मुंबई: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा चड्ढा और कुछ मीडिया संस्थानों को सोशल मीडिया पर बिना जांच किए आरोप फैलाने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने इसे ‘डिजिटल वॉचिलैंटिज्म’ के रूप में परिभाषित किया है। यह मामला 11 मार्च का है, जब एक महिला पत्रकार ने दिल्ली से मुंबई जा रहे इंडिगो विमान में अपने बगल में बैठे व्यक्ति पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।
ऋचा चड्ढा को दिल्ली उच्च न्यायालय की फटकार
विमान की लैंडिंग के बाद, महिला ने एक्स पर उस व्यक्ति का नाम, फोटो और प्रोफेशनल जानकारी साझा की, जिससे वह पोस्ट तेजी से वायरल हो गया। कई मीडिया चैनलों ने इसे बिना सत्यापन के प्रकाशित किया। अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने भी उस पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, “Make him famous,” जिससे उस व्यक्ति की काफी बदनामी हुई।
‘डिजिटल भीड़तंत्र को बढ़ावा देना’
दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले पर सख्त टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि बिना सच्चाई की जांच किए ऐसे गंभीर आरोपों को बढ़ावा देना केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक अपमान और डिजिटल भीड़तंत्र को भी बढ़ावा देता है। जस्टिस ने कहा, “एक सार्वजनिक व्यक्ति को अपनी लोकप्रियता का उपयोग करने से पहले आरोपों की सच्चाई की जांच करनी चाहिए।”
कोर्ट ने ऋचा चड्ढा की पोस्ट को ‘उकसावे वाली’ बताया। आरोपित व्यक्ति ने इन आरोपों से इनकार किया है और मानहानि का मुकदमा दायर किया है। न्यायालय ने मीडिया और सेलिब्रिटीज को चेतावनी दी कि वे बिना पुष्टि के किसी को दोषी न ठहराएं। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि ऋचा चड्ढा ने बाद में अपना पोस्ट हटा लिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी घटना को तुरंत सच मानकर फैलाना खतरनाक हो सकता है। इससे निर्दोष व्यक्ति की इज्जत और करियर को नुकसान पहुंच सकता है। यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि सेलिब्रिटीज और मीडिया की जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। उनकी एक पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंचती है, इसलिए तथ्यों की जांच करना आवश्यक है।


