाई देते हैं। वीडियो में उनके कुछ समर्थक भी बंदूक जैसी वस्तुएं थामे नजर आ रहे हैं। जैसे ही यह क्लिप फली फैली, लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। कई उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार का प्रदर्शन जनप्रतिनिधियों के लिए अनुचित है, और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

    विधायक की सफाई और पुलिस जांच

    मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक मतीन पटेल ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाली वस्तु असली हथियार नहीं, बल्कि एक खिलौना बंदूक थी। उन्होंने बताया कि यह एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम था, और उन्होंने बच्चों के कहने पर इसे किया था। पटेल का कहना है कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है, और पुलिस पहले ही इस मामले में उनसे पूछताछ कर चुकी है।

    हालांकि विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। कलबुरगी के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस डी का कहना है कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वीडियो में दिखाए गए हथियार की सत्यता की जांच की जाए। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वीडियो किस स्थान पर शूट किया गया और वह क्षेत्र किस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है।

    कानूनी दृष्टिकोण

    पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में हथियार असली पाए जाते हैं, तो यह देखा जाएगा कि उसके पास वैध लाइसेंस था या नहीं, और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है। यदि अवैध हथियार या किसी नियम की अनदेखी होती है, तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का प्रदर्शन कानून के तहत अपराध है, और निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में कोई भी वीडियो कुछ ही समय में करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है, और इस प्रकार जनप्रतिनिधियों के आचरण पर अधिक निगाहें रहती हैं। अब सबकी नजरें पुलिस जांच की रिपोर्ट पर हैं, जो तय करेगी कि यह महज एक गलतफहमी थी या नियमों का उल्लंघन।

  • यशस्वी जायसवाल ने रणजी क्वार्टरफाइनल में लिया अद्वितीय कैच

    यशस्वी जायसवाल ने रणजी क्वार्टरफाइनल में लिया अद्वितीय कैच

    मुंबई: रणजी ट्रॉफी का 2025-26 का सीजन अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुका है। इसी क्रम में एक रोमांचक क्वार्टरफाइनल मुकाबला भारत और मुंबई के बीच खेला गया, जहाँ ओपनर **यशस्वी जायसवाल** ने शानदार फील्डिंग के चलते सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

    यशस्वी जायसवाल ने **केएल राहुल** का चौंकाने वाला कैच लपका। इससे पहले भी उन्होंने एक बेहतरीन कैच पकड़ा था, जिससे उनकी टीम को महत्वपूर्ण सफलता मिली थी। बावजूद इसके, **कर्नाटक** ने संयम और साझेदारी से लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके चलते गत चैंपियन **मुंबई** का सफर समाप्त हो गया।

    <h3><strong>जायसवाल का शानदार कैच</strong></h3>
    <p>मैच का निर्णायक क्षण 59वें ओवर में आया। **तुषार देशपांडे** की शॉर्ट गेंद पर केएल राहुल ने फाइन लेग की दिशा में शॉट खेला, लेकिन गेंद गली की ओर चली गई। यशस्वी जायसवाल ने हवा में डाइव लगाते हुए दोनों हाथों से लाजवाब कैच पकड़ा, जिससे दर्शक हैरान रह गए।</p>
    
    <h3><strong>केएल राहुल की संघर्षशील पारी</strong></h3>
    <p>पहली पारी में केवल 28 रन पर आउट होने वाले केएल राहुल ने दूसरी पारी में पूरी जिम्मेदारी से बल्लेबाजी की। उन्होंने 182 गेंदों में 130 रन बनाए, जिसमें 14 चौके और एक छक्का शामिल था। राहुल के आउट होने के समय कर्नाटक को जीत के लिए 59 रन की जरूरत थी, जिससे मैच में रोमांच बढ़ गया।</p>
    
    <h3><strong>राहुल और स्मरण के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी</strong></h3>
    <p>राहुल और **स्मरण रविचंद्रन** के बीच 147 रन की एक अहम साझेदारी हुई। राहुल के आउट होने के बाद स्मरण ने सूझ-बूझ के साथ रन बनाना जारी रखा। उन्होंने दबाव के क्षणों में संयम बनाए रखा, जो मुंबई की टीम के लिए चुनौती बन गया।</p>
    
    <h3><strong>कर्नाटक ने चार विकेट से जीत हासिल की</strong></h3>
    <p>स्मरण रविचंद्रन ने 83 रन बनाकर नाबाद रहते हुए टीम को लक्ष्य तक पहुँचाया। **विद्या पाटिल** ने भी 31 रन की तेज पारी खेलकर योगदान दिया। दोनों ने अंतिम ओवरों में समझदारी से खेलते हुए विकेट सुरक्षित रखते हुए रन बनाए, जिससे कर्नाटक ने चार विकेट से जीत दर्ज की।</p>
    
    <h3><strong>सेमीफाइनल में उत्तराखंड और कर्नाटक का मुकाबला</strong></h3>
    <p>इस जीत के साथ कर्नाटक ने मुंबई को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। अब टीम 15 फरवरी से शुरू होने वाले सेमीफाइनल में उत्तराखंड का सामना करेगी। आठ बार की रणजी चैंपियन कर्नाटक का आत्मविश्वास इस जीत से और भी बढ़ गया है।<br/></p>
  • कर्नाटक: बेंगलुरु के नगर निगम चुनाव में बैलट पेपर से मतदान होगा

    कर्नाटक: बेंगलुरु के नगर निगम चुनाव में बैलट पेपर से मतदान होगा

    बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव: बैलट पेपर से मतदान की वापसी

    बेंगलुरु। कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने नगर निकाय चुनावों में मतदान के लिए बैलट पेपर के उपयोग की घोषणा की है। यह निर्णय 25 वर्षों के बाद लिया गया है, जिसमें ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले पांच नई नगर निगमों के चुनाव बैलट पेपर से होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी जी.एस. संगरेशी ने इस निर्णय को कानूनी रूप से वैध बताते हुए कहा कि इसका सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से कोई टकराव नहीं है। पिछले चुनावों में, 2000 के आस-पास बैलट पेपर का उपयोग किया गया था, जबकि हाल ही में ईवीएम का चलन रहा है। अब पारंपरिक मतदान प्रणाली की वापसी हो रही है।

    चुनाव की तारीखें और मतदाता संख्या

    इन चुनावों का आयोजन 25 मई के बाद और 30 जून के पहले करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, ताकि यह समय 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं के बाद का हो। लगभग 88.91 लाख मतदाता इस प्रक्रिया में शामिल होंगे, जिनके नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में शामिल हैं। राज्य चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि इस वर्ष के अंत में होने वाले जिला और तालुक पंचायत चुनाव भी बैलट पेपर के माध्यम से होंगे। इस कदम को पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाता विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    मतगणना की प्रक्रिया

    राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतगणना में कोई देरी नहीं होगी, इसके लिए सभी आवश्यक लॉजिस्टिक्स, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस बल की व्यवस्था की जाएगी। चुनाव एक ही दिन में संपन्न हो जाएगा और परिणाम तुरंत घोषित करने की योजना है। जीबीए के अंतर्गत 5 नगर निगमों में कुल 369 वार्ड हैं और लगभग 89 लाख मतदाता चुनावी प्रक्रिया में भाग लेंगे। ड्राफ्ट मतदाता सूची 19 जनवरी को जारी की गई थी, जिसमें आपत्तियां 20 जनवरी से 3 फरवरी तक स्वीकार की जा सकती हैं। अंतिम सूची 16 मार्च को प्रकाशित की जाएगी। यह फैसला पिछले वर्ष कर्नाटक कैबिनेट की सिफारिश के अनुरूप लिया गया है और वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इसे लागू किया जा रहा है।

  • अभिनेत्री के निर्माता पति ने wife’s kidnapping की, साथी भी शामिल

    अभिनेत्री के निर्माता पति ने wife’s kidnapping की, साथी भी शामिल

    फिल्म प्रोड्यूसर पर पत्नी के अपहरण का आरोप

    बेंगलुरु। कर्नाटक के हासन जिले में एक फिल्म प्रोड्यूसर पर अपनी पत्नी का अपहरण करने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला इसलिए और चौंकाने वाला है क्योंकि आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने पत्नी की रिहाई के बदले अपनी एक साल की बेटी की मांग की है। आरोपी का नाम हर्षवर्धन है, जो वर्धन एंटरप्राइजेज नामक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी का मालिक है।

    शिकायत और पारिवारिक विवाद

    एक्ट्रेस के परिवार ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। रिपोर्टों के अनुसार, हर्षवर्धन ने 2023 में कन्नड़ एक्ट्रेस चैत्रा से विवाह किया था, हालाँकि अब वे एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं। आरोपित हर्षवर्धन और चैत्रा में घरेलू विवादों के चलते यह जोड़ा पिछले कुछ समय से अलग रहने लगा था। इस दौरान, चैत्रा ने बेंगलुरु में किराए के घर में रहने का फैसला किया।

    अपहरण की घटना

    शिकायत में बताया गया है कि 7 दिसंबर 2025 को, चैत्रा ने अपने परिवार को बताया कि वह शूटिंग के काम के सिलसिले में मैसूर जा रही है। हालांकि, परिवार के अनुसार, यह शूटिंग का बहाना था, जिसे हर्षवर्धन ने अपने दोस्त कौशिक के माध्यम से अरेंज किया था। आरोप है कि 7 दिसंबर को सुबह, हर्षवर्धन, कौशिक और एक अन्य व्यक्ति ने उसे बेंगलुरु के मैसूर रोड मेट्रो स्टेशन पर बुलाया और जबरदस्ती कार में बिठाकर ले गए।

    धमकी और परिवार की चिंता

    परिवार के अनुसार, उसी शाम हर्षवर्धन ने चैत्रा की माँ को फ़ोन किया और कहा कि यदि एक साल की बेटी को उसके पास लाया गया, तो वह चैत्रा को सुरक्षित छोड़ देगा। इसके अतिरिक्त, एक अन्य रिश्तेदार को भी इसी प्रकार का संदेश भेजा गया, जिसमें बच्ची को अरसीकेरे ले जाने के लिए कहा गया था। शिकायतकर्ता ने कहा कि जब परिवार ने चैत्रा से संपर्क करने की कोशिश की, तो उसका फोन बंद था।

    पुलिस में शिकायत की देरी

    पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में भी देरी हुई। परिवार ने बताया कि चैत्रा की माँ उस समय तिप्तूर में थीं और उन्होंने शिकायत दर्ज कराने से पहले बेंगलुरु लौटने का निर्णय लिया।

  • कर्नाटक में सत्ता संघर्ष, डीके शिवकुमार ने अपना संदेश दिया

    कर्नाटक में सत्ता संघर्ष, डीके शिवकुमार ने अपना संदेश दिया

    कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी खींचतान

    बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद, शिवकुमार ने कहा कि दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण संदेश पार्टी के सदस्यों तक पहुँचाया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सिंचाई और शहरी विकास जैसे कई मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। शिवकुमार ने कहा, “हम कांग्रेस के साथ खड़े हैं और पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध हैं।”

    दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा की योजना

    डीके शिवकुमार ने इन मुद्दों पर चर्चा के लिए दिल्ली जाने की योजना बनाई है। वह केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक के लिए अपॉइंटमेंट लेने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि वह और मुख्यमंत्री एक ऑल-पार्टी डेलीगेशन को दिल्ली ले जाने की योजना बना रहे हैं, जिसमें गन्ना, मक्का और अन्य मुद्दों पर वार्ता करेंगे।

    पूर्व सीएम एसएम कृष्णा की श्रद्धांजलि

    शिवकुमार हाल ही में कर्नाटका के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के घर उनके 12वें महीने के अनुष्ठान में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटी से मिलने वहां जा रहे हैं। यह अनुष्ठान 10 दिसंबर, 2024 को कृष्णा के निधन के बाद हो रहा है।

    सीएम और डिप्टी सीएम के बीच एकजुटता

    दोनों नेताओं ने एक घंटे की बैठक के बाद पार्टी के भीतर एकजुटता की पुष्टि की है। सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने पार्टी हाईकमान के निर्णय को मानने का फैसला किया है और अब किसी भी तरह की कन्फ्यूजन नहीं होगी। खासकर तब जब से सिद्धारमैया की सरकार ने आधा टर्म पूरा किया है।

    नेताओं के बीच सामंजस्य और नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा

    सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि वह अपनी पांच साल की अवधि पूरी करेंगे, जबकि शिवकुमार ने पार्टी के सीनियर नेताओं के बीच हुए सीक्रेट एग्रीमेंट का हवाला देते हुए 2.5 साल बाद खुद को सीएम पद के लिए उपयुक्त बताया है। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में हाईकमान का फैसला जल्द ही आने की उम्मीद है। दोनों नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक निर्णय का पालन करने की इच्छा जताई है।

  • कर्नाटक: नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर सिद्धारमैया एवं शिवकुमार का एकजुटता बयान

    कर्नाटक: नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर सिद्धारमैया एवं शिवकुमार का एकजुटता बयान

    कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं और एकजुटता का संदेश

    बंगलूरू: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने एकमतता का संकेत दिया है। दोनों नेताओं ने एक घंटे तक चलने वाले नाश्ते के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और आलाकमान के निर्णय का पालन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयान

    सिद्धारमैया ने कहा कि “अब कोई असमंजस नहीं रहेगा। मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स ने गलतफहमी पैदा की। हम तय कर चुके हैं कि पार्टी आलाकमान जो निर्णय करेंगे, हम उसका पालन करेंगे।” उन्होंने आगामी 2028 विधानसभा चुनाव पर भी जोर दिया और कहा कि निकाय चुनाव भी महत्वपूर्ण हैं। यह भी बताया कि कांग्रेस को पुनः सत्ता में लाने का लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं हैं और भविष्य में भी नहीं होंगे।

    डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया

    डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा, “राज्य की जनता का पूरा समर्थन हमें मिल रहा है। हम अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की दिशा में कार्यरत हैं। पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है, और हम मिलकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के साथ मैं भी समर्थन में हूं।” उन्होंने आलाकमान के निर्णय को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि वे पार्टी के प्रति वफादार रहेंगे।

    नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा का इतिहास

    2023 के विधानसभा चुनावों के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सीएम पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई थी। यह विवाद इतना बढ़ा कि आलाकमान को दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाना पड़ा। वहां एक समझौते के तहत यह तय किया गया कि सिद्धारमैया राज्य के मुख्यमंत्री रहेंगे जबकि शिवकुमार डिप्टी सीएम के रूप में कार्य करेंगे। मीडिया में ढाई-ढाई साल के समझौते की बातें उड़ीं, लेकिन पार्टी ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। हाल के दिनों में सिद्धारमैया के सीएम कार्यकाल के ढाई साल पूरे होने के बाद, एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

  • कर्नाटका के मुख्यमंत्री पद पर असंतोष, विधायक दिल्ली पहुंचे शिवकुमार का समर्थन करने

    कर्नाटका के मुख्यमंत्री पद पर असंतोष, विधायक दिल्ली पहुंचे शिवकुमार का समर्थन करने

    कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद पर कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला

    नई दिल्ली। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस पार्टी में चल रही हलचल अब नई दिल्ली पहुंच चुकी है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में विधायकों का एक और समूह नई दिल्ली के लिए रवाना हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस दल में शामिल छह विधायक रविवार रात को दिल्ली पहुंच गए हैं। यह उम्मीद जताई जा रही है कि और विधायक भी जल्द दिल्ली में पहुंच सकते हैं ताकि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का मुद्दा पार्टी के उच्च नेताओं के सामने रखा जा सके।

    कांग्रेस सरकार का आधा कार्यकाल पूरा

    कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच ‘पावर शेयरिंग’ समझौते की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इस स्थिति ने सवाल उठाए हैं कि क्या आने वाले ढाई सालों में डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद सौंपा जाएगा। नई दिल्ली पहुंचे विधायकों में एचसी बालकृष्णा, केएम उदय, नयना मोतम्मा, इकबाल हुसैन, शरथ बचेगौड़ और शिवगंगा बसवराज शामिल हैं।

    कांग्रेस नेतृत्व की स्थिति

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस समय बंगलूरू में हैं, लेकिन जल्द ही दिल्ली जाने का प्लान बना रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी भी विदेश से लौटने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले हफ्ते, लगभग दस विधायक शिवकुमार के समर्थन में दिल्ली गए थे और खरगे से मुलाकात की थी, हालांकि शिवकुमार ने इसे लेकर कोई जानकारी नहीं दी थी।

    बैठक और पार्टी में उठते सवाल

    दिल्ली में शिवकुमार के समर्थक विधायकों की गतिविधियों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खरगे के साथ बंगलूरू में एक महत्वपूर्ण बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार पार्टी के भीतर निर्णय की मांग कर रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यदि कांग्रेस हाई कमांड कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देती है, तो इससे सिद्धारमैया को पूरे कार्यकाल का मौका मिलेगा और शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के संभावनाओं में कमी आ सकती है।