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  • मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर प्रभाव: सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी

    मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर प्रभाव: सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी

    सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी: मंदिरों में प्रवेश का अधिकार

    नई दिल्ली। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों और मठों में प्रवेश को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी विशेष वर्ग को बाहर रखने से समाज में विभाजन हो सकता है, जो हिंदू धर्म पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को सभी मंदिरों और मठों में जाने का अधिकार होना चाहिए।

    संविधान पीठ की सुनवाई

    यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा शबरिमला मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान की गई। पीठ धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और इसके विस्तार पर भी विचार कर रही है।

    संविधान पीठ के न्यायाधीश

    संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं, जिनके साथ न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।

    न्यायालय की टिप्पणियाँ

    सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यदि परंपरा के नाम पर किसी वर्ग को मंदिर में प्रवेश से रोका जाता है, तो इससे हिंदू धर्म पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति का मंदिर और मठ में प्रवेश का अधिकार होना चाहिए। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने सहमति जताते हुए कहा कि इस प्रकार का निष्कासन समाज को बांट देगा।

    संगठनों की दलीलें

    इस सुनवाई के दौरान, नायर सर्विस सोसाइटी, अयप्पा सेवा समाजम, और क्षेत्र संरक्षण समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने तर्क प्रस्तुत किया कि कुछ मंदिर विशेष वर्गों तक सीमित हो सकते हैं।

    वेंकटरमण देवरू मामले का उल्लेख

    अदालत ने वेंकटरमण देवरू मामले का हवाला देते हुए कहा कि मंदिरों में प्रवेश पर रोक लगाने की परंपरा का व्यापक प्रभाव धर्म पर पड़ सकता है।

    शबरिमला विवाद का इतिहास

    2018 में, सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के शबरिमला अयप्पा मंदिर में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया था। इसके बाद, 2019 में इस मुद्दे को व्यापक विचार के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया गया। वर्तमान में, अदालत धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित सात प्रमुख सवालों पर विचार कर रही है और सुनवाई जारी है।

  • अभिनेता सुनील शेट्टी ने उज्जैन महाकाल मंदिर की यात्रा के बाद कहा

    अभिनेता सुनील शेट्टी ने उज्जैन महाकाल मंदिर की यात्रा के बाद कहा

    सुनील शेट्टी का महाकाल से आशीर्वाद, फिल्म ‘बॉर्डर 2’ की सफलता के लिए की प्रार्थना

    भोपाल। बॉलीवुड के renowned अभिनेता सुनील शेट्टी मंगलवार को एक बार फिर उज्जैन पहुंचे। उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर, शेट्टी ने अपने बेटे की फिल्म की सफलता के लिए भगवान महाकाल से कामना की।

    महाकाल के प्रति सुनील की आस्था

    हिंदी सिनेमा के सदाबहार कलाकार सुनील शेट्टी की बाबा महाकाल के प्रति अत्यधिक श्रद्धा है। वह नियमित रूप से मंदिर आते हैं। मंगलवार दोपहर को, उन्होंने सीधे महाकाल मंदिर पहुंचकर दर्शन किए और गर्भगृह के बाहर से पूजा अर्चना की। मंदिर समिति ने उनका स्वागत किया।

    सफलता का आभार

    मीडिया से बातचीत में, सुनील शेट्टी ने बताया कि वह अपने बेटे की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ के रिलीज से पहले बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेने आए थे और अब फिल्म की सफलता के लिए आभार व्यक्त करने आए हैं। उन्होंने कुछ दिन पहले परिवार के साथ भी महाकाल का दर्शन किया था, जहां उन्होंने अपनी फिल्म की सफलता के लिए प्रार्थना की थी।

  • ताज की कहानी: क्या हैं ताजमहल के 22 बंद कमरों का असली रहस्य?

    ताज की कहानी: क्या हैं ताजमहल के 22 बंद कमरों का असली रहस्य?

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    द ताज स्टोरी का ट्रेलर हुआ रिलीज़ 🎬

    साल की सबसे विवादास्पद फिल्मों में से एक ‘द ताज स्टोरी’ का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया है। इस फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता परेश रावल मुख्य भूमिका में हैं, जो ताजमहल के गाइड विष्णु दास का किरदार निभा रहे हैं।

    ताजमहल का इतिहास और विवाद

    फिल्म में ताजमहल के निर्माण पर कई सवाल उठाए गए हैं। यह स्मारक सिर्फ एक मकबरा है या इसके पीछे कोई और कहानी है? 22 बंद कमरों के रहस्यों का खुलासा करने की कोशिश की जाएगी।

    फिल्म की खास बातें

    ‘द ताज स्टोरी’ में सामाजिक और ऐतिहासिक मुद्दों को छूते हुए रावल ने दर्शकों को एक नई दृष्टिकोण प्रदान करने का प्रयास किया है। ट्रेलर में दिखाए गए दृश्य और संवाद फिल्म की गहराई को दर्शाते हैं, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर सकते हैं।

    इस फिल्म की रिलीज़ के बाद, ताजमहल की वैधता और इसकी ऐतिहासिकता पर चर्चा और ज्यादा तेज़ होगी। दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए फिल्म में अनेक तत्व शामिल किए गए हैं।

    निष्कर्ष

    फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ की कहानी और इसके निर्माण में छिपे प्रश्न दर्शकों को आकर्षित करने के लिए तैयार हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह फिल्म ताजमहल और उसके इतिहास पर होने वाले विवादों को एक नए दृष्टिकोण से देख पाएगी।

  • रांची: 300 साल पुराना भवानी-शंकर मंदिर, नवरात्र में गोपनीय पूजा और गर्भगृह में दर्शन वर्जित

    रांची: 300 साल पुराना भवानी-शंकर मंदिर, नवरात्र में गोपनीय पूजा और गर्भगृह में दर्शन वर्जित

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    ठाकुरगांव का 300 साल पुराना भवानी-शंकर मंदिर: आस्था और रहस्य का प्रतीक ✨

    रांची के ठाकुरगांव में स्थित भवानी-शंकर मंदिर, आस्था और परंपरा का अनूठा संगम है। यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना है और अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहाँ स्थापित अष्टधातु से बनी ‘भवानी-शंकर’ की प्रतिमाएँ अत्यधिक दुर्लभ मानी जाती हैं, लेकिन भक्तों के लिए इनका दर्शन वर्जित है।

    गर्भगृह में प्रवेश केवल पुजारी और राजपरिवार के सदस्यों के लिए 🚪

    मंदिर की खासियत यह है कि गर्भगृह में केवल मंदिर के पुजारी और ठाकुरगांव के शाहदेव राजपरिवार के सदस्य ही जा सकते हैं। आम भक्त मंदिर के प्रांगण में बैठकर पूजा करते हैं और पुजारियों को चुनरी, पुष्प और प्रसाद अर्पित करते हैं। शाहदेव राजपरिवार के वंशज जयकुमार नाथ शाहदेव का कहना है कि यहां माँ भवानी का साक्षात रूप विद्यमान है।

    पूजा की रहस्यमय प्रक्रिया 🌌

    नवरात्र के दौरान, पूजा की प्रक्रिया रहस्यमय होती है। पुजारी अपनी आंखों पर पट्टी बांध कर भवानी-शंकर की प्रतिमा का अभिषेक करते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

    संधि बलि और दशहरे का मेला 🎉

    नवरात्र की अष्टमी तिथि पर संधि बलि की विशेष परंपरा का आयोजन किया जाता है। नवमी के दिन बकरों और एक भैंसे की बलि दी जाती है। यह रिवाज सदियों पुराना है और केवल राजपरिवार की अनुमति से ही संपन्न होता है। नवरात्र और विजयादशमी के दिन मंदिर के आसपास मेला भी लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

    मंदिर का ऐतिहासिक सफर 📜

    भवानी-शंकर मंदिर का इतिहास भी काफी रोचक है। कहा जाता है कि 1543 में नवरत्नगढ़ के महाराज रघुनाथ शाहदेव के बेटे यदुनाथ शाहदेव की बारात बक्सर जा रही थी। इसी दौरान उन्हें नदी के किनारे दिव्य चिंतामणि रत्न और भवानी-शंकर की प्रतिमाएं मिलीं। बाद में यदुनाथ शाहदेव के पुत्र, कुंवर गोकुल नाथ शाहदेव ने इन प्रतिमाओं की पूजा शुरू की और इस प्रकार मंदिर की स्थापना हुई।

    भवानी-शंकर मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, जो सदियों से भक्तों को आकर्षित कर रहा है।