सीजफायर पर पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पोस्ट की प्रामाणिकता पर उठा विवाद
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बीजेपी विधायक ने अपनी सरकार पर सवाल उठाए, मंत्रियों के उत्तर गलत हो रहे हैं
बीजेपी विधायकों के बीच विवाद: किसानों की भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपनी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ग्वालियर जिले के राजमाता विजयराधे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं के मुद्दे को उठाया और तत्काल जांच की मांग करते हुए भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने का अनुरोध किया।
कृषि मंत्री का स्पष्टीकरण
कुशवाहा के सवालों पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि विज्ञापन जारी कर साक्षात्कार किए गए हैं और बैठकों में भी किसी प्रकार की आपत्ति नहीं उठाई गई। सभी कागजात उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं और मामला विचाराधीन है।
भर्तियों का समय
कुशवाहा ने यह भी सवाल उठाया कि चार साल बाद भर्ती क्यों की जा रही है और शासन से अनुमति क्यों नहीं ली गई। उन्होंने कहा, “मैं इस समिति का सदस्य हूं, हमें इस मामले में क्यों फंसाया जा रहा है? यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है?” उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन विधानसभा के सदस्यों ने इस पर आपत्ति की थी।
भर्ती प्रक्रिया का विरोध
कृषि मंत्री कंसाना ने बताया कि भर्तियाँ नियमों के अनुसार हुई हैं। परंतु कुशवाहा ने इन दावों पर किरकिरी की और कहा कि 2022 में भर्ती होनी थी, जबकि अब 2026 में यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्होंने कृषि मंत्री पर सही उत्तर न देने का आरोप लगाया और कहा कि लीपापोती की जा रही है।
महात्मा गांधी पर टिप्पणी और हंगामा
वहीं, अमरपाटन से कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने महात्मा गांधी पर एक बार फिर से हमले का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने राम को विवाद में घुसेड़ दिया है। इस पर बीजेपी के विधायक सीताशरण शर्मा ने आपत्ति जताई और कहा कि बात करते समय तमीज बनाए रखें और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग न करें। इस विषय पर हंगामा हुआ और विलोपित करने की मांग की गई।
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कamal Haasan ने Jana Nayagan कानूनी विवाद में प्रमाणन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कमल हासन ने सेंसरशिप पर उठाए गंभीर सवाल
डेस्क। अभिनेता विजय की नवीनतम फिल्म ‘जन नायकन’ कानूनी समस्याओं में उलझ गई है, जिसके कारण इसकी रिलीज की तारीख टल गई है। फिल्म को 09 जनवरी को प्रदर्शित किया जाना था, लेकिन सेंसर सार्टिफिकेट की बाधाओं के चलते यह संभव नहीं हो सका। अब इस मामले की सुनवाई पोंगल की छुट्टियों के बाद 21 जनवरी को होने वाली है। इस बीच, कमल हासन ने आज सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया पर मचाई हलचल
कमल हासन ने एक्स प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत के संविधान का संदर्भ देते हुए कलाकारों के अधिकारों की बात की। उन्होंने सीधे किसी फिल्म का नाम न लेते हुए अपनी चिंताओं को व्यक्त किया। उनके इस बयान का वक्त विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ‘जन नायकन’ की रिलीज संकट में है। उन्होंने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से जुड़ी मौजूदा समस्याओं की पृष्ठभूमि में यह बयान दिया है।
अभिव्यक्ति की आजादी पर जोर
कमल हासन ने अपने विचार में कहा है कि, “भारत का संविधान तर्क के आधार पर अभिव्यक्ति की आजादी की गारंटी देता है, जिसका किसी भी रूप में हनन नहीं होना चाहिए। यह केवल एक फिल्म की बात नहीं है, बल्कि यह उस स्थान की बात है, जो हम एक संवैधानिक लोकतंत्र में कला और कलाकारों को देते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण केवल एक व्यक्ति की मेहनत नहीं है, बल्कि यह अनेक लेखकों, तकनीशियनों और कलाकारों की सामूहिक कोशिश का परिणाम है।
सेंसरशिप के दुष्प्रभाव
कमल हासन ने आगे बताया कि कैसे सेंसरशिप प्रक्रिया क्रिएटिविटी को सीमित कर सकती है और इससे उद्योग में व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। उन्होंने कहा, “जब स्पष्टता की कमी होती है, तब क्रिएटिविटी सीमित हो जाती है और आर्थिक गतिविधियां रुक जाती हैं।” उन्होंने तमिलनाडु और भारत के सिनेमा प्रेमियों की समझ, जुनून और परिपक्वता का जिक्र करते हुए कहा कि वे खुलेपन और सम्मान के पात्र हैं।
संविधानिक मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता
कमल हासन ने फिल्म इंडस्ट्री से एकजुट होने का आह्वान किया, जिससे सार्थक और रचनात्मक संवाद किया जा सके। उन्होंने जोर दिया कि यह परिवर्तन क्रिएटिव आजादी की रक्षा करेगा और भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करेगा। बता दें कि ‘जन नायकन’ के निर्माता वेंकट नारायण ने भी फिल्म की रिलीज में हो रही देरी के विवाद में एक वीडियो संदेश में कानूनी लड़ाई का जिक्र किया है।
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कांग्रेस नेता ने मोदी से दिल्ली धमाकों पर सवाल किया, कहा शिक्षित युवा क्यों बन रहे आतंकवादी
दिल्ली में लाल किले के पास बम धमाके की जांच में नई जानकारी
नई दिल्ली। दिल्ली में लाल किले के समीप हाल ही में हुए बम धमाके से संबंधित कुछ चिकित्सकों की संलिप्तता के बारे में जानकारी सामने आई है, जिससे कई प्रश्न उठने लगे हैं। इस घटना के चलते अल फलाह विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द कर दी गई है। इस संदर्भ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने उन चिकित्सकों का बचाव करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से कई सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि ‘वो पढ़ा-लिखा युवक जिसने एमबीबीएस और एमडी की डिग्री ली है, वह आतंकवाद का मार्ग क्यों चुन रहा है? उसे अपने परिवार के साथ आराम से जीने का अवसर है।’
राशिद अल्वी का सवाल
राशिद अल्वी ने स्पष्ट किया कि किन परिस्थितियों ने डॉक्टरों को इस रास्ते पर चलने पर मजबूर किया? उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करें।
जांच प्रक्रिया और एसआईटी का गठन
दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार विस्फोट और ‘सफेदपोश’ आतंकवादी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के संबंध में विभिन्न एजेंसियां जांच कर रही हैं। इस मामले में फरीदाबाद पुलिस ने अल फलाह विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। कई चिकित्सकों को गिरफ्तार किया गया है जो इस घटना से जुड़े हुए हैं।
पुलिस की हिरासत में संदिग्ध
जांच एजेंसियों ने एक कैब चालक, एक धर्मगुरु और एक उर्दू शिक्षक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। एसआईटी में दो सहायक पुलिस आयुक्त, एक निरीक्षक और दो उप निरीक्षक शामिल हैं, जो विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की है कि यह एसआईटी तब गठित की गई जब पुलिस महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने मंगलवार को अल फलाह विश्वविद्यालय का दौरा किया था।
आतंकवादी संगठन के संबंध
जांच के दायरे के विस्तार के साथ, दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा को इंडियन मुजाहिदीन के भगोड़े आतंकवादी मिर्जा शादाब बेग से जुड़ी नई जानकारी मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, बेग 2007 में अल फलाह विश्वविद्यालय का छात्र था, जब यह कॉलेज के तौर पर कार्यरत था। 2014 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया था।
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बिग बॉस 19 में मर्दानगी पर सवालों से बढ़ी गर्मी
📌 गांडीव लाइव डेस्क:
बिग बॉस-19 में बढ़ते तनाव के बीच कैप्टन और सदस्य के बीच झगड़ा 🔥
मुंबई। जैसे-जैसे बिग बॉस-19 का सफर आगे बढ़ रहा है, घर में रिश्तों की जटिलता बढ़ती जा रही है। हाल के एपिसोड में कैप्टन अभिषेक बजाज और सदस्य बसीर अली के बीच एक गंभीर विवाद देखने को मिला। अभिषेक ने बसीर की मर्दानगी पर सवाल उठाए, जिससे बसीर का मूड बिगड़ गया और दोनों के बीच बड़ा विवाद हो गया।
झगड़े की शुरुआत कैसे हुई? 🧐
बसीर अली ने घर की साफ-सफाई को लेकर चिंता जताई, जो कि झगड़े की वजह बनी। उन्होंने अभिषेक को इस बात के लिए आरोपित किया कि वह बतौर कैप्टन अपने कर्तव्यों को ठीक से नहीं निभा रहे हैं। बसीर ने गंदे बाथरूम और गंदगी से भरे ड्रेसिंग रूम का उदाहरण देते हुए अभिषेक की लीडरशिप पर सवाल उठाए। उन्होंने सहयोगियों को गंदगी दिखाते हुए अभिषेक को “फ्लॉप कैप्टन” कहकर संबोधित किया।
अभिषेक ने अपनी गलती मानने से किया इनकार ❌
हालांकि, अभिषेक ने अपनी गलती स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि कमरे सही हैं। इस स्थिति ने विवाद को और बढ़ा दिया। अभिषेक ने बसीर को “लचक” कहकर बुलाया, जिससे बहस और भी गर्म हो गई। बसीर ने पलटवार करते हुए पूछा, “क्या तुम मेरी मर्दानगी पर सवाल उठा रहे हो?” और दोनों के बीच हाथापाई की स्थिति उत्पन्न हो गई।
विवाद ने बढ़ाई घर में गर्मी 💥
अभिषेक और बसीर के बीच लगातार ताने और गालियाँ दी जाने लगीं। बसीर ने अभिषेक को “दोमुंहा इंसान” कहा, जबकि अभिषेक ने बसीर को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
यह विवाद बिग बॉस-19 के सबसे चर्चित झगड़ों में से एक बन गया है, और दर्शकों का ध्यान इससे हटने वाला नहीं है। आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा।
