खनिज सेस पर रोक: झारखंड को कमजोर करने का प्रयास, 50 लाख महिलाएं होंगी प्रभावित: प्रदीप यादव

झारखंड में खान एवं खनिज संशोधन विधेयक पर उठी आवाज़

झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा पारित ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ को राज्य के अधिकारों पर हमला बताते हुए इसे एक **काला कानून** करार दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों को कमजोर करने के प्रयास में है, जिससे उन्हें उनके वाजिब हक से वंचित किया जा रहा है।

संविधान पीठ के फैसले का उल्लंघन

प्रदीप यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के निर्णय के बाद राज्यों को खनिज संसाधनों पर अतिरिक्त सेस लगाने का अधिकार मिला था, जिसे केंद्र सरकार अब छीनने का प्रयास कर रही है। यह कदम सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है और राज्यों की आर्थिक स्वायत्तता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

झारखंड पर प्रभाव

उन्होंने चेतावनी दी कि इस कानून का झारखंड की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि राज्य में खनिज संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्र की यह मंशा स्पष्ट है कि जो राज्य उसके राजनीतिक विचारों से असहमत हैं, उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर किया जाए। प्रदीप यादव ने कहा कि झारखंड में गरीबों, महिलाओं, किसानों और जरूरतमंदों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं, जिन पर इस विधेयक का प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

महिलाओं के अधिकारों की रक्षा

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल राज्य सरकार के अधिकारों की बात नहीं है, बल्कि 50 लाख से अधिक महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा है। झारखंड की महिलाएं अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगी।

कांग्रेस का विरोध

प्रदीप यादव ने बताया कि कांग्रेस पार्टी ने संसद में इस विधेयक का विरोध किया है और झारखंड में भी पार्टी राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता अपने जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर अपने अधिकारों की लड़ाई को कमजोर नहीं होने देगी। केंद्र सरकार को राजनीतिक दुर्भावना से ऊपर उठकर राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।

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