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  • हजारीबाग राम नवमी: संसद से विदेशों तक पहचान बना चुका है यह ऐतिहासिक जुलूस

    हजारीबाग राम नवमी: संसद से विदेशों तक पहचान बना चुका है यह ऐतिहासिक जुलूस

    हजारीबाग। झारखंड राज्य के हजारीबाग में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक रामनवमी जुलूस अब केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं रह गया है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गर्व का एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है। इस परंपरा की शुरुआत 1918 में हुई थी, जब गुरु सहाय ठाकुर ने अपने पांच साथियों के साथ इसका आयोजन किया था।

    समय के साथ, यह छोटा सा आयोजन एक विशाल जन आंदोलन में परिवर्तित हो गया है। इसके अनुशासन और भव्यता ने इसे देश-विदेश में एक विशेष पहचान दिलाई है। इस जुलूस की चर्चा भारत की संसद तक हो चुकी है, जो इसकी महत्ता को स्पष्ट करती है। कई विदेशी मेहमान भी इस जुलूस में हिस्सा ले चुके हैं।

    1970 में ताशा पार्टी का शामिल होना

    यह जुलूस स्वतंत्रता से पहले शुरू हुआ और 1947 के बाद इसका स्वरूप बदल गया। इसे राम जन्मोत्सव के साथ विजय उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। 1960 में महासमिति का गठन किया गया, जिसने इस आयोजन को व्यवस्थित और विस्तारित किया। 1970 में पहली बार ताशा पार्टी को इस जुलूस में शामिल किया गया, जो अब इस आयोजन की एक प्रमुख पहचान बन चुकी है। कोलकाता और पश्चिम बंगाल से ताशा वादक इसमें भाग लेने आते हैं।

    150 से अधिक अखाड़ों की भागीदारी

    इस भव्य आयोजन में वर्तमान में 150 से अधिक अखाड़े भाग लेते हैं, जिनमें लगभग 100 अखाड़े हजारीबाग शहर से होते हैं। जुलूस लगभग 10 किलोमीटर लंबे मार्ग पर—झंडा चौक, बड़ा अखाड़ा, महावीर स्थान, ग्वाल टोली होते हुए जामा मस्जिद रोड तक निकलता है।

    इस परंपरा की एक विशेषता यह है कि जबकि देशभर में रामनवमी का जुलूस नवमी को होता है, हजारीबाग में इसे दशमी को मनाया जाता है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में 4 से 5 लाख श्रद्धालु शामिल होते हैं।

    लगभग 48 घंटे तक चलने वाला यह जुलूस ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से पूरे शहर को भक्तिमय माहौल में डुबो देता है। युवा पारंपरिक हथियारों और लाठी-डंडों के साथ करतब और शक्ति प्रदर्शन करते हैं, जो इस ऐतिहासिक जुलूस की विशिष्ट पहचान बन चुका है।

  • धनबाद में रामनवमी का विशेष उत्सव, 10 टन लड्डुओं का भोग और भव्य शोभायात्रा

    धनबाद में रामनवमी का विशेष उत्सव, 10 टन लड्डुओं का भोग और भव्य शोभायात्रा

    मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

    धनबाद शहर के विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की कतारें देखी गईं। महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी भगवान के दर्शन के लिए आए। कई भक्त व्रत रखते हुए पूजा-अर्चना कर रहे हैं और रामचरितमानस का पाठ भी कर रहे हैं।

    भव्य जुलूस का आयोजन

    रामनवमी के अवसर पर शाम के समय शहर के विभिन्न अखाड़ों की ओर से भव्य जुलूस निकाला जाएगा। स्टेशन रोड स्थित मंदिर के पास, अखाड़े में शामिल रामभक्त पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन करेंगे, जो हर साल की तरह इस बार भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके अलावा, हीरापुर क्षेत्र में भी एक विशाल जुलूस का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

    त्योहार को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख स्थलों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और संवेदनशील स्थानों पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जा सके।

    लड्डुओं की भारी मांग

    रामनवमी के अवसर पर भगवान को भोग अर्पित करने के लिए इस बार शहर में लड्डुओं की भारी मांग देखी जा रही है। कारोबारियों के अनुसार, मंदिरों और घरों में मिलाकर लगभग 10 टन लड्डू चढ़ाए जाने की उम्मीद है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मिठाई की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है। कारीगरों ने बूंदी, मही दाना, बेसन और शुद्ध घी के लड्डू तैयार किए हैं।

    सरायढेला के वीर शर्मा और मनईटांड के दीपक कुमार को दो से दस किलो तक के ऑर्डर मिले हैं, जबकि हीरापुर के अनूप कुमार पाल को लगभग चार क्विंटल लड्डू का ऑर्डर प्राप्त हुआ है। बाजार में बूंदी लड्डू की कीमत 120 से 140 रुपये, मही दाना के लड्डू 140 से 160 रुपये और घी के लड्डू 300 से 500 रुपये प्रति किलो तक है।

    भगवान राम के जन्मोत्सव का पर्व

    रामनवमी हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि त्रेतायुग में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, पूजा करते हैं और जगह-जगह शोभायात्रा एवं झांकियां निकाली जाती हैं। यह पर्व धर्म, सत्य और मर्यादा के पालन का संदेश देता है।

    भक्तिमय माहौल का संचार

    पूरे धनबाद शहर में रामनवमी को लेकर विशेष उत्साह का माहौल है। हर गली-मोहल्ले में ‘जय श्री राम’ के जयकारे गूंज रहे हैं। लोग पूरे जोश और श्रद्धा के साथ इस पर्व को मनाने में लगे हुए हैं, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।