केरल विधानसभा चुनाव की तैयारी में कांग्रेस की हलचल
नई दिल्ली में केरल विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। मतदान 9 अप्रैल को होगा और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। सभी राजनीतिक दल चुनावी मैदान में कूदने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस के लिए यह चुनाव विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वह लंबे समय से केरल में सत्ता से बाहर है। इस बीच, दिल्ली में पार्टी के भीतर की गतिविधियों ने भी ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, कांग्रेस के नेताओं के बीच गंभीर चर्चा हुई, जिसका मुख्य कारण राहुल गांधी की असहमति थी।
राहुल गांधी की नाराजगी और टिकट वितरण की नई रणनीति
कांग्रेस की बैठक रात 10:30 बजे शुरू होकर सुबह 2:30 बजे तक चली। इस दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब टिकट वितरण प्रक्रिया को और अधिक सावधानी से किया जाएगा। उन्होंने बिना ठोस डेटा और जातीय समीकरणों के टिकट बांटने से मना कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, पार्टी ने निर्णय लिया कि कोई लोकसभा सांसद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा, जिससे कई नेताओं की उम्मीदें टूट गईं।
टिकट वितरण में गुटों का असर
बैठक में यह भी देखा गया कि टिकट वितरण में वेणुगोपाल का प्रभाव प्रमुख था, जिसमें लगभग 60% उम्मीदवार उनके समूह से जुड़े थे। अन्य नेताओं जैसे रमेश चेन्निथला और वी डी सतीशन को भी कुछ हिस्सेदारी मिली। उल्लेखनीय यह रहा कि शशि थरूर ने इस प्रक्रिया में कोई विशेष भूमिका नहीं निभाई।
सोशल इंजीनियरिंग और युवा प्रतिनिधित्व
कांग्रेस ने इस बार टिकट वितरण में सोशल इंजीनियरिंग पर जोर दिया है। उन्होंने ईसाई, नायर और एझावा समुदायों के संतुलित प्रतिनिधित्व का प्रयास किया है। 92 उम्मीदवारों में से 52 की उम्र 50 साल से कम है, जो युवा मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, महिला प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है, क्योंकि केवल 9 महिलाओं को टिकट दिया गया है।


