सुवर्णरेखा नदी के निकट 227 किलो का अमेरिकी बम बरामद, सेना को किया गया बुलावा

झारखंड में 80 साल पुराना जिंदा बम बरामद

जमशेदपुर: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपड़ा-नागुड़साई क्षेत्र में, सुवर्णरेखा नदी के किनारे बालू खोदते समय एक बेहद खतरनाक अनएक्सप्लोडेड बम (UXO) पाया गया है। इस बम का वजन लगभग 227 किलो है और इसका आकार गैस सिलिंडर के समान है।

बम की पहचान और जिला प्रशासन की कार्रवाई

बम पर स्पष्ट रूप से अंग्रेजी में लिखा है — “AN-M64 500-LB… American Made… Unexploded (UXO)”。 बम निरोधक दस्ते (BDDS) की टीम ने मौके पर पहुंचकर इसकी जांच की और पुष्टि की कि यह जिंदा है और अत्यंत घातक भी। बम की विशालता को देखते हुए इसे सामान्य तरीकों से निष्क्रिय करना संभव नहीं है। जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है।

सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात

पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया है और आसपास के निवासियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बम के निकट न जाएं और किसी प्रकार की छेड़छाड़ से बचें। इसके अलावा, नदी के दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की सीमा होने के कारण वहां भी सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।

सेना की सहायता से होगा निष्क्रियकरण

पूर्वी सिंहभूम के एसपी (रूरल) ऋषव गर्ग ने बताया कि बम डिस्पोजल स्क्वॉड ने इसे “एक्टिव” पाया है। एसएसपी पियुष पांडे ने भारतीय सेना की विशेष बम डिस्पोजल यूनिट को पत्र लिखा है। सेना की टीम के पहुंचने के बाद, बम को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर या नियंत्रित विस्फोट के माध्यम से निष्क्रिय किया जाएगा।

बम का संभावित इतिहास

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) के समय का अमेरिकी निर्मित बम हो सकता है। कुछ स्थानीय लोग इसे 1971 के भारत-पाक युद्ध या 2018 में कलाईकुंडा एयरबेस के पास हुए फाइटर प्लेन क्रैश से भी जोड़ते हैं। नदी के कटाव और बालू खनन के कारण यह बम दशकों बाद बाहर आया है। UXO अत्यंत अनिश्चित और खतरनाक होते हैं, और इनमें हल्की सी भी छेड़छाड़ से विस्फोट हो सकता है।

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