कपिल सिब्बल ने संसद की प्रासंगिकता पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने हाल ही में एक बयान में कहा कि संसद की प्रासंगिकता धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि सत्ता में बैठे लोग केवल उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो वर्तमान समय में प्रासंगिक नहीं हैं। सिब्बल ने चेतावनी दी कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है क्योंकि अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है।
कम होती संसद की बैठकें
सिब्बल ने कहा, “हमारी संसद की प्रासंगिकता धीरे-धीरे घट रही है। अब बैठकें कम होती हैं और आम जनता इस धारणा में है कि संसद में कुछ नहीं होता।” उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल के शीतकालीन सत्र के दौरान केवल 15 बैठकें आयोजित की गईं।
संसद की स्थिति पर चिंता
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “जब हम पहले संसद में थे, तब शीतकालीन सत्र 20 नवंबर को शुरू होता था। लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। उदाहरण के लिए, 2017 में 13 बैठकें हुईं, 2022 में भी 13 और 2023 में 14 बैठकें हुईं। यदि ऐसी स्थिति बनी रही, तो जरूरी चर्चाएं नहीं हो सकेंगी। यह महसूस होता है कि सत्ता में बैठे लोग संसद को लेकर गंभीर नहीं हैं।”
विपक्ष की चिंताएँ
सिब्बल ने यह भी उल्लेख किया कि विपक्ष 1 दिसंबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा चाहता है, जिसे वह देश का एक महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं। हालाँकि, सरकार ने यह शर्त रखी है कि पहले वंदे मातरम् पर चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, यह संसद की प्रासंगिकता की गिरावट का एक और उदाहरण है।
