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  • मुंबई में 44 वर्षों बाद भाजपा की नेता रितु तावड़े बिन मुकाबला निर्वाचित होने के लिए तैयार

    मुंबई में 44 वर्षों बाद भाजपा की नेता रितु तावड़े बिन मुकाबला निर्वाचित होने के लिए तैयार

    मुंबई में भारतीय जनता पार्टी का महापौर बनने का कदम

    मुंबई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुंबई में अपना पहला महापौर चुनने की प्रक्रिया में है, जिससे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में ठाकरे परिवार का 25 साल का वर्चस्व समाप्त होने की संभावना है। भाजपा की पार्षद रितु तावड़े ने महापौर पद के लिए अपना नामांकन शनिवार को दाखिल किया। उनके खिलाफ किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन नहीं कराया, जिससे उनका निर्विरोध चुना जाना तय सा प्रतीत हो रहा है।

    सहयोगी पार्टियों का सहयोग

    भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना (शिंदे गुट) ने संजय घाडी को उपमहापौर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। तावड़े और घाडी ने मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, भाजपा मुंबई के अध्यक्ष अमित साटम, पूर्व शिवसेना सांसद राहुल शेवाले सहित कई नेताओं की उपस्थिति में महानगरपालिका सचिवालय में नामांकन भरा।

    औपचारिक प्रक्रिया की तारीख

    बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नामांकन की समय सीमा समाप्त होने तक केवल रितु तावड़े और संजय घाडी का ही नामांकन प्राप्त हुआ है। विपक्षी दलों ने कोई नामांकन नहीं किया है, लेकिन तय प्रक्रिया के अनुसार 11 फरवरी को चुनावी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

    उपमहापौर का कार्यकाल

    शिवसेना के सचिव संजय मोरे ने बताया कि वार्ड नंबर 5 के पार्षद संजय घाडी 15 महीनों के लिए उपमहापौर के रूप में कार्य करेंगे। घाडी पहले शिवसेना (उबाठा) के वरिष्ठ पार्षद रहे हैं और हाल ही में एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए हैं। शिवसेना उपमहापौर का कार्यकाल बांटकर अन्य पार्षदों को भी मौका देना चाहती है।

    रितु तावड़े का राजनीतिक सफर

    रितु तावड़े ने वर्ष 2012 में भाजपा का दामन थामा और उसी साल पार्षद बनीं। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा समिति की अध्यक्षता की और शिक्षा, बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सक्रियता दिखाई। घाटकोपर पूर्व (वार्ड 132) से दो बार पार्षद रह चुकीं तावड़े ने दुकानों में पुतलों के माध्यम से आपत्तिजनक कपड़ों के मुद्दे को उठाकर भी ध्यान आकर्षित किया।

    भाजपा का महत्वाकांक्षी दावा

    भाजपा मुंबई के अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि 44 वर्षों के अंतराल के बाद मुंबई को भाजपा का महापौर मिलने जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि महायुति बीएमसी को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का काम करेगी। साटम ने बताया कि उनके पास 118 पार्षदों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े 114 से ज्यादा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महायुति ने यह सुनिश्चित किया है कि मुंबई को मराठी और हिंदू महापौर मिलेगा।

    बीएमसी में सत्ता संतुलन में बदलाव

    1997 से बीएमसी पर शासन कर रही शिवसेना (उबाठा) को इस बार 65 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) ने 29 सीटें प्राप्त की। कांग्रेस को 24, एआईएमआईएम को 8, मनसे को 6, राकांपा (अजित पवार गुट) को 3 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिलीं। इसके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में सफल रहे।

    महत्वपूर्ण है कि बीएमसी का पूर्व कार्यकाल समाप्त होने के बाद से 7 मार्च 2022 से प्रशासक शासन लागू है। देश के सबसे समृद्ध नगर निकायों में एक बीएमसी का 2025-26 का बजट 74,450 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो कई राज्यों के बजट से भी अधिक है।