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  • गूगल का अपडेट: कार में YouTube ऑडियो प्रबंधन हुआ सरल

    गूगल का अपडेट: कार में YouTube ऑडियो प्रबंधन हुआ सरल

    गूगल ने Android Auto के लिए YouTube प्लेटफॉर्म पर बैकग्राउंड प्लेबैक नियंत्रण की सुविधा का विस्तार करना शुरू कर दिया है। इस अपडेट से उपयोगकर्ता अब अपनी कार के डैशबोर्ड से सीधे वीडियो के ऑडियो को नियंत्रित कर सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि यह अभी भी YouTube ऐप का पूर्ण अनुभव प्रदान नहीं करता है।

    इस अपडेट में क्या है नया?

    इस नवीनतम फीचर के अंतर्गत, स्मार्टफोन पर चल रहे YouTube कंटेंट को अब Android Auto के मीडिया विजेट में देखा जा सकेगा। उपयोगकर्ता कार की स्क्रीन या स्टीयरिंग व्हील के बटन का उपयोग करके प्ले, पॉज और अगले वीडियो पर स्विच कर सकते हैं।

    यह ध्यान रखना आवश्यक है कि यह कोई अलग YouTube ऐप नहीं है, जिसमें वीडियो ब्राउज़िंग या सर्चिंग का विकल्प नहीं दिया गया है। इसके अलावा, उपयोगकर्ता किसी वीडियो को आगे स्किप नहीं कर सकते हैं, बल्कि सीधे अगले वीडियो पर जा सकते हैं। सभी प्लेबैक की शुरुआत अभी भी स्मार्टफोन से करनी होगी। यह बदलाव Android Auto की सुरक्षा नीति के अनुरूप है, जिसमें ड्राइविंग करते समय वीडियो प्लेबैक की अनुमति नहीं होती।

    केवल Premium उपयोगकर्ताओं के लिए

    यह नई सुविधा केवल YouTube Premium उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है, क्योंकि बैकग्राउंड प्लेबैक एक पेड फीचर है। मुफ्त उपयोगकर्ता इस सुविधा का लाभ नहीं उठा सकेंगे। हालांकि, Premium Lite प्लान में भी यह सुविधा शामिल की गई है।

    किस प्रकार के उपयोगकर्ताओं को होगा लाभ?

    यह अपडेट उन उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, जो YouTube का उपयोग पॉडकास्ट, इंटरव्यू या लंबे चर्चाओं को सुनने के लिए करते हैं। ड्राइविंग के दौरान कंटेंट को नियंत्रित करना अब और भी आसान हो जाएगा।

    भविष्य में और क्या उम्मीद की जा सकती है?

    हालांकि यह फीचर वर्तमान में सीमित है, लेकिन यह संकेत देता है कि भविष्य में Android Auto पर और भी बेहतर ऐप सपोर्ट और फीचर्स देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा अभी तक नहीं दी गई है।

  • टी20 विश्व कप जीतने के बाद गौतम गंभीर ने उठाया कानूनी मामला

    टी20 विश्व कप जीतने के बाद गौतम गंभीर ने उठाया कानूनी मामला

    नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अपनी पहचान के अनुचित उपयोग के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट की कमर्शियल डिवीजन में एक सिविल मुकदमा पेश कर एआई द्वारा निर्मित डीपफेक वीडियो, झूठी सामग्री, और बिना अनुमति उनके नाम का उपयोग कर उत्पाद बेचने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    रिपोर्टों के अनुसार, 2025 के अंत से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर उनके नाम से नकली सामग्री की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। Instagram, X, YouTube, और Facebook जैसे प्लेटफार्मों पर एआई, फेस-स्वैप, और वॉइस क्लोनिंग तकनीक का उपयोग कर ऐसे वीडियो बनाए गए हैं, जिनमें उन्हें ऐसे बयान देते दर्शाया गया है जो उन्होंने कभी नहीं कहे। एक गलत इस्तीफे का वीडियो 29 लाख से अधिक बार देखा गया, जबकि एक और वीडियो ने 17 लाख व्यूज का आंकड़ा पार किया।

    16 पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया

    यह मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर भी उनके नाम और छवि का इस्तेमाल कर बिना अनुमति पोस्टर और अन्य उत्पाद बेचे जा रहे हैं। इस मामले में कुल 16 पक्षों को प्रतिवादी घोषित किया गया है, जिनमें कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के साथ-साथ Amazon और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं। इसके अलावा, Meta Platforms, Google और अन्य तकनीकी कंपनियों को भी इसे श्रेणीबद्ध किया गया है।

    अदालत के पुराने फैसलों का उल्लेख

    गंभीर ने अपने मुकदमे में कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेडमार्क एक्ट 1999 और कमर्शियल कोर्ट से जुड़ी कानूनी प्रावधानों का संदर्भ दिया है। साथ ही, उन्होंने अदालत के पूर्व के निर्णयों का उल्लेख किया है, जिनमें व्यक्तित्व अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है।

    2.5 करोड़ का हर्जाना मांगा

    उन्होंने कोर्ट से 2.5 करोड़ रुपये का हर्जाना, सभी झूठी सामग्री को हटाने, और भविष्य में उनके नाम, चेहरे और आवाज के अनुचित उपयोग पर स्थायी रोक लगाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने शीघ्र सुनवाई की मांग की है ताकि इस प्रकार की सामग्री को तुरंत हटाया जा सके।

    गौतम गंभीर ने कहा कि उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर फर्जी जानकारी फैलाई जा रही है और इससे आर्थिक लाभ भी उठाया जा रहा है। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि कानून और सम्मान से संबंधित गंभीर मुद्दा बताया है。

  • Netflix-YouTube जैसे OTT प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री के लिए अब Aadhaar प्रमाणन अनिवार्य

    Netflix-YouTube जैसे OTT प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री के लिए अब Aadhaar प्रमाणन अनिवार्य

    OTT कंटेंट के लिए आधार वेरिफिकेशन: भारत के उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि ऑनलाइन सामग्री देखने के लिए उपयोगकर्ताओं को अपनी उम्र की पुष्टि आधार या पैन कार्ड के माध्यम से करनी हो सकती है। यह उपाय उन सामग्रियों पर लागू होगा, जिन्हें ‘अश्लील’, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए ‘आपत्तिजनक’ या ‘राष्ट्र-विरोधी’ माना जाएगा। यह जानकारी जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच द्वारा डिजिटल कंटेंट नियमों पर चल रही सुनवाई के दौरान पेश की गई थी।

    यह नवीनतम अपडेट सर्वोच्च न्यायालय के एक सुझाव से संबंधित है, जिसे अभी सरकारी नियमों में शामिल नहीं किया गया है। यह सुझाव 27 नवंबर, 2025 को हुई सुनवाई में सामने आया था।

    विवरण क्या है?

    विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब लोकप्रिय यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया, सायम रैना और कुछ अन्य प्रस्तुतकर्ताओं के खिलाफ ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो के एक एपिसोड में अश्लील टिप्पणियों के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। इस शो में कुछ ऐसे चुटकुले और संवाद थे, जो विकलांगों और संवेदनशील मुद्दों पर अनुचित समझे गए। इसी वजह से यह मामला उभरा।

    इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमल्या बागची की बेंच द्वारा की जा रही थी। सुनवाई में, बेंच ने चिंता जाहिर की कि यूट्यूब, नेटफ्लिक्स और अन्य OTT प्लेटफार्मों पर उपलब्ध यूजर-जनरेटेड कंटेंट के लिए मौजूदा नियम पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अश्लील या हानिकारक सामग्री की उपलब्धता नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य और समाज की नैतिकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

    एडल्ट कंटेंट को रोकने के लिए आधार वेरिफिकेशन का सुझाव

    ऑनलाइन अश्लील सामग्री को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि किताबों या पेंटिंग में अश्लीलता अलग होती है, जहां नीलामी होने पर रोक लगाई जा सकती है। लेकिन मोबाइल फोन पर, यह स्थिति भिन्न है, क्योंकि एक बार फ़ोन ऑन करने पर सामग्री तुरंत सामने आ जाती है।

    CJI सूर्यकांत ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जबकि प्लेटफॉर्म चेतावनी प्रदर्शित करते हैं, वह केवल कुछ सेकंड के लिए होती है और उसके बाद शो तुरंत शुरू हो जाता है। इसलिए आधार वेरिफिकेशन का विकल्प उपयुक्त हो सकता है, जो दर्शकों की उम्र की पहचान कर सके। इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सुझाव है और कोई अनिवार्य आदेश नहीं है।

  • पत्रकार बन बहरूपिया पहुंचा, बांध कर पिटाई

    फर्जी पत्रकार को ग्रामीणों ने रस्सी से बांध की पिटाई

    एसटीएससी केस उठाने का बना रहा था दबाव

    यू ट्यूब में खबर चला कर मांग रहा था रंगदारी

    रांची। मांडर थाना के ग्राम चटवल में आज सुबह पत्रकार के नाम पर गांव के लोगों को एक मामले में केस उठाने की धकमी देने,और रंगदारी मांगने के आरोप में ग्रामीणों ने पकड़ कर पिटाई कर दी, उसके बाद उसे पेड़ में रस्सी से  बांध दिया। बाद में इसकी जानकारी मांडर थाना पुलिस को दी गयी,तब पुलिस उसे ग्रामीणों की चंगुल से छुड़ा कर थाना ले गयी।

    ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक चटवल गांव का विशुनधारी मुंडा ने छेदी साहू पर जमीन विवाद को लेकर एसटीएससी थाने में केस किया है।इस मामले में आरोपी विवेक सोनी यू ट्यूब पर खबर चलाने के बाद आज गांव जाकर विशुनधारी मुंडा से दोबारा न्यूज नहीं चलाने के लिए पैसे की मांग कर रहा था। इसकी जानकारी होने पर विशुनधारी के  परिजनों ने गांव के लोगों को मामले की जानकारी दी,उसके बाद लोगों ने उसे पकड़ कर पेड़ से बांध दिया  ग्रामीणों के मुताबिक रंगदारी मांगने  वाला विवेक सोनी खुद को जी 24 यू ट्यूब का पत्रकार कह कर गांव जा कर विशुन देव से रंगदारी मांग रहा था। पैसा नहीं देने पर उसके खिलाफ खबर चलाने की धमकी दे रहा था।