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  • निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश, मंत्री ने होली पर जनता को शुभकामनाएं दीं

    निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश, मंत्री ने होली पर जनता को शुभकामनाएं दीं

    बिहार में निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री की संभावना

    पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक करियर को लेकर लंबे समय से अटकलें जारी थीं। अब, नीतीश के करीबी सहयोगी श्रवण कुमार ने पुष्टि की है कि निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। श्रवण कुमार, जो बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए कहा कि होली के अवसर पर यह घोषणा की जा रही है।

    निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री

    श्रवण कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरान बताया कि होली के पावन मौके पर यह जिक्र करना चाहेंगे कि निशांत की राजनीति में एंट्री की चर्चा काफी समय से चल रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई युवाओं के बीच इस विषय पर बात की है, जो लंबे समय से निशांत के राजनीति में आने के लिए उत्सुक हैं। श्रवण कुमार ने उम्मीद जताई कि यह युवाओं की मांग जल्द पूरी होगी और उन्होंने निशांत कुमार के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।

  • थलपति विजय की राजनीति में एंट्री से परिवार में बंटवारा, पत्नी ने की तलाक की दरख्वास्त

    थलपति विजय की राजनीति में एंट्री से परिवार में बंटवारा, पत्नी ने की तलाक की दरख्वास्त

    थलापति विजय की शादीशुदाई जिंदगी में बड़ा मोड़

    चेंगलपट्टू। तमिल सिनेमा के प्रतिष्ठित अभिनेता थलापति विजय की पत्नी संगीता सोरनालिंगम ने 27 फरवरी, 2026 को चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दायर की है। यह कदम उनके संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। थलापाती विजय, जो न केवल एक सफल अभिनेता हैं, बल्कि तमिलगा वेत्रि कझगम के संस्थापक भी हैं, ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अदालत इस याचिका पर आगे की सुनवाई कर रही है। यह निर्णय शादी के 27 वर्षों के बाद आया है।

    शादी के समारोह और परिवार

    विजय और संगीता ने 25 अगस्त, 1999 को एक भव्य समारोह में शादी की थी, जिसमें कई बड़े फिल्म सितारे शामिल हुए थे। विजय एक क्रिश्चियन हैं, जबकि संगीता हिंदू समुदाय से हैं। दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शादी की और चेन्नई में एक शानदार रिसेप्शन का आयोजन किया।

    बच्चों का जीवन और करियर

    इनकी शादी के बाद, 26 अगस्त 2000 को उनके पहले बच्चे, एक बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम जेसन संजय विजय रखा गया। इसके बाद, 2005 में उनकी एक बेटी दिव्या साशा का जन्म हुआ। वर्तमान में, जेसन संजय, जो अब बड़े हो चुके हैं, ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में निर्देशक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की है।

  • अजित पवार ने शरद पवार की छाया छोड़कर महाराष्ट्र में राजनीतिक नेतृत्व स्थापित किया

    अजित पवार ने शरद पवार की छाया छोड़कर महाराष्ट्र में राजनीतिक नेतृत्व स्थापित किया

    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटनामा निधन

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के बारामती क्षेत्र के एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का हाल ही में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। यह विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजित पवार सहित सभी यात्रियों की जान चली गई।

    राजनैतिक यात्रा में पहला कदम

    अजित पवार, जिन्हें सियासी जगत में “सियासत के बेताज बादशाह” के तौर पर जाना जाता है, ने अपने चाचा शरद पवार को अपना प्रेरणास्त्रोत मानते हुए राजनीति में कदम रखा। उन्होंने एनसीपी को महाराष्ट्र में मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पार्टी का एक बड़ा जनाधार तैयार किया। 2022 में शरद पवार से अलग होकर उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार का गठन किया।

    पारिवारिक पृष्ठभूमि

    अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ। वे शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के पुत्र हैं। उनके पिता एक फिल्म उद्योग से जुड़े थे और अजित की शादी सुनेत्रा पवार से हुई। उनके दो बच्चे, पार्थ पवार और जय पवार हैं।

    शिक्षा और प्रारंभिक राजनीतिक करियर

    अजित पवार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से प्राप्त की। कॉलेज के समय में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बादउन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1982 में शरद पवार के मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया, और उस समय वे सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने गए।

    सांसद और विधायक के रूप में उपलब्धियां

    1991 में वे बारामती संसदीय क्षेत्र से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन बाद में यह सीट अपने चाचा के लिए खाली कर दी। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बाद 1995 में बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद से वे लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे।

    कैबिनेट मंत्री से उपमुख्यमंत्री बनने तक का सफर

    45 वर्षों के करियर में, अजित पवार ने कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर कार्य किया। 1999 में जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आई, तो उन्हें सिंचाई मंत्री का कार्यभार सौंपा गया। 2019 में उन्होंने दो बार उपमुख्यमंत्री की शपथ ली, पहली बार देवेंद्र फडनवीस के तहत और बाद में उद्धव ठाकरे के तहत। 2023 में वे फिर से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने।

    चाचा से बगावत और नई राह

    2022 में, जब शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाना शुरू किया, तो अजित पवार ने अपने राजनीतिक रास्ते को बदलने का निर्णय लिया। उन्होंने एनसीपी के कई नेताओं के साथ भाजपा की महायुति सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया, और 2023 में उन्होंने पार्टी पर पूरी तरह से नियंत्रण प्राप्त कर लिया।

  • भाजपा ने कांग्रेस से पूछा, क्या थरूर को मिलेगा ‘फतवा’? गौतम गंभीर की प्रशंसा पर विवाद

    भाजपा ने कांग्रेस से पूछा, क्या थरूर को मिलेगा ‘फतवा’? गौतम गंभीर की प्रशंसा पर विवाद

    थरूर की प्रशंसा से भाजपा का सवाल

    नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच से पहले पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर के साथ एक सेल्फी साझा की। थरूर ने गंभीर की आलोचनाओं के बावजूद उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि गंभीर का काम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे चुनौतीपूर्ण है। इस मुलाकात पर भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि कांग्रेस शायद थरूर के खिलाफ एक और फतवा जारी कर सकती है। उन्होंने ट्वीट किया कि यह सवाल उठाना कि थरूर का नागपुर जाना, गंभीर से मिलना या फिर मोदी के बाद गंभीर के काम की मुश्किलता को मानना, कांग्रेस के लिए गुस्से का कारण बन सकता है।

    थरूर का गंभीर को समर्थन

    थरूर ने गंभीर की प्रशंसा करते हुए कहा कि लाखों लोग उनके निर्णयों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन वह हमेशा शांत रहते हैं और निर्भीक होकर कार्य करते हैं। थरूर ने लिखा, “उनकी शांत दृढ़ता और नेतृत्व की प्रशंसा करनी चाहिए।” उन्होंने गंभीर को भविष्य में सभी सफलताओं के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

    गंभीर का जवाब

    इस पर गंभीर ने देर रात एक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने थरूर का धन्यवाद करते हुए लिखा कि जब हालात शांत हो जाएंगे, तब कोच के सीमित अधिकारों को लेकर सच्चाई सामने आएगी। गंभीर ने कहा कि इस स्थिति में खुद को खड़ा देखना उनके लिए हास्यास्पद है।

  • आडवाणी के बीच मतभेद, नई पार्टी गठन की योजना BJP छोड़ने की

    आडवाणी के बीच मतभेद, नई पार्टी गठन की योजना BJP छोड़ने की

    अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी: भारतीय राजनीति की दो महत्वपूर्ण शख्सियतें

    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख नेता अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी को भारतीय राजनीति में वर्षों तक अटूट माना जाता रहा है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब वाजपेयी ने एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने पर गंभीरता से विचार किया। वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी ने यह जानकारी बुधवार को प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान साझा की। यह व्याख्यान अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित किया गया था, जिसका विषय “अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन और योगदान” था।

    1984 का लोकसभा चुनाव और वाजपेयी का संकट

    नीरजा चौधरी के अनुसार, 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को केवल दो सीटें मिली थीं और इस दौरान वाजपेयी ग्वालियर से चुनाव हार गए थे। इसी समय आडवाणी पार्टी में तेजी से उभर रहे थे, जिससे वाजपेयी निराश महसूस कर रहे थे। उन्होंने कुछ समय के लिए भाजपा से अलग होकर नई पार्टी बनाने का मन बनाया, लेकिन यह विचार ज्यादा लंबे समय तक नहीं चला और अंततः उन्होंने भाजपा के साथ बने रहने का निर्णय लिया।

    पोखरण-2 और आडवाणी की पीड़ा

    अपने व्याख्यान में नीरजा चौधरी ने 1998 में हुए पोखरण-2 परमाणु परीक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना पर भी प्रकाश डाला, जिसने दोनों नेताओं के बीच तनाव को उजागर किया। वाजपेयी ने परीक्षण की जानकारी अपने प्रधान सचिव और सेना प्रमुखों के साथ साझा की, लेकिन आडवाणी को इस निर्णय में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि अन्य मंत्रिमंडल सदस्यों को भी परीक्षण की सूचना केवल दो दिन पहले दी गई, वह भी बिना तारीख बताए।

    चौधरी ने याद करते हुए बताया कि 11 मई 1998 को जब वह आडवाणी से मिलने पहुंची, तो वे अकेले बैठे थे और उनकी आंखों में आंसू थे। उन्हें यह दुख था कि वर्षों की मित्रता और पार्टी की पुरानी प्रतिबद्धता के बावजूद उन्हें भरोसे में नहीं लिया गया।

    1990 के दशक में वाजपेयी का प्रभाव

    नीरजा चौधरी ने यह भी बताया कि 1990 के दशक में अटल बिहारी वाजपेयी की छवि सर्वमान्य बन गई थी, जिससे वे भारतीय राजनीति में प्रभावशाली बन गए। उनके सभी दलों से अच्छे संबंध थे। वाजपेयी और पूर्व प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिंह राव के बीच भी करीबी रिश्ता था, जो कि उनके ब्राह्मण होने या 1977 में विदेश मंत्री रहते हुए दोनों की पुरानी जान-पहचान का परिणाम था।

  • शरद पवार के डिनर में राहुल, अजित, अडानी और केंद्रीय मंत्री शामिल हुए

    शरद पवार के डिनर में राहुल, अजित, अडानी और केंद्रीय मंत्री शामिल हुए

    दिल्ली में शरद पवार का विशेष डिनर

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बुधवार की शाम राजनीतिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रही। एनसीपी और एसपी के प्रमुख शरद पवार के घर आयोजित एक विशेष डिनर में विभिन्न दलों के नेता एकत्रित हुए। इस अवसर पर देश के प्रमुख उद्योगपतियों ने भी भाग लिया। यह मुलाकात शरद पवार के 85वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी।

    नेताओं की उपस्थिति

    इस डिनर में भारत के कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी शिरकत की। प्रमुख नेताओं के बीच चर्चा का विषय वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और आगामी चुनावी रणनीतियाँ रहीं। शरद पवार की मेज़बानी ने सभी उपस्थित लोगों को एक सामूहिक मंच पर लाने का काम किया।

    उद्योगपतियों की सहभागिता

    अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सक्रिय उद्योगपति भी इस आयोजन में शामिल हुए। उनकी उपस्थिति से यह स्पष्ट हुआ कि राजनीतिक चुनौतियों के बीच औद्योगिक क्षेत्र की सक्रियता भी महत्वपूर्ण है। डिनर में हुई बातचीत ने विभिन्न विचारों और दृष्टिकोणों को साझा करने का एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया।

    पार्टी सीमाओं से परे एकता

    इस आयोजन ने पार्टी सीमाओं को पार करते हुए एक नई गठबंधन भावना को दर्शाया। शरद पवार के 85वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने सभी जोड़ने वाले पहलुओं को उजागर किया और राजनीतिक एकता की आवश्यकता पर बल दिया।

  • कंगना रनौत ने राहुल गांधी को भाजपा में शामिल होकर नेतृत्व की सलाह दी

    कंगना रनौत ने राहुल गांधी को भाजपा में शामिल होकर नेतृत्व की सलाह दी

    राहुल गांधी का सरकार पर आरोप

    नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विदेशी मेहमानों को विपक्ष के नेता से नहीं मिलने देती। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यह परंपरा रही थी कि विदेश से आने वाले अतिथि विपक्ष के नेता से मिलते थे।

    कंगना रनौत की प्रतिक्रिया

    भाजपा सांसद कंगना रनौत ने राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि उनके देश के प्रति भावनाएँ संदेहास्पद हैं। कंगना ने सुझाव दिया कि राहुल को भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए, यह कहते हुए कि वह भी अटल बिहारी वाजपेयी की तरह बन सकते हैं। उन्होंने राहुल की तुलना अटल जी से करते हुए यह कहा कि अगर वह भाजपा में शामिल होते हैं, तो उन्हें बेहतर पहचान मिलेगी।

    राहुल गांधी का बयान और पूर्व परंपराएं

    राहुल गांधी ने संसद भवन में संवाददाताओं से कहा कि विदेशी मेहमानों के स्वागत की परंपरा अब समाप्त हो गई है। उनका कहना है कि विपक्ष के नेता का एक अलग दृष्टिकोण होता है और उन्हें विदेशी अधिकारियों से मिलने की अनुमति मिलनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं कर रहे हैं।

    पुतिन की भारत यात्रा पर टिप्पणी

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के संबंध में बात करते हुए राहुल ने कहा कि यह परंपरा रही है कि विदेश से आने वाला अतिथि विपक्ष के नेता से भी मिलता है। उन्होंने बताया कि विदेश यात्रा के दौरान भी सरकार उन्हें मिलने की अनुमति नहीं देती, जिससे आलोचना हो रही है।

    शशि थरूर की प्रतिक्रिया

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विदेशी अतिथियों से मिलने की इजाजत देना महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसा होना आवश्यक है।

  • लालू यादव की बेटी राजनीति में सक्रिय हैं या नहीं?

    लालू यादव की बेटी राजनीति में सक्रिय हैं या नहीं?

    लालू यादव परिवार में चल रहा संघर्ष

    बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद से लालू यादव के परिवार में अंतर्कलह तेज हो गई है। उनकी बेटी रोहिणी आचार्य, जो किडनी डोनेटर रह चुकी हैं, ने परिवार का साथ छोड़ दिया है। यह स्थिति तब बनी जब उन्होंने अपने जैसी बेटियों की मन्नत मांगकर परिवार के विवादों को सार्वजनिक कर दिया। इसी बीच, उनके बड़े बेटे तेज प्रताप भी पहले ही नाराजगी जता चुके हैं और एक अलग दल बना चुके हैं। ताजा खबरों के अनुसार, लालू यादव की तीन बेटियों ने भी ससुराल का रुख किया है। यह परिवार के मतभेदों से कहीं ज्यादा सत्ता के लिए चल रहे संघर्ष को दर्शाता है।

    मीसा भारती और उनके पति शैलेष

    लालू यादव की सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती, जो 49 वर्ष की हैं, वर्तमान में पाटलिपुत्र लोकसभा से सांसद हैं। उन्होंने एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है और राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। परिवार में उनकी स्थिति मजबूत है, लेकिन हाल के विवादों में वह तेजस्वी यादव से असहज महसूस कर रही हैं। उनके पति शैलेष कुमार एक कंप्यूटर इंजीनियर हैं, जो आमतौर पर चर्चा से दूर रहते हैं।

    रोहिणी आचार्य: किडनी डोनेट करने वालीं

    रोहिणी आचार्य भी एमबीबीएस की डिग्रीधारी हैं और वर्तमान में सिंगापुर में निवास करती हैं। उनकी शादी समरेश सिंह यादव से हुई है। राजनीति में उनकी भागीदारी रही है, लेकिन लोकसभा चुनाव में राजीव प्रताप रूडी के खिलाफ हार गईं। हालिया बिहार चुनाव के परिणामों के बाद, उन्होंने परिवार और राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा की है।

    चंदा यादव और उनके पति

    लालू की तीसरी बेटी चंदा यादव राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं रखतीं। उनके पति विक्रम सिंह एक पायलट हैं, जो राजनीति से बहुत दूर हैं। परिवार के विवादों में उनका नाम कम ही आता है।

    रागिनी यादव और उनके पति

    रागिनी यादव का बिहार की राजनीति से कोई संबंध नहीं है, लेकिन उनके पति राहुल यादव समाजवादी पार्टी के नेता हैं। उन्होंने सिकंद्राबाद से चुनाव भी लड़ा है। उनके पिता जितेंद्र यादव सपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन इस परिवार को जन प्रतिनिधित्व का अवसर प्राप्त नहीं हुआ।

    हेमा यादव: राजनीति से दूर

    लालू यादव की पांचवीं बेटी हेमा यादव बीटेक कर चुकी हैं और चर्चाओं से दूर रहती हैं। उनके पति विनीत यादव भी राजनीतिक गतिविधियों से अज्ञात हैं।

    अनुष्का राव का राजनीतिक परिवार

    अनुष्का यादव का विवाह हरियाणा के एक राजनीतिक परिवार में हुआ है। उनके ससुर कैप्टन अजय यादव कांग्रेस के प्रतिष्ठित नेता रहे हैं और उनके पति चिरंजीव राव की भी राजनीति में रुचि है। लेकिन यह परिवार बिहार में लालू परिवार के आंतरिक मामलों को लेकर दूर रहता है।

    राजलक्ष्मी यादव और मुलायम परिवार

    लालू यादव की सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी का विवाह मुलायम सिंह यादव के पोते तेज प्रताप यादव से हुआ है। तेज प्रताप अब मैनपुरी की करहल विधानसभा से विधायक हैं। यह संबंध यूपी के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से जुड़ा हुआ है।

  • सांसद आदित्य साहू बने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष

    सांसद आदित्य साहू बने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने आदित्य प्रसाद साहू को झारखंड प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और साहू की नियुक्ति रवींद्र राय के स्थान पर की गई है, जिन्हें विधानसभा चुनाव के दौरान कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था।

    आदित्य साहू की राजनीतिक पृष्ठभूमि

    सांसद आदित्य साहू पहले प्रदेश भाजपा में महामंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे थे। रांची के ओरमांझी क्षेत्र से ताल्लुक रखते हुए, साहू कोल्हान प्रमंडल के प्रभारी रहे हैं। उन्हें पार्टी में पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाए जाने तक, कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है। इस संबंध में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरूण सिंह द्वारा आदेश जारी किया गया है।

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का बयान

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्‌डा ने घोषणा की है कि आदित्य साहू को झारखंड भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह निर्णय राजनीति में स्थिरता बनाए रखने के लिए किया गया है।

  • सुबोधकांत हुए असहाय, राम के खिलाफ हुए रामटहल!

    सुबोधकांत हुए असहाय, राम के खिलाफ हुए रामटहल!

    गांडीव रिपोर्टर

    राँची। लोकसभा चुनाव में राजधानी राँची सीट हॉटशीट बनती जा रही है। आज गुरुवार को भाजपा के पूर्व सांसद रह चुके रामटहल चौधरी ने दिल्ली में कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अब्दुल मीर गनी ने उनको कांग्रेस का तिरंगा दुपट्टा पहना कर पार्टी में शामिल कराया, जबकि सुबोध कांत सहाय ने बुके देकर उनका स्वागत किया।

    राँची सीट से लड़ेंगे चुनाव

    कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और मंत्री आलमगीर आलम भी मौजूद थे।पार्टी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस रामटहल चौधरी को अब सुबोधकांत सहाय की जगह राँची सीट से उतारेगी।हाल तक जय श्रीराम का नारा लगाते हुए चुनावी वैतरणी पार करने वाले रामटहल इस बार राम और भाजपा के खिलाफ आग उगलेंगे।

    सुबोधकांत को दिखाया ठेंगा

    महतो वोट के लालच में कांग्रेस ने तीन बार राँची सीट से जीत हासिल कर लोकसभा पहुँचे सुबोधकांत सहाय को असहाय बना दिया। कार्यक्रम में बुके देते सुबोधकांत सहाय के चेहरे पर पार्टी द्वारा ठेंगा दिखाने की बेबसी साफ़ दिख रही थी। देखना यह है कि पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ के खिलाफ बाग़ी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे रामटहल, जो अपनी ज़मानत भी नहीं बचा पाए थे, इस बार क्या गुल खिलाते हैं।

  • ‘मरते दम तक BJP के साथ नहीं जाएंगे…’ – CM नीतीश कुमार

    ‘मरते दम तक BJP के साथ नहीं जाएंगे…’ – CM नीतीश कुमार

    नीतीश कुमार ने कहा, हमने बीजेपी को छोड़ दिया था. लेकिन वे जबरदस्ती पीछे पड़ कर साथ आए. 2020 में हम तो मुख्यमंत्री बनना नहीं चाहते थे, लेकिन इन्होंने जो किया सबने देखा. हम लोगों ने इन्हें कितनी इज्जत दी. लेकिन अब हम मरते दम तक बीजेपी केे साथ नहीं जाएंगे.

    सत्ताधारी जदयू में मचे सियासी घमासान के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा ऐलान किया. नीतीश कुमार ने कहा कि मरते दम तक बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे. नीतीश कुमार ने कहा, मुझे मर जाना कबूल है, लेकिन बीजेपी के साथ जाना नहीं.

    नीतीश कुमार ने कहा कि हम लोग अटलजी को मानने वाले लोग हैं. उन्होंने दावा किया कि हमने बीजेपी को छोड़ दिया था. लेकिन वे जबरदस्ती पीछे पड़ कर साथ आए. 2020 में हम तो मुख्यमंत्री बनना नहीं चाहते थे, लेकिन इन्होंने जो किया सबने देखा. हम लोगों ने इन्हें कितनी इज्जत दी. नीतीश कुमार ने कहा, चुनाव तो होने दीजिए इस बार, सबको पता चल जाएगा कि कितनी किसकी सीटें आती हैं.

    नीतीश कुमार का ये बयान ऐसे वक्त पर आया, जब उनकी पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा लगातार उन पर निशाना साध रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया था, जदयू के बड़े नेता बीजेपी के संपर्क में हैं. इससे पहले जब उपेंद्र कुशवाहा एम्स में भर्ती हुए थे, तब उनकी फोटो भी कुछ बीजेपी नेताओं के साथ सामने आई थी. इसके बाद कुशवाहा के बीजेपी में शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे थे. हालांकि, कुशवाहा ने कहा कि वे जदयू को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले.

    बीजेपी नीतीश के साथ नहीं करेगी समझौता- सुशील मोदी

    इससे पहले बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा था कि अब बीजेपी किसी भी कीमत पर नीतीश कुमार के साथ समझौता नहीं करेगी. सुशील कुमार मोदी ने कहा कि प्रदेश कार्यसमिति में बिहार प्रभारी विनोद तावड़े भी स्पष्ट कर चुके हैं कि नीतीश कुमार किसी भी गठबंधन के लिए अब बोझ बन चुके हैं. नीतीश में वोट ट्रांसफर कराने की क्षमता खत्म हो चुकी है. 2020 में अगर पीएम मोदी ने बिहार में प्रचार नहीं किया होता तो जेडीयू 15 सीट नहीं जीत पाती उन्होंने कहा कि नीतीश के चले जाने से बीजेपी खुश है.