छह महीने की रेकी के बाद किराये के मकान में बनी योजना… कैरव गांधी अपहरण का बड़ा खुलासा

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

जमशेदपुर में अपहरण के मामले का खुलासा, पांच गिरफ्तार

जमशेदपुर में कैरव गांधी के अपहरण को लेकर पुलिस ने महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई है। पता चला है कि पिछले छह महीनों से कैरव गांधी की रेकी की जा रही थी, और अपहरण की योजना एक किराए के कमरे में बनाई गई थी। इस मामले में अब तक पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

🗓️ अपहरण की योजना का खुलासा

पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि फरार आरोपियों में से एक, अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह, लगभग छह महीने पहले जमशेदपुर आया था। उसने साकची क्षेत्र में एक किराए का कमरा लिया और वहीं से अपहरण की रणनीति तैयार की। इस प्रक्रिया के दौरान कैरव गांधी की लगातार निगरानी की जाती रही।

🚨 गिरफ्तार आरोपियों की सूची

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पंजाब के लुधियाना से मनप्रीत सिंह सेखों, गुरदीत शेर सिंह, और अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह शामिल हैं। इसके अलावा, बिहार के शेखपुरा से राजकरण यादव और संतोष कुमार उर्फ संतोष विल्लेन भी गिरफ्तारी के दायरे में आए हैं। पुलिस ने इनके पास से पांच मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।

🔍 खुलासा: पहचान छिपाने की कोशिश

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि अपहरणकर्ताओं ने जानबूझकर एक-दूसरे की पहचान छिपाई थी, जिससे कि किसी की गिरफ्तारी पर पूरे सबूत न मिलें। घटना के दिन कुछ आरोपी पुलिस की वर्दी में भी आए थे, जिसमें मनप्रीत सिंह वाहन चालक की भूमिका में था।

🛣️ अपहरण के बाद की यात्रा

कैरव गांधी को स्कॉर्पियो वाहन से चांडिल गोलचक्कर के पास ले जाया गया। वहां से उसे दूसरे वाहन में बिठाकर रांची होते हुए डोभी लाया गया, फिर वह गया जिले के बिसर गांव में रखा गया।

🚓 पुलिस की प्रभावी कार्रवाई

13 जनवरी को अपहरण की सूचना मिलते ही बिस्टुपुर थाने में मामला दर्ज किया गया। विशेष टीम का गठन कर जांच शुरू की गई। पुलिस की तेज कार्रवाई के चलते 26-27 जनवरी को कैरव गांधी को सुरक्षित बरामद किया गया।

🔫 मुठभेड़ में उठी अतिरिक्त चुनौतियाँ

पुलिस मुठभेड़ के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान एक आरोपी ने पुलिस का हथियार छीनकर फायरिंग की, लेकिन उसे तत्काल दबोच लिया गया।

🌐 अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश

मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग विशेष टीमें बनाई गईं। पंजाब, दिल्ली, कोलकाता और बिहार में छापेमारी कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से कुछ का आपराधिक इतिहास भी रहा है।

पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश कर रही है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

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