भाजपा की मांग: मनोज कौशिक को सीआईडी से हटाए बिना ट्रेजरी स्कैम की निष्पक्ष जांच असंभव।

झारखंड में ट्रेजरी घोटाला: 350 करोड़ रुपये तक पहुंचा आंकड़ा

रांची: झारखंड में एक बड़ा ट्रेजरी घोटाला सामने आया है, जिसकी शुरुआत लगभग 3.5 करोड़ रुपये से हुई थी। यह घोटाला अब 14 जिलों में फैल चुका है और इसकी कुल राशि आधिकारिक तौर पर 350 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। भाजपा के प्रवक्ता ने चिंता जताई है कि यह आंकड़ा जिस तेजी से बढ़ रहा है, वह भविष्य में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले का संकेत दे सकता है। इस स्थिति को चारा घोटाले के दूसरे संस्करण के समान बताया गया है।

जांच की मांग और निष्पक्षता पर सवाल

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इस महाघोटाले की जांच झारखंड पुलिस के बजाय सीआईडी को सौंपी जानी चाहिए, ताकि एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो सके। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह उद्देश्य संदिग्ध नजर आता है। आरोप लगाया गया है कि “अनुराग गुप्ता मॉडल” के तहत सीआईडी और झारखंड पुलिस की कमान एक ही अधिकारी के हाथों में केंद्रित कर दी गई है। इस समय एडीजी सीआईडी मनोज कौशिक को एडीजी मुख्यालय और रांची के आईजी का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है, जिससे निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस ट्रेजरी से संबंधित जिम्मेदारियां

अजय साह ने बताया कि यह ट्रेजरी घोटाला मुख्य रूप से पुलिस ट्रेजरी से जुड़ा हुआ है, जिसकी जवाबदेही डीडीओ यानी संबंधित जिलों के एसपी पर होती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी और क्या दोषियों को सजा मिल सकेगी।

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