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  • पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं, ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख; युद्ध के लंबे खिंचने के संकेत

    पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं, ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख; युद्ध के लंबे खिंचने के संकेत

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव: स्थिति गंभीर होती जा रही है

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में दिए अपने हालिया बयान में स्पष्ट किया है कि यह संघर्ष तुरंत समाप्त होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के प्रयास केवल तात्कालिक जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक ऐसा स्थायी हल निकालने पर केंद्रित हैं, जो भविष्य में परमाणु खतरे के संभावित बढ़ने से रोके।

    परमाणु हथियारों का खतरा

    ट्रंप ने तीखे शब्दों में कहा कि दुनिया को “पागल लोगों” के हाथों में परमाणु हथियार नहीं दिए जा सकते। उनका यह भी कहना था कि अमेरिका ईरान को कभी भी परमाणु शक्ति बनने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने कहा कि ईरान आत्मघाती कदम उठा सकता था और समुचित सैन्य कार्रवाई के बिना वह जल्दी ही परमाणु हथियार हासिल करने में सफल हो सकता था।

    ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की परिस्थितियाँ

    यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत तेज हुआ, जिसमें अमेरिका और इज़रायल मिलकर ईरान के विरुद्ध कदम उठा रहे हैं। अब यह ऑपरेशन अपने तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता में वृद्धि हुई है।

    आंतरिक मतभेद और इस्तीफे की घटनाएँ

    ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका यदि चाहे तो युद्ध की स्थिति से पीछे हट सकता है, लेकिन ईरान को हुई क्षति की भरपाई में कई साल लग सकते हैं। इसके बावजूद, उन्होंने जल्दीबाज़ी में पीछे हटने की इच्छा व्यक्त नहीं की। उनके अनुसार, यदि तुरंत निर्णायक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

    हालांकि, ट्रंप प्रशासन को एक महत्वपूर्ण झटका भी लगा है। नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर (NCTC) के प्रमुख जोसेफ केंट ने ईरान पर हमले के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। केंट ने अपने त्यागपत्र में युद्ध के औचित्य पर सवाल उठाए और कहा कि अमेरिका को ईरान से कोई तत्काल खतरा नहीं था।

    संघर्ष का भविष्य

    केंट ने यह भी आरोप लगाया कि यह संघर्ष बाहरी प्रभावों, विशेषकर इज़रायल और उसके प्रभावशाली लॉबी समूहों के कारण शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि वह अपने नैतिकता के खिलाफ जाकर इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते।

    यह घटनाक्रम इस बात को स्पष्ट करता है कि अमेरिकी नेतृत्व भले ही ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है, लेकिन आंतरिक स्तर पर इस नीति को लेकर मतभेद भी उभर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना खास होगा कि यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या इसके लिए कोई स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।