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  • वरुण गांधी ने पीएम मोदी से मुलाकात की, बंगाल चुनावों को लेकर चर्चा

    वरुण गांधी ने पीएम मोदी से मुलाकात की, बंगाल चुनावों को लेकर चर्चा

    वरुण गांधी की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात: राजनीतिक हलचल

    नई दिल्ली: राजनीति में स्थिति कभी स्थिर नहीं होती और दरवाजे वही खुलते हैं, जहां शायद उम्मीद नहीं होती। गांधी परिवार के सदस्य वरुण गांधी की हाल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई चर्चा को जन्म दिया है। यह मुलाकात वरुण और उनके परिवार के साथ हुई, जिसमें वरुण ने प्रधानमंत्री की खुले दिल से प्रशंसा की।

    भाजपा में वरुण का भविष्य

    वरुण गांधी की भाजपा में आगे की भूमिका के बारे में विभिन्न अटकलें लगी हुई हैं। मोदी के नेतृत्व में भाजपा का यह संकेत साफ है कि पार्टी अपनी असहमतियों के बावजूद दरवाजे बंद नहीं करती। वरुण अब तक तीन बार सांसद रह चुके हैं और भाजपा हाइरार्की में उनकी स्थिति के बारे में चर्चा चल रही है।

    2024 तक की राजनीतिक यात्रा

    वरुण गांधी ने 2009 में पहली बार पीलीभीत से लोकसभा का चुनाव जीता। बाद में उन्होंने सुल्तानपुर को अपना निर्वाचन क्षेत्र बनाया और 2014 में वहां से भी सफलता प्राप्त की। लेकिन नए नेतृत्व से उनकी दूरियों का एहसास धीरे-धीरे होने लगा। 2019 में भाजपा ने मां-बेटे मेनका और वरुण को पुनः टिकट दिया, जिसमें सीटों का अदला-बदली भी शामिल था।

    विरोधी बयानों से असहजता

    वरुण गांधी का 2019-24 का कार्यकाल विभिन्न बयानों के कारण चर्चा में रहा। उनके विचार अक्सर पार्टी के लिए असहज स्थिति उत्पन्न करते रहे हैं। फिर भी, भाजपा नेतृत्व ने उनके बयानों को नजरअंदाज किया। नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को विपक्ष ने सकारात्मक माना।

    चुप्पी के बाद अचानक मुलाकात

    वरुण की भाजपा से दूरी के बीच कई बार उनके अगले राजनीतिक कदम के बारे में चर्चा चलती रही। 2024 के चुनावों के पहले राहुल गांधी से उनकी मुलाकात ने कई कयासों को जन्म दिया। हालांकि, टिकट कटने के बाद वरुण आमतौर पर चुप्पी साधे रहे।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात का महत्व

    हाल की प्रधानमंत्री मोदी से वरुण की मुलाकात ने सबको चौंका दिया। वरुण ने इसे ‘विशेष’ बताते हुए लिखा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है। उनके शब्दों में मोदी के प्रति सम्मान और विश्वास को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

    राजनीतिक संदर्भ

    इस मुलाकात की समयावधि और संदर्भ अपने आप में महत्वपूर्ण है। वरुण की लंबे समय से पार्टी से दूरी और चुनावों से पहले की यह मुलाकात, इसे साधारण शिष्टाचार नहीं माना जा सकता। यदि भाजपा पश्चिम बंगाल और असम चुनावों के दौरान वरुण को सक्रिय करती है, तो यह संकेत होगा कि उनकी पार्टी में वापसी की संभावनाएं बन रही हैं।

  • राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर के जरिए जवाब दिया

    राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर के जरिए जवाब दिया

    सियासत में गरما गरम बहस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रोटोकॉल उल्लंघन

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति का “अपमान” करने का आरोप लगाया है। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीरें दिखाकर पलटवार किया।

    तस्वीरों के जरिए पलटवार

    ममता बनर्जी ने कोलकाता में धरने के दौरान एक तस्वीर प्रस्तुत की, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति खड़ी हैं। उन्होंने इसे प्रोटोकॉल के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि उनका ऐसा करना हमारे संस्कारों में नहीं है।

    अपमान की संस्कृति पर टिप्पणी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तस्वीर से यह स्पष्ट है कि भाजपा एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देती है, जिसमें राष्ट्रपति का अपमान किया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राष्ट्रपति और भारतीय संविधान का पूरा सम्मान करती है, और राज्य सरकार को इसमें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति की नाराजगी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को बागडोगरा एयरपोर्ट पर पहुंची थीं, जहां उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेना था। बताया जा रहा है कि वहां मुख्यमंत्री या राज्य के किसी मंत्री का न होना राष्ट्रपति को परेशान कर गया था। उन्होंने कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया।

    राज्य सरकार की सफाई

    ममता बनर्जी ने इस विवाद को लेकर कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि निजी आयोजकों ने भी उचित समन्वय नहीं किया था। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर अव्यवस्था के लिए आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराया।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक महिला आदिवासी नेता और देश की राष्ट्रपति का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की नागरिकों की जागरूकता इस घटना को कभी नहीं भूलेगी। यह बयान मोदी ने दिल्ली में दिल्ली मेट्रो के नए कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद दिया।

    इस पूरे विवाद के चलते केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और भी बढ़ गया है।

  • कांग्रेस ने मोदी की इजरायल यात्रा पर निशाना साधा, नेटन्याहू से मुलाकात को “आव जातिक प्रश्नों से जुड़ी” बताया

    कांग्रेस ने मोदी की इजरायल यात्रा पर निशाना साधा, नेटन्याहू से मुलाकात को “आव जातिक प्रश्नों से जुड़ी” बताया

    कांग्रेस का इजरायल यात्रा पर कड़ा रुख

    नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा पर केंद्र सरकार को कठोर आलोचना का निशाना बनाया है। पार्टी का कहना है कि जिस समय इजरायली नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उस समय प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई नैतिक मुद्दों को जन्म देती है। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रस्तावित मुलाकात पर भी असहमति जताते हुए गाजा की स्थिति पर एक स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।

    जयराम रमेश का स्थिर रुख

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भारत के पूर्व की नीति पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि भारत का रुख हमेशा फिलिस्तीनी मुद्दे पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रहा है, लेकिन वर्तमान में यह परंपरा से भिन्न प्रतीत हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में हो रहे मानवता के संकट और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार जैसे विषयों पर भारत को और अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए।

    रमेश ने भारत के ऐतिहासिक दायित्व की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1960 के गाजा दौरे और बाद में फिलिस्तीन के समर्थन में लिए गए निर्णयों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता दी, जिससे वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र नीति पेश की गई।

    प्रियंका गांधी का गाजा मुद्दा उठाने का आग्रह

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री से उम्मीद जताई कि वे अपनी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट में गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति का जिक्र करेंगे और निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय की प्रतिबद्धता व्यक्त करेंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक दायित्व है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, न्याय और मानवता के मूल्यों की रक्षा करता रहे।

    सरकार का ध्यान: द्विपक्षीय सहयोग पर

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और इजरायल के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। 2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।

    राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का टकराव

    इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत की पश्चिम एशिया नीति पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक पक्ष रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है, जबकि दूसरे पक्ष की मांग है कि मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण का भी ध्यान रखा जाए।

  • भोपाल में खड़क के नेतृत्व में मोदी की ट्रंप के सामने बिनती

    भोपाल में खड़क के नेतृत्व में मोदी की ट्रंप के सामने बिनती

    कांग्रेस की किसान महाचौपाल: मोदी सरकार पर तीखा हमला

    भोपाल। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भोपाल में आयोजित किसान महाचौपाल के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ सरकार की नीतियों की आलोचना की। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए उन्हें एक तानाशाही प्रवृत्ति वाला नेता बताया। खरगे ने कहा कि उनके राजनीतिक करियर के दौरान ऐसा प्रधानमंत्री उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है और विपक्ष की आवाज को दमन कर रही है।

    प्रधानमंत्री पर कटाक्ष

    खरगे ने प्रधानमंत्री की योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने की आदत का मजाक उड़ाते हुए तंज किया कि मोदीजी को अपना नाम भी बदल लेना चाहिए, क्योंकि वे कांग्रेस के राज में ही जन्मे थे। यह टिप्पणी उन्होंने इस संदर्भ में की थी कि मोदी सरकार केवल नाम बदलने में ही लगी हुई है।

    किसानों के नुकसान का आरोप

    कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों को नुकसान होगा और उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाएगा। खरगे ने कहा कि पहले भारत को व्यापार में लाभ होता था, लेकिन मौजूदा नीतियों की वजह से किसानों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अन्य देश अपने किसानों के संरक्षण के लिए मजबूती से खड़े हैं, जबकि भारतीय सरकार सही तरीके से बात नहीं कर रही है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति का जिक्र

    खरगे ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हर मुद्दे पर उनकी बात मानने के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में केंद्र सरकार पर झुकाव का आरोप लगाया, खासकर तेल की खरीद और व्यापार नीतियों के संदर्भ में।

    ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल

    उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच कार्रवाई रुकवाई। खरगे ने इस निर्णय को अंतरराष्ट्रीय दबाव में लिया गया बताया और इसे एक बड़ी गलती माना। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी प्रश्न पूछने से बचते हैं और जनता से दूरी बनाए रखते हैं।

    संघर्ष का आह्वान

    कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि उन्हें डरने के बजाय संघर्ष करने की जरूरत है। उन्होंने संविधान और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रखने का संदेश दिया। खरगे ने बताया कि अमेरिका में कृषि पर केवल 3 प्रतिशत लोग निर्भर हैं, जबकि भारत में यह संख्या अधिक है। ऐसे में किसानों के हितों का संरक्षण करना बेहद आवश्यक है। इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मुद्दे पर एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान चलाने की योजना बना रही है।

  • भारत के खिलाफ T20 वर्ल्ड कप मैच से हटे पाकिस्तान, पीएम शहबाज शरीफ का ऐलान

    भारत के खिलाफ T20 वर्ल्ड कप मैच से हटे पाकिस्तान, पीएम शहबाज शरीफ का ऐलान

    पीएम शहबाज शरीफ का भारत के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच नहीं खेलने का निर्णय

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चार फरवरी को घोषणा की कि उनकी क्रिकेट टीम 2026 के आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ ग्रुप मैच नहीं खेली जाएगी। यह हाई-वोल्टेज मुकाबला 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाला था। कैबिनेट बैठक में इस विषय पर चर्चा के दौरान शहबाज शरीफ ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर एक दृढ़ रुख अपनाएगा।

    टी20 वर्ल्ड कप के संबंध में निर्णय

    शहबाज शरीफ ने कहा, “हमने आगामी टी20 वर्ल्ड कप के बारे में सोच-समझकर निर्णय लिया है कि हम भारत के खिलाफ खेल नहीं खेलेंगे। खेल के मैदान को राजनीति का स्थान नहीं होना चाहिए। हम बांग्लादेश के साथ खड़े हैं, और यह निर्णय उचित है।” उनके इस बयान के पीछे घटनाक्रम ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने के बारे में कोई औपचारिक सूचना नहीं दी है।

    पीसीबी की स्थिति

    सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस स्थिति पर ICC को कोई आधिकारिक सूचना नहीं भेज रहा है। यदि पीसीबी औपचारिक रूप से ICC को सूचित नहीं करता है, तो भारत-पाकिस्तान मैच का शेड्यूल बना रह सकता है, जिससे इस मुद्दे पर अनिश्चितता बनी रहेगी। बताया जा रहा है कि ICC अब पाकिस्तान की ओर से एक आधिकारिक पत्र का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    भारत की तैयारी

    भारतीय क्रिकेट टीम 15 फरवरी को कोलंबो पहुंचने वाली है। कप्तान सूर्यकुमार यादव मैच की पूर्व संध्या पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लेंगे और टॉस के लिए मैदान पर उपस्थित होंगे। यदि पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा टॉस में शामिल नहीं होते हैं, तो मैच रेफरी भारत को वॉकओवर देकर दो अंक प्रदान करेगा। लेकिन अगर दोनों टीमें कोलंबो नहीं आतीं, तो हर टीम को एक-एक अंक मिलेगा।

  • प्रधानमंत्री मोदी का इंडिगो संकट पर विस्तृत वक्तव्य, नियम पर जानकारी साझा

    प्रधानमंत्री मोदी का इंडिगो संकट पर विस्तृत वक्तव्य, नियम पर जानकारी साझा

    इंडिगो एयरलाइंस संकट: सफर में परेशानियों का सिलसिला जारी

    नई दिल्ली। देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो की उड़ानों में यात्रियों को हो रही समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। आठवे दिन भी संकट जारी है, जबकि एयरलाइन अपने शेड्यूल को स्थिर करने की कोशिश में लगी हुई है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए, सरकार भी एक्शन में आ गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दिशा-निर्देश दिए हैं कि वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही प्रमुख एयरपोर्ट्स का संपत्ति निरीक्षण करें। ये अधिकारी मुंबई, ब Bengaluru, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे, गुवाहाटी, गोवा और तिरुवनंतपुरम जैसे एयरपोर्ट्स का दौरा करेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी का इंडिगो संकट पर महत्वपूर्ण बयान

    इंडिगो की समस्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि नियम और कानून लोगों को परेशान करने के लिए नहीं होते, बल्कि सिस्टम को मजबूत करने के लिए होते हैं। उनकी यह टिप्पणी इस संकट पर ध्यान केंद्रित करती है।

    दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स की बड़ी संख्या में रद्दीकरण

    दिल्ली एयरपोर्ट पर इंडिगो की उड़ानों का रद्दीकरण जारी है। आज ही, इंडिगो की 76 आने वाली और 76 जाने वाली फ्लाइट्स रद्द हुई हैं, जिससे कुल रद्द की गई फ्लाइट्स की संख्या 152 हो गई है। यह स्थिति यात्रियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    संसद में उठेगा इंडिगो संकट का मामला

    इंडिगो की फ्लाइट में देरी और रद्दीकरण से उत्पन्न स्थिति अब संसद तक पहुंच गई है। सिविल एविएशन मिनिस्टर राम मोहन नायडू 9 दिसंबर मंगलवार को दोपहर 12 बजे लोकसभा में इस मसले पर बयान देंगे। इससे पहले, उन्होंने राज्यसभा में कहा कि संकट का कारण तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि क्रू रोस्टरिंग और ऑपरेशनल प्लानिंग की कमियां हैं।

    इंडिगो की प्रमुखता और उसके रूट्स की स्थिति

    इंडिगो एयरलाइंस का भारतीय एविएशन सेक्टर में दबदबा स्पष्ट है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में उड़ान भरने वाले हर 10 यात्रियों में से लगभग 6 इंडिगो के माध्यम से यात्रा करते हैं। देश के 1,200 घरेलू रूट्स में से 950 से अधिक पर इंडिगो की उड़ानें हैं, और लगभग 600 रूट्स (60% से अधिक) पर केवल इंडिगो ही एकमात्र एयरलाइन है।

    इंडिगो फ्लाइट्स में संभावित कटौती

    समाचार के अनुसार, इंडिगो की उड़ानों में पहले चरण में 5% की कटौती की योजना बनाई जा रही है, जिसका मतलब है कि रोजाना लगभग 110 उड़ानें कम हो सकती हैं। यदि परिस्थितियां ठीक नहीं होतीं, तो भविष्य में 5% अतिरिक्त कटौती भी हो सकती है।

  • वंदे मातरम पर संसद में आज चर्चा, पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन

    वंदे मातरम पर संसद में आज चर्चा, पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन

    संसद में ‘वंदे मातरम’ पर विशेष चर्चा शुरू

    नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र जारी है, और आज (08 दिसंबर) को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर विशेष चर्चा का आयोजन किया जाएगा। इस बहस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में करेंगे, जबकि राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह इस पर चर्चा की शुरुआत करेंगे। इस चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।

    लोकसभा में 150 वर्ष पुरानी गीत पर चर्चा

    आज लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा होगी, जो 150 वर्ष पूर्व लिखी गई है। इस ऐतिहासिक गीत के महत्व पर चर्चा का आगाज़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 12 बजे करेंगे। विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई समेत आठ सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा, और चर्चा का समापन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उद्धबोधन से होगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 7 नवंबर को इस राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ मनाई थी।

    विभाजन का आरोप

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालही में कहा कि 1937 में वंदे मातरम के टुकड़े किए गए थे, जिससे विभाजन की सोच का बीज बोया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्र-निर्माण के इस महत्वपूर्ण गीत के साथ ऐसा अन्याय क्यों हुआ। उन्होंने माना कि यह सोच आज की पीढ़ी के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।

    इमाम एसोसिएशन का बयान

    संसद में बहस शुरू होने से पहले ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने टिप्पणी की है कि मुस्लिम समुदाय को राष्ट्रगीत से कोई घृणा नहीं है। उनकी आपत्ति धार्मिक मान्यताओं और गीत के अगले हिस्से में मूर्ति पूजा के भाव को लेकर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत की शुरुआती दो पंक्तियों को गाने में किसी मुसलमान को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

    गीत का ऐतिहासिक संदर्भ

    सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम का पहला प्रकाशन 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में हुआ। 1882 में यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा बना। बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया और यह स्वतंत्रता सेनानियों के लिए आजादी की लड़ाई में प्रेरणा का स्रोत बना। भारत सरकार ने 24 जनवरी, 1950 को वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया।

  • सपा सांसद आवेदेश प्रसाद ने राम मंदिर ध्वजरोहण पर कहा: “अगर बुलाया गया, तो काम छोड़कर नंगे पांव जाऊंगा”

    सपा सांसद आवेदेश प्रसाद ने राम मंदिर ध्वजरोहण पर कहा: “अगर बुलाया गया, तो काम छोड़कर नंगे पांव जाऊंगा”

    अयोध्या में भव्य राम मंदिर ध्वजारोहण की तैयारियाँ

    नई दिल्ली। रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक समारोह का साक्षी बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को अयोध्या में आकर राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराकर ध्वजारोहण समारोह का उद्घाटन करेंगे। इस समारोह के साथ-साथ अयोध्या में राजनीतिक चर्चाएँ भी तेज हो गई हैं।

    सपा सांसद की प्रतिक्रिया

    दो दिन पूर्व, सत्य सनातन धर्म प्रचारक दिवाकराचार्य महाराज ने समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में, सांसद ने कहा कि उन्हें अभी तक ध्वजारोहण समारोह का न्योता प्राप्त नहीं हुआ है। यदि ऐसा न्योता मिलता है, तो वे नंगे पैर ही वहाँ पहुँचेंगे।

    धार्मिक मान्यता का उल्लेख

    एक निजी चैनल से बातचीत में, अवधेश प्रसाद ने कहा कि तुलसीदास जी के अनुसार, राम राज की मान्यताओं को भाजपा सरकार ने बिगाड़ दिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संतों की परंपरा और धार्मिक कार्यक्रमों में उनके विचार को महत्व दिया जाना चाहिए।

    भाजपा के प्रतिक्रिया

    उधर, इटावा से सपा सांसद जितेंद्र दोहरे ने कार्यक्रम को राजनीति से अलग रखने की बात की और सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री का राम मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में जाना किस रूप में उचित है। भाजपा के प्रवक्ता एसएन सिंह ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सपा नेताओं को अयोध्या की भव्यता से समस्या है और वे बेबुनियाद ब्यान दे रहे हैं।

    तैयारियों पर स्थानीय सांसद की नजर

    अवधेश प्रसाद ने यह भी दावा किया है कि अयोध्या का नागरिक और स्थानीय सांसद होने के नाते वे कार्यक्रम की तैयारियों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश और देश भर के सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। अपने कर्तव्यों को निभाने के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी उन्होंने स्वीकार किया।

    धार्मिक आस्था की बात

    सांसद ने कहा कि वे बहुत खुश हैं और उन्हें प्रभु श्रीराम, हनुमान जी, मां सीता और सरयू मां की कृपा का अनुभव होता है। अपने छात्र जीवन के दौरान उन्होंने सीता रसोई का दर्शन भी किया था, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा है।