टैग: PadmaAwards2026 पद्म श्री पद्म भूषण पद्म पुरस्कार

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    नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस 2026 के उपलक्ष्य में घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची में भारतीय सिनेमा के किंवदंती धर्मेंद्र का नाम प्रमुखता से जुड़ा हुआ है। नवंबर 2025 में उनका निधन हो गया, जिसके बाद उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। यह सम्मान उनके उस अद्भुत युग की एक श्रद्धांजलि है जिसे धर्मेंद्र ने अपने अभिनय से सजाया था।

    आर्ट और कल्चर के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित करने वाले चार अद्वितीय व्यक्तित्वों को देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म भूषण, से सम्मानित किया गया है। गायक अलका याग्निक से लेकर दक्षिण भारतीय सिनेमा के पितामह ममूटी तक, इस सूची ने भारतीय कला की विविधता और गंभیرता को फिर से प्रस्तुत किया है।

    1. धर्मेंद्र: एक युग का समापन, अमर विरासत

    हाल ही में हुए उनके निधन के बाद, राष्ट्र ने उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े सम्मान से नवाजा है। फिल्मों जैसे “बंदिनी” और “सत्यकाम” से लेकर “शोले” के वीरू तक, धर्मेंद्र ने साबित किया कि वे केवल एक एक्शन हीरो नहीं, बल्कि एक सर्वांगीण कलाकार थे। 1960 में शुरू हुआ उनका कॅरियर 2025 की फिल्म “इक्कीस” तक जारी रहा।

    2. अलका याग्निक (मaharाष्ट्र)

    90 के दशक की सबसे चर्चित आवाजों में से एक अलका याग्निक को कला क्षेत्र में उनके अनुपम योगदान के लिए पद्म भूषण से नवाजा गया है। लगभग चार दशकों के करियर में उन्होंने 25 भाषाओं में हजारों गाने गाकर भारतीय संगीत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। हाल ही में, स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, उनके संगीत के प्रति समर्पण करोड़ों प्रशंसकों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

    3. ममूटी (केरल)

    मलयालम सिनेमा के साथ-साथ भारतीय फिल्म उद्योग के शीर्ष अभिनेताओं में ममूटी को इस सम्मान से नवाजा जाना दक्षिण भारतीय सिनेमा के लिए गर्व की बात है। 74 वर्ष की आयु में भी, अपनी अदाकारी से युवा कलाकारों को चुनौती देने वाले ममूटी ने 400 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मानवाया है। यह पुरस्कार उनके अभिनय कौशल और सिनेमा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को मान्यता देता है।

    4. पीयूष पांडे (मरणोपरांत) महाराष्ट्र

    भारतीय विज्ञापन को एक नई दिशा प्रदान करने वाले पीयूष पांडे को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। प्रसिद्ध विज्ञापनों जैसे फेविकोल, कैडबरी और फेविक्विक के पीछे का दिमाग पीयूष पांडे ही थे। उन्होंने विज्ञापन को केवल मार्केटिंग नहीं, बल्कि एक कहानी कहने की कला में बदल दिया। उनका यह सम्मान भारतीय सृजनात्मकता के एक युग को समर्पित किया गया है।

    5. शतास्वधानी आर. गणेश (कर्नाटक)

    कर्नाटक के डॉ. आर. गणेश कला और साहित्य के अद्वितीय संगम हैं। अवधान जैसी कठिन विधा में महारत रखने वाले गणेश जी ने हजारों कार्यक्रम आयोजित कर भारतीय शास्त्रीय कलाओं को पुनर्जीवित किया है। उनकी अष्टावधान और शतावधान में निपुणता उन्हें आधुनिक युग का एक दुर्लभ विद्वान बनाती है।