आजादी के बाद झारखंड के इस आदिवासी गांव में सौर ग्रिड से पहुंची बिजली

सौर ऊर्जा से रोशन हुए बाकीपोना गांव के लोग

सिमडेगा जिले से लगभग चालीस किमी दूर स्थित बाकीपोना गांव आज भी अंधकार में था, लेकिन अब यह **सौर ऊर्जा** के माध्यम से रोशन हो चुका है। गांव तक पहुंचने के लिए तीन किमी का रास्ता बेहद खराब और कष्टदायक है। यहां लगभग अस्सी घर उरांव आदिवासियों के हैं। 2023 में **टीआरआई** (ट्रांसफार्म रुरल इंडिया) के सहयोग से और टाटा कैपिटल की आर्थिक सहायता से गांव ने ढिबरी युग से बाहर निकलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्तमान में यहां सौर ऊर्जा का ट्रायल चल रहा है।

गांव की रोशनी और खुशहाली

पिछले दो वर्षों से इस गांव में सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इस दौरान बिजली एक बार भी नहीं कटी है। इसके लिए गांव में एक समिति का गठन किया गया है, जो हर महीने बिजली का बिल वसूल करती है। सौर ऊर्जा ने गांव की जिन्दगी में सुख-शांति का संचार किया है, जिससे निवासी काफी खुश हैं।

पूर्व की चुनौतियां और वर्तमान बदलाव

चार सौ की जनसंख्या वाला यह गांव पहले बिना बिजली के कैसे जीवन यापन कर रहा था, इसकी कल्पना भी करना मुश्किल है। सौर ऊर्जा आने से जीवन में नया उजाला फैला है। अब ग्रामीण मोबाइल चार्ज करने के साथ-साथ अपने घरों में आटा चक्की भी चला सकते हैं। इसके अलावा, सब्जियां उगाने के लिए कुएं से पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई ग्रामीण बताते हैं कि दो साल पहले तक वे केवल ढिबरी की रोशनी में ही जीते थे।

प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता

गांव के पास बहने वाली बाकी नदी बारिश के समय में भर जाती है, जिसका उपयोग किसान सिंचाई के लिए करते हैं। यहां केवल एक ही फसल, धान, उगाई जाती है। केरसेई प्रखंड से 20 किमी दूर स्थित यह गांव पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। यहां के लोग जंगल से मिलने वाले उत्पादों, जैसे लाह और मडुआ के जरिए अपना गुजारा करते हैं।

सौर ग्रिड की सफलता और भविष्य की योजनाएं

टीआरआई के प्रशांत ने बताया कि सिमडेगा जिले में लगभग 70 गांवों में सौर ग्रिड स्थापित हो चुका है। 19 गांवों में कार्य प्रगति पर है, जहां सरकार ने अभी तक बिजली नहीं पहुंचाई है। बोलबा के रेंगारबाहर गांव का भी यही हाल है, जहां पिछले साल 24 जनवरी से सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू हुआ है।

बिजली की योजनाएं

सिमडेगा के बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता मनीष चंद्रपूर्ति ने कहा कि जिले के 600 से अधिक टोलों में बिजली नहीं पहुंची है, लेकिन 170 टोलों में काम पूरा हो चुका है। अन्य टोलों में भी कार्य जारी है और अगस्त-सितंबर तक सभी टोलों में बिजली पहुंच जाएगी।

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