प्रसव पीड़ा में गर्भवती को 4 किलोमीटर खटिया पर ले जाकर अस्पताल पहुंचाया गया

झारखंड में खाटिया एंबुलेंस की स्थिति पर चिंता

झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में खाटिया एंबुलेंस की तस्वीर अब सामान्य होती जा रही है। यह स्थिति लोगों के लिए अब कोई आश्चर्य की बात नहीं रही है। ग्रामीणों ने इस प्रकार की परिवहन व्यवस्था के प्रति एक प्रकार की आदत बना ली है, जो कि सिस्टम की बेरुखी का परिणाम है। विकास के दावों के बावजूद, ऐसे इलाकों में आज भी गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट का सहारा लेना पड़ता है, जो कि चार लोगों के कंधों पर उठाई जाती है।

महिला की जान बचाने में खाट का सहारा

हाल ही में एक घटना में, जब स्थानीय महिला टुडू की तबीयत बिगड़ने लगी, तो उसे खाट पर ले जाना पड़ा। अस्पताल पहुंचने में यदि थोड़ी भी देरी होती, तो उसकी स्थिति गंभीर हो सकती थी। हालांकि, समय पर अस्पताल पहुंचने से महिला का इलाज शुरू किया गया और उसकी जान बच गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की बदहाली की कहानी है।

सड़क के अभाव के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को वर्षों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हर बार प्रशासन से आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण किया जाए, ताकि भविष्य में किसी को भी सड़क की कमी के कारण जान की कीमत न चुकानी पड़े।

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