Bollywood कोरियोग्राफर ने दो मिसकैरेज का सामना किया, मां

फराह ख़ान: एक प्रेरणादायक कहानी

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बॉलीवुड में कई सितारे ऐसे हैं जिनकी पेशेवर जिंदगी बहुत सफल रही है, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। इनमें से एक व्यक्ति हैं बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर फराह ख़ान, जिन्होंने न सिर्फ़ अभिनय की दुनिया में बड़े-बड़े सितारों को नचाया है, बल्कि अपने व्यक्तिगत जीवन में भी कई दुख झेले हैं।

फराह ख़ान का निजी जीवन

फराह अपनी मां को खोने और दो बच्चों के अलविदा लेने के दुख से गुजर चुकी हैं, जिसके चलते वह मानसिक रूप से बेहद कमजोर महसूस करती हैं। इस समय, वह यूट्यूब पर कुकिंग व्लॉग्स बनाकर लोगों का मनोरंजन कर रही हैं। 9 जनवरी को, फराह अपना 60वां जन्मदिन मना रही हैं और इस अवसर पर उनकी कुकिंग व्लॉग्स बहुत ट्रेंड कर रही हैं।

बच्चे और व्यक्तिगत संघर्ष

फराह ख़ान ने शिरीष कुंदर से शादी की और तीन बच्चों के माता-पिता बने। उनके लिए पेरेंट्स बनना आसान नहीं था, क्योंकि फराह ने दो बार मिसकैरेज का दुख झेला है। उन्होंने एक बातचीत में अपनी इस पीड़ा के बारे में बताया। उनके अनुसार, “मैं दो बार आईवीएफ में असफल रही और उस दौरान बार-बार रोने लगती थी।”

माँ की कमी का दर्द

सिर्फ बच्चे खोने का ही नहीं, बल्कि फराह ने अपनी माँ का भी खोया, जो जुलाई 2024 में निधन हो गईं। उनकी माँ मेनका ईरानी लंबे समय से बीमार चल रही थीं।

फराह की पेशेवर यात्रा

फराह का जन्म 1965 में हुआ था और उनका बचपन फिल्म इंडस्ट्री के माहौल में बीता। उनकी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज से हुई। कोरियोग्राफी की दुनिया में उनकी शुरुआत 1992 में फ़िल्म “जो जीता वही सिकंदर” से हुई। इस फ़िल्म में उन्होंने “पहला नशा” का कोरियोग्राफ़ी किया, जो आज भी बॉलीवुड के क्लासिक गानों में गिना जाता है।

मुख्य उपलब्धियाँ

प्रतिभाशाली कोरियोग्राफर ने 100 से अधिक फ़िल्मों में बड़े सितारों के साथ काम किया है, जिनमें शाहरुख़ ख़ान, सलमान ख़ान और दीपिका पादुकोण शामिल हैं। उनके निर्देशन में बन चुकी फ़िल्में जैसे “मैं हूं ना”, “ओम शांति ओम” और “हैप्पी न्यू ईयर” ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता का नया आयाम स्थापित किया।

फराह का व्यक्तिगत जीवन

फराह का विवाह शिरीष कुंदर से हुआ, जिनके साथ उनकी प्रेम कहानी फ़िल्म “मैं हूं ना” के सेट पर शुरू हुई। उन्होंने अपनी शादी को एक खास तरीके से मनाया, जिसमें दक्षिण भारतीय और मुस्लिम परंपराओं का संगम देखने को मिला। किरदारों के बचपन से ही खुद में रिफ्लेक्शन पाते हुए, फराह ख़ान ने अपनी सख्त ममता के साथ अपने बच्चों को बड़ा करने का काम किया है।

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