महाराष्ट्र में पंचायत और नगर निकाय चुनाव के बाद तनाव
मुम्बई। महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न पंचायत और नगर निकाय चुनाव के बाद ठाकरे परिवार की पार्टियों में फिर से तनाव सामने आ रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों ने महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं। हालांकि, उद्धव गुट और भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
महाविकास आघाड़ी में पार्टी के बीच तनाव
महाविकास आघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच संबंध तब से तनावपूर्ण हो गए हैं जब कांग्रेस चंद्रपुर नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, फिर भी शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों के समर्थन से भाजपा का उम्मीदवार महापौर चुना गया।
मनसे पर साधा गया निशाना
राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की मुंबई इकाई के अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने उद्धव गुट को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि जब शिवसेना (उबाठा) भाजपा का समर्थन करती है तो उसे सही ठहराया जाता है, जबकि मनसे को इसी प्रकार के समर्थन के लिए गलत ठहराया जाता है। उनका दावा है कि चंद्रपुर में हर शिवसेना (उबाठा) पार्षद को एक करोड़ रुपये मिले, जबकि एक निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए।
चुनाव गठजोड़ के परिणाम
मुंबई में हुए निकाय चुनाव के दौरान शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने एक साथ चुनाव लड़ा, लेकिन वे भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को बृहन्मुंबई महानगरपालिका में सफल होने से नहीं रोक सके। शिवसेना (उबाठा) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे अपने आरोपों का प्रमाण पेश करें, तो वह इस्तीफा दे देंगे।
संजय राउत की प्रतिक्रिया
देशपांडे ने संजय राउत पर भी हमला करते हुए सवाल किया कि चंद्रपुर की घटनाओं के दौरान क्या राउत को जानकारी नहीं थी या उन्होंने जानबूझकर अनजान बने रहने का प्रयास किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को हल्के में लिया जा रहा है, जो कि शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच बढ़ते मतभेदों को दर्शाता है। संजय राउत ने हाल ही में मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की और कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।









