बीसीसीआई ने DRS नियम में बदलाव, टीमों की चालें अब बेकार

आईपीएल 2026 में नए नियमों की घोषणा

नई दिल्ली: आईपीएल (IPL 2026) के आगामी सत्र में अब तक केवल दो मैच खेले गए हैं, लेकिन नए नियमों के प्रति स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट होती जा रही है। इस साल कुछ नए नियम लागू किए गए हैं और कुछ पुराने नियमों में संशोधन किया गया है। एक महत्वपूर्ण बदलाव डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) को लेकर किया गया है, जिसका उद्देश्य टीमों की चालाकियों पर अंकुश लगाना है। BCCI ने DRS के उपयोग में एक नया प्रावधान जोड़ा है, जिसके तहत थर्ड अंपायर केवल उसी फैसले की जांच करेगा, जिसके लिए अपील की गई है। इसका मतलब है कि अब एक DRS पर केवल एक ही चेक किया जाएगा।

कप्तानों की बैठक में बदलाव की जानकारी

क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, नए सत्र की शुरुआत से पूर्व सभी 10 कप्तानों की एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें इस बदलाव की जानकारी साझा की गई। BCCI में मैच रेफरी के प्रमुख जवागल श्रीनाथ और अंपायर प्रमुख नितन मेनन ने टीमों को इस नए नियम के बारे में विस्तार से समझाया और इसके प्रयोग के तरीके पर प्रकाश डाला। इस बदलाव का वास्तविक अर्थ और इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।

DRS में क्या परिवर्तन हुआ है?

पिछले सत्र तक, DRS रेफरल के मामले में अपील के साथ ही अंपायर अन्य जांच भी करते थे। उदाहरण के लिए, यदि फील्डिंग टीम कैच के लिए अपील करती थी और यह खारिज हो जाती थी, तो DRS लेते समय वाइड बॉल का भी परीक्षण होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। यदि फील्डिंग टीम ने केवल कैच के लिए अपील की है, तो टीवी अंपायर केवल इसी पर अपने निर्णय देगा।

अगर बल्लेबाज को लगता है कि उसका बल्ला गेंद से नहीं लगा और इसे वाइड दिया जाना चाहिए था, तो उसे DRS के लिए अपनी अपील स्वयं करनी होगी। इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बल्लेबाज को अपील करने के लिए शुरू में दिए गए 15 सेकंड के भीतर ही इसे करना होगा। टीवी अंपायर के निर्णय के बाद दोबारा अपील के लिए अतिरिक्त 15 सेकंड नहीं दिए जाएंगे।

कनकशन से जुड़े नियमों में परिवर्तन

इसके अलावा, कुछ अन्य नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। एक बड़ा निर्णय कनकशन सब्स्टीट्यूट से संबंधित है। यदि किसी खिलाड़ी को कनकशन के कारण बदलाव की आवश्यकता होती है, तो उसकी जगह उस ही प्रकार का खिलाड़ी टीम में शामिल होगा, जिसे पहले से चयनित 5 इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूट में से चुना जाएगा। यदि विकेटकीपर को बदलने की आवश्यकता होती है, तो यह जिम्मेदारी भी उसी मैच के लिए चयनित स्क्वॉड में से किसी को सौंपी जाएगी। यदि कोई विदेशी खिलाड़ी कनकशन से प्रभावित होता है, तो उसके स्थान पर विदेशी खिलाड़ी तभी आ सकेगा, जब प्लेइंग-11 में केवल 3 विदेशी खिलाड़ी हों, अन्यथा भारतीय खिलाड़ी ही उसे प्रतिस्थापित करेगा।

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