झारखंड की राजनीति में फेरबदल: रश्मि सिंह ने भाजपा में प्रवेश किया
रांची: झारखंड की राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटना घटी है। रश्मि सिंह, जो पहले कांग्रेस से जुड़ी थीं और फुसरो नगर परिषद की वार्ड पार्षद हैं, ने सोमवार को अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण की। यह कार्यक्रम भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक मिलन समारोह के दौरान हुआ। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने सभी नए सदस्यों का पार्टी में स्वागत किया और रश्मि सिंह तथा उनके समर्थकों को पार्टी का पट्टा पहनाकर औपचारिक सदस्यता दिलाई।
सैकड़ों लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली
इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने मिस कॉल के माध्यम से ऑनलाइन भाजपा की सदस्यता भी ग्रहण की। रश्मि सिंह के अलावा विनय सिंह, अनिल सिंह, विजेंद्र कुमार, उर्मिला देवी, शोभा सिंह, सीमा सिंह, निधि सिंह, राजीव रंजन, विक्रम कुमार और श्वेता सिंह समेत सैकड़ों लोग भाजपा में शामिल हुए।
भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर सदस्यता ली
आदित्य साहू ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और जनकल्याण के कार्य तेजी से हो रहे हैं, जिसके चलते लोग भाजपा से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी की पारदर्शी नीतियों और विकास कार्यों का प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भाजपा हमेशा से महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने बताया कि आज महिलाएं केवल भागीदार नहीं बल्कि देश के विकास की अग्रणी शक्ति बन चुकी हैं। पार्टी महिलाओं को समान अधिकार और नेतृत्व के अवसर प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है।
भाजपा संगठन की मजबूती
आदित्य साहू ने आगे कहा कि रश्मि सिंह और उनके समर्थकों के भाजपा में शामिल होने से संगठन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक समर्थन मिलेगा।
कार्यक्रम में कई नेता उपस्थित थे
इस कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय, सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और अशोक बड़ाईक, बोकारो जिला अध्यक्ष सुरेंद्र राज और अर्चना सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। फुसरो की वार्ड पार्षद का भाजपा में शामिल होना कांग्रेस के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जबकि भाजपा इसे संगठन विस्तार और जनसमर्थन बढ़ने के रूप में देख रही है।