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2026 चुनाव में नंदिग्राम के बाद भबानीपुर में ममता-सुवेंदु के बीच संघर्ष
भवानीपुर में ममता बनर्जी का फिर से मुकाबला सुवेंदु अधिकारी से
नई दिल्ली: आगामी विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच एक बार फिर से टक्कर होने जा रही है। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी नंदीग्राम में हार गई थीं, लेकिन भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल की थी। इस बार ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस ने भवानीपुर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को न केवल नंदीग्राम बल्कि भवानीपुर से भी मैदान में उतारा है।
2018 चुनाव और राजनीतिक बदलाव
2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कई प्रमुख नेता तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, जिसमें सुवेंदु अधिकारी भी शामिल थे। चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था, जिसमें भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को उनके खिलाफ खड़ा किया। इस दौरान सीपीएम ने युवा नेता मीनाक्षी मुखर्जी को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन ममता और सुवेंदु के बीच मुकाबला सबसे ज़्यादा देखने को मिला था।
सुवेंदु का 1956 वोटों से ममता को हराना
भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने उस चुनाव में ममता को 1956 वोटों से हराया था, जिसमें उन्हें 1,10,764 वोट मिले, जबकि ममता को 1,08,808 वोट मिले। मीनाक्षी मुखर्जी को 6,267 वोट मिले। चुनाव परिणामों में विवाद भी हुआ था, जिसके चलते ममता ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। पिछले 5 वर्षों में सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल सुप्रीमो को कई बार चुनौती दी है।
भवानीपुर में ममता का इतिहास
ममता बनर्जी ने 2011 में भवानीपुर सीट से चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद संभाला था। उस समय उन्होंने सीपीएम की उम्मीदवार नंदिनी मुखर्जी को 54,000 से अधिक वोटों से हराया था। 2016 में, उन्हें भवानीपुर से 65,520 वोट मिले थे, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस की दीपा दासमुंशी को 40,219 वोट मिले। 2021 के चुनाव में ममता ने इस सीट से चुनाव नहीं लड़ा था, जिसमें शोभनदेब चटर्जी ने तृणमूल के टिकट पर जीत हासिल की थी।
उपचुनाव में ममता की सफलता
शोभनदेब चटर्जी ने बाद में सीट को खाली कर दिया ताकि ममता बनर्जी उपचुनाव में हिस्सा ले सकें। 3 अक्टूबर, 2021 को उपचुनाव के परिणाम घोषित हुए, जिसमें ममता को 85,263 वोट मिले और भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल को 26,428 वोट मिले। ममता ने इस उपचुनाव में 58,835 वोटों से जीत हासिल की थी।
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विनेश फोगट ने वापसी की घोषणा, ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करेंगी
विनेश फोगाट का संन्यास से वापसी का फैसला
नई दिल्ली: भारत की महिला रेसलर विनेश फोगाट ने हाल ही में अपने संन्यास के फैसले से पलटने का घोषणा की है। उन्होंने अगस्त 2025 में इस खेल को छोड़ने का निर्णय लिया था और इसके बाद राजनीति में कदम रखा था। अब, वह एक बार फिर मैट पर लौटने का मन बना चुकी हैं। विनेश ने अपने फैंस के साथ यह जानकारी साझा करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी डाली है। उनकी निगाहें अब लॉस एंजेलेस में होने वाले 2028 ओलंपिक खेलों पर टिकी हैं।
सोशल मीडिया पर साझा किया अनुभव
विनेश ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘लोग अक्सर मुझसे पूछते रहते हैं कि क्या पेरिस मेरा आखिरी सफर था? पिछले कुछ समय से मैं इस सवाल का जवाब नहीं दे पाई। मुझे मैट, प्रेशर और उम्मीदों से दूर रहने की जरूरत थी। पहली बार मुझे चैन की सांस लेने का मौका मिला। मैंने अपने जीवन के उतार-चढ़ाव को समझने के लिए समय निकाला। मुझे खेल से आज भी प्यार है और मैं एक बार फिर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हूं।’
अपने अनुभवों का किया जिक्र
उन्होंने आगे कहा, ‘सन्नाटे में मुझे कुछ ऐसा मिला जिसे मैं भूल गई थी कि ‘आग कभी नहीं बुझती’। यह सिर्फ थकावट और शोर के अंदर दबी हुई थी। अनुशासन, दिनचर्या और लड़ाई मेरे भीतर रची-बसी है। चाहे मैं कितनी दूर चली गई, मेरा एक हिस्सा हमेशा मैट पर बना रहेगा। इसलिए, मैं वापस लौट रही हूं, एक निडर दिल के साथ। इस बार, मेरे बेटा भी मेरी टीम में शामिल हो रहा है, जो मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है।’
पेरिस ओलंपिक का दुःखद अनुभव
पेरिस ओलंपिक ने विनेश के लिए एक दुःखद सपना साबित हुआ। उन्होंने महिलाओं के 50 किलो की कैटेगरी में शानदार कुश्ती करते हुए फाइनल तक पहुँचने में सफलता पाई थी। लेकिन, फाइनल मुकाबले से कुछ घंटे पहले उन पर ओवरवेट होने का आरोप लगाया गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें डिस्क्वालिफाई कर दिया गया। इससे वह मेडल जीतने से चूक गईं। इससे पहले, विनेश रियो और टोक्यो ओलंपिक में भी प्रतिस्पर्धा कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें वहां भी सफलता नहीं मिली थी। अब, वह एक बार फिर अपने सपनों को पूरा करने के लिए तैयार हैं।
