चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और भोग
हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है, जिसमें भक्त माता दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन आज मनाया जा रहा है, जो मां चंद्रघंटा को समर्पित है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप भक्तों के लिए अत्यंत प्रिय है और उन्हें शांति, शक्ति और साहस की देवी माना जाता है।
माँ चंद्रघंटा को भोग: पेड़े
इस दिन मां चंद्रघंटा को विशेष रूप से पेड़े का भोग अर्पित किया जाता है। यह भोग मिठास और खुशी का प्रतीक है, जिसे भक्त श्रद्धापूर्वक तैयार करते हैं। पेड़े का भोग अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वे सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति करते हैं।
पूजा विधि
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि में सबसे पहले स्वच्छता का ध्यान रखा जाता है। भक्त पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं। पूजन स्थान को अच्छे से सजाया जाता है और मां का भव्य चित्र या मूर्ति स्थापित किया जाता है। इसके बाद, दीपक जलाकर, धूप और अगरबत्ती जलाते हैं। भक्त श्रद्धा पूर्वक मंत्रों का जाप करते हुए मां से आशीर्वाद मांगते हैं। इस दिन विशेष रूप से ‘ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः’ मंत्र का जाप किया जाता है।
व्रत कथा और महत्व
मां चंद्रघंटा की पूजा का धार्मिक महत्व भी है। कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और मां की उपासना करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह दिन मानसिक तनाव को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी है। भक्तों का मानना है कि मां चंद्रघंटा उनकी सभी परेशानियों का समाधान करती हैं।

